बीकानेर। राजस्थान सरकार द्वारा जो चना व दाल-दलहन पर स्टाक सीमा निर्धारित की गई है, उस बिल्कुल अव्यवहारिक है। क्योंकि भारत के किसी भी राज्य में इतनी कम स्टॉक सीमा नहीं है। जहां तक पडौसी राज्य पंजाब, हरियाणा, गुजरात और मध्यप्रदेश की बात है वहां स्टॉक सीमा नहीं है और जिन राज्यों में जैसे, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक इत्यादि में स्टॉक सीमा है तो वहां स्टॉक सीमा 20000 क्वि. है। चने में भारत का अग्रणी चना उत्पादक राज्य है, यहां पर इतनी कम स्टॉक सीमा लगना न्यायोचित नहीं है। भारत के व्यवसायी व्यापार करते है यहां वायदा बाजार एक्सचेंज का डिलेवरी सेन्टर होने के कारण पूरे भारत के व्यवसायी इसमें माल स्टॉक करते है। बीकानेर में चने का बकर स्टाक रहता है। 3-4 वर्षो से जब से यहां वायदा बाजार का डिलेवरी खुला है तब से संभव हो पाया है इसके कारण यहां पूरे वर्ष पूरे यहां से चने की पूर्ति की जाती हैं और जहां मूल्य वृद्धि की बात है तो पिछले 4 महिनों में जब से फसल बाजार में आयी है। तब से अब तक भाव लगभग समानान्तर ही चल रहा है। जब यहा किसान से माल बाजार में बेचा था तब से अब तक भाव 2300-2400 प्रति क्वि. के आसपास ही चल रहा है जिसे आप मूल्यो में वृद्धि भी नहीं कह सकते है। दाल-दलहन में स्टॉक सीमा नही लगायी जाये अगर यह लगाना सरकार की मजबूरी है तो चने को इस सूची से बाहर रखा जाये। क्योंकि ना तो यहां माल की कमी है ना भावों की अधिकता। चने के स्टॉक सीमा लगा दी गयी तो यहां बाजार स्टॉक होने कारण व्यापारियों को आर्थिक हानि होगी। जिन बाहरी व्यापारियों का यहां माल स्टॉक है वो यहां से अन्यत्र ले जायेंगे जिसके कारण यहां माल की कमी हो जायेगी और भावों में वृद्धि होना निश्चित है। किसी वस्तु पर स्टाक सीमा लगाकर उसकी आपूर्ति बढाना और भावों निर्णयगत करना अर्थशास्त्र के सिद्धान्त के खिलाफ है। हाल ही में अभी तीन महिने पहले राजस्थान सरकार ने चीनी पर स्टॉक सीमा लगायी थी उस समय चीनी का थोक भाव 2300 रुपये प्रति क्वि. था और स्टॉक सीमा लगने के तीन महिने बाद भाव 3200 रुपये प्रति क्वि. है। क्योंकि यहां व्यापारी माल बाहर से अधिक नहीं मंगवा सकता जिसके फलस्वरूप खामियाजा उपभोक्ता को चुकाना पडता है।