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11वीं पंचवर्षीय योजना की दहलीज पर

02 Oct 2006      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

दसवीं पंचवषीय योजना शीघ्र ही समाप्त हो रही है। इस योजना की अवधि वर्ष 2002 से 2007 तक है। 11 पंचवर्षीय योजना की तैयारियाँ शुरु हो गए है। Prof. Vijay Shankar Vyasयह हकीकत है की वर्तमान आर्थिक उदारीकरण के दौर में पंचवर्षीय योजनाओं का महत्व काफी कम हो गया है। आर्थिक नीति निर्धारण का कार्य वित्त मन्त्रालय, और कुछ हद तक रिजर्व बैंक, करते है। ये संस्थाएँ भी बाजार की शक्तियों की अनदेखी नहीं कर शक्ती है। फिर भी पंचवर्षीय का अपना मह्त्व हैं। वे देश की दूरगामी अर्थ नीतियों को चिहिन्त करती हैं। उनका, और अनन्त योजाना आयोग का, मह्त्व इससे भी बढ जाता हैं क्योकिं राष्ट्र योजना के अनुरूप कार्यक्रम के लिए वह केन्द्र के विभीन्न विभागों को और राज्यों को बडी मात्रा में वितिय सहायता देने का प्रावधान करता हैं। योजना आयोग पंचवर्षीय योजना के द्वारा देश की आर्थिक गतिविधियों पर गह्ररा असर डाल सकता हैं।

11 वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत ऐसे समय में हो रही हैं जब देश में आर्थिक दृश्टि से कईं सबल पक्ष उभर कर आ रहें है। विगत वर्षां में सकल घ्ररेलू उत्पादन 8 प्रतिशत के लगभग की रफ्तार से बढ रहा हैं। अनेक बाह्य और आन्तरिक कठिनाइयों के बावजूद मुद्रास्फिति की दर 5 प्रतिशत से नीचे ही रही हैं। देश में विदेशी मुद्रा क भण्डार 15000 करोड डालर से भी अधिक इकट्ठा हो गया हैं।
औद्यगिक विकास की एवं निर्यात की दर भी बहुत ही सतोषजनक रही हैं। इन सब कारणों से आगामी वर्षों में देश के आर्थिक विकास को और गति मिलने की संभावनाएँ उत्पन्न हो रही है।

परन्तु देश के सामने कठिन चुनौतियां भी हैं। 11वीं पंचवर्षीय योजना बनाते समय इन चुनौतियां का ध्यान रखना आवश्यक हैं। हमारी सबसे बडी कमजोरी जो पिछले वर्षो में उभर कर आइ है वह कृषि क्षेत्र मे स्थगन हैं। अनाज के उत्पादन की दर जनसंख्या की दर से भी कम हो गए हैं। पिछले पाँच वर्षो मे कृषि उत्पादन की दर 2 प्रतिशत से भी कम हो रही हैं। इसके परिणाम स्वरूप न केवल आर्थिक विकास की गति में अवरोध आया हैं, कृषि से सम्बनिधत लाखों परिवारों को भंयकर मुसीबतों का सामाना करना पड रहा हैं। किसानों की बढ्त्ती हुइ आत्महत्या का सहारा लिया,  हजारों लाखों कृषि से जुडे हुए परिवार है जिनके लिये आज जीना दुर्भर हो रहा हैं।

मुख्यत कृषि में स्थगन के कारण, मगर अन्य आनुसांगिक कारणों से भी, देश में गरीबों के बडे वर्ग को राहत नहीं मिल सकी हैं। राज्य की और् से कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में नियोजन में कमी आने के कारण शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधाएँ मिलना भी उत्तरोतर कठिन हो रहा हैं। देश में शिक्षा और स्वास्थ्य को मुहैया करवाने के लिय संस्थाकीय ढांचा विधामान हैं परन्तु इन संस्थाओं की कार्य पदत्ति के कारण गरीब वर्ग को, और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवारों को, इन सुविधाओं का पुरा लाभ नहीं मिल पा रहा।

देश की एक अन्य बडी समस्या बढती हुइ आर्थिक असमानता है। विभिन्न वर्गों के बीच में असमानता की खाई बढती जा रही है। इसी प्रकार विभिन्न क्षेत्रों किंवा राज्यों में, आर्थिक असमानता कम होने के स्थान पर् निरन्तर बढ रही हैं। देश और समाज के व्यापक हित मे इस प्रकार बढ्ती हुइ असमानता बहुत बडी बाधा हैं।

हमारी एक अन्य मह्त्वपूर्ण कमी जो पिछले वर्षो में सामने आई है, वह शिक्षा के स्तर में, और विशेषकर उच्च शिक्षा के स्तर में, आ रही गिरावट है। एक और हम नालेज सोसाइटी ज्ञान पर आधारित समाज के निर्माण की बात कर रहें हैं, दूसरी और कुछेक सुप्रसिद् संसथाओं को छोडकर उच्च शिक्षण की अधिकतर संस्थाओं में शिक्षा और अनुसंधान का स्तर धीरे धीरे नीचे गिरता जा रहा हैं। हम ज्ञान के क्षेत्र में केवल आई आई टी, आई आई एम और कुछेक इसी कोटि की सस्थानों के बल पर आगे उन्नति नही कर सकेंगें। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के अन्य संस्थानों में शिक्षा के स्तर को सुधारने की स्पष्ट आवश्यकता हैं।

एक अन्य और शायद सबसे विकट समस्या प्रशासन की हैं। यद्यपि सरकारी नोकरशाही का वर्चस्व आर्थिक क्षेत्र में कम हो रहा है, फिर भी इसे नकारा नही जा सकता। अभी भी कईं मह्त्वपूर्ण निर्णय नौकरशाहों के द्वारा ही किये जाते हैं। वर्तमान नौकरशाही अपनी सोच और व्यवहार के कारण आने वाली चुनोतियों का मुकाबला करने में सक्षम नही हैं। समय के अनुरूप प्रशासन के ढाँचे को, और उससे जुडे व्यक्तियों की क्षमताओं को, सुधारना एक मह्त्वपूर्ण प्राथमिकता हैं। नौकरशाही से भी अधिक सुधार की आवश्यकता राजनैतिक नेतृत्व में हैं, जिसका स्तर समय के अनुरूप सुधारने के बजाय दिन-ब-दिन अधिक विकृत होता जा रहा हैं।

हमारी एक भंयकर व्याधि ऊपर से नीचे तक फैला भ्रष्टाचार है। आर्थिक असमानता और भ्रष्टाचार के मेल से विकास के परिणाम उस वर्ग तक नही पहुंच पाते जिन्हें विकास के दायरे में लेने की सर्वाधिक आवश्यकता है। आज भ्रष्टाचार समाज के सभी व्रर्गो मे और सभी स्तरो पर व्याप्त हो गया है। इसका खामियाजा मुख्यत आम आदमी को दिन-प्रतिदिन, और अनेक स्वरुप में देना पड रहा है।

स्पष्ट है की ये सारी कमियाँ योजनाओ से पूरी नही की जा सकती। लेकिन योजना बनाते समय इन कमियों को स्वीकार करना और उन्हे दूर् करने के लिए पथ-चिन्हित करना योजना के दायरे में आते है। योजना आयोग केवल सकल घरेलू उत्पादन की वृधि की बात ही न करे वरन देश के सर्वांगीण विकास के लिए ढांचा खडा करने का मसौदा भी दे। देश के सामने खडी मुख्य समस्याओ को हल करने के लिए वर्तमान नीति-निर्धारको की क्या सोच है, यह योजना के प्रारुप में स्पष्ट हो जाना चाहिए।

देश जिन कठिनाइयों से जकडा हुआ है, उससे मुक्ति पाने के उपाय सोचने का काम केवल योजना आयोग तथा उससे जुडे मुठ्ठी भर विशेषज्ञों तक ही सीमित नही हो। साधारण जन को भी अपने-अपने क्षेत्र में उत्पन्न हो रही समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत स्तर पर और समूहो में सोचने की आवश्यकता है। इस प्रकार की सोच प्रारम्भ करने के लिए यही उपयुक्त समय है जब देश के अगले पांच वर्षो के आर्थिक और सामाजिक ढाँचे पर योजना आयोग के स्तर पर सोच-विचार की शुरुआत होने जा रही है।

पद्मभूषण प्रो. विजयशंकर व्यास



Comments to this Article
i am gladt to read this page about 11th Panchvarshiya Yojana. Thanks Sir............., Vinod Khatak Siwani (2009-12-16 15:25:22)
thanks sir.........., kavita dhangar (2010-09-12 09:16:25)
We have power to progres and one day we will supar powar, Nemi chand biriya. (2010-10-01 10:22:47)
thanks ollo ke patthe gadhe . Itna bakbak karne ka, shahrukh (2010-11-11 06:08:53)
thanks Sir.........., Arvind Pal (2010-12-12 11:58:46)
11 panchwarshiya yojana is very good thank you so much sir, muskan (2010-12-13 04:01:08)
thanks to you, pawar yogesh d (2010-12-23 04:59:27)
this article help me to write 4 11th panc. yojna...thnx sir.., pradeep singh (2011-01-11 11:11:02)
Its very good article,Can I get list and ajenda of all plans right from 1st?, Shekhar katkar (2011-01-19 10:50:48)
sir your artical is very intrested, rajeev singh (2011-02-23 03:46:00)
Sir your artical is very interested but feel that do not mention of libraries conditins in India according to western country.with regards, Khushi Ram (2011-05-09 01:38:18)
thanks to you sir ur article is very helpfull in my study nd also its very interesting., chaitali c.g. (2011-07-31 07:07:54)
theek hai, saumya (2011-09-08 07:47:44)
sir could u plz add some more info bout it.....coz it doesnt contain the main thing which all indians should know........!! :), saumya (2011-09-08 08:43:17)
thank you sir but send me first 5th yojna started from plz inform me my own email id anandsingh.rlic@gmail.com, anand karakoti molekhal salt almora (2011-11-12 09:10:19)
sir,12th panch varsia yojna ka slogan kya hai, rana rakesh roshan (2011-11-30 09:47:56)
Its very good article..
, pravin (2011-12-30 09:50:28)
thanks sir ur article is very helpfull in my study . sir 11th yajna is going to be end . and what will 12th panch varsia yojna plz sir send it to my email id thanks sir, aapka aabhari rahunga . love you sir .:- mr.ajay1111@yahoo.com , mr.ajay1111@gmail.com,
, ajay chaudhary, 9211117498, b. com 3rd drona colag (2012-01-16 09:16:27)
11 panchwarshiy yojana is very nice .................thanx sir , arti (2012-04-20 08:51:57)
Mast hai, vineet ram (2012-06-28 10:00:18)

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