सूरतगढ। जिप्सम की अवैध खनन के मामले में खनन विभाग सहित विभिन्न महकमों के नाकाम रहने के बाद अब वाणिज्यकर विभाग ने खनन माफियाओं के आगे घुटने टेकते हुए श्रीगंगानगर जिले के जिप्सम का ठेका एक प्राईवेट फर्म को दे दिया है। यह ठेका दो वर्षो के लिए दिया गया है तथा नए ठकेदार ने बुधवार से अपना काम भी शुरू कर दिया है। वाणिज्यकर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (वैट एण्ड आई टी) हीरालाल पाण्डेय द्वारा उम्मेदनगर (जोधपुर) के महेन्द्रसिंह भाटी के साथ दो वर्ष के लिए किए गए अनुबंध के अनुसार ठेकेदार को श्रीगंगानगर जिले के जिप्सम ठके के रूप में विभाग को 37 लाख 10 हजार रुपये वार्षिक देने होंगे। वाणिज्यकर विभाग इस राशि पर ठकेदार को 35.46 प्रतिशत कमिशन देगा। दूसरे वर्ष में ठकेदारके लिए अन्य शर्ते यथावत रहेगी लेकिन प्रथम वर्ष की समाप्ति पर सालभर की जो राशि इक्ट्ठी होगी या विभाग द्वारा निर्धारित 37.10 लाख, दोनों में से जो भी अधिक होगी उसका 110 प्रतिशत का भुगतान ठेकेदार विभाग को करेगा। दूसरे वर्ष में कमिशन वहीं 35.46 प्रतिशत रहेगा। नया ठकेदार अब जिले के खनन क्षेत्र घडसाना, रावला, रोजडी, रामसिंहपुर, सूरतगढ, पीपेरन व बीरमाना में अपनी जांच चौकियां स्थापित कर जिप्सम का अवैध खनन करने वाले ट्रकों को पकडकर उनके 4 प्रतिशत कर लगा देगा। यह कर लगाने के बाद पकडा गया जिप्सम वैद्य माना जाएगा। ठेकेदार पूरे जिले में किसी भी स्थान पर अवैध जिप्सम का ट्रक पकड सकेगा।गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से सूरतगढ व घडसाना तहसील में जिप्सम का भारी मात्रा में अवैध खनन हो रहा था। इसकी रोकथाम के लिए एफसीआई, राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स, जिला खनिज विभाग व पुलिस महकमे के अलग-अलग दल सक्रिय थे। काफी जद्दोजहद के बावजूद भ्रष्टाचार के चलते ये सभी महकमे जिप्सम का अवैध खनन रोकने में विफल रहे आखिरकार वाणिज्यकर विभाग ने सच्चाई को महसूस कर जिप्सम का ठेका निजी हाथों में देने का निर्णय लिया और यह ठेका दे दिया गया।