बीकानेर। ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही बिजली कटौती से गुस्साये काश्तकारों ने बुधवार को सागर रोड स्थित 220 केवी जीएसएस पर नापासर, जामसर, नोखा, देशनोक आदि ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। करीब 8.30 बजे विद्युत विभाग के 200 केवी में घुसकर ग्रामीणों ने कब्जा जमा लिया। शहर में दी जा रही विद्युत सप्लाई को बंद कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतीश जांगिड, सीओ सिटी मुरलीधर किराडू, अतिरिक्त जिला कलेक्टर अर्जुनराम, एसडीएम मदनलाल सियाग सहित किसी भी अनहोनी घटना को रोकने के लिए जयनारायण व्यास कॉलोनी थानाप्रभारी अमीर हसन पुलिस जाब्ता लेकर मौके पर पहुंचे। लेकिन बिजली नहीं मिलने से गुस्साये ग्रामीणों ने हर कीमत पर पर्याप्त बिजली देने के लिए अडे रहे। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 6 से 8 घंटे बिजली देने का कहा गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को केवल एक दो घंटे ही बिजली दी जाती है जो कि पर्याप्त नहीं होती है। ग्रामीणों के साथ पहले दौर की वार्ता की गई जो कि असफल रही क्योंकि ग्रामीणों की मांग थी कि उन्हें 6 से 8 घंटे बिजली दी जाए लेकिन बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि जोधपुर वितरण निगम द्वारा केवल 4 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं दी जा सकती इससे ग्रामीण और उतेजित हो गए और अपनी 6 घंटे बिजली देने की बात पर अडे रहे तथा वार्ता को बीच में ही छोडकर बाहर निकल गये इस दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर से वार्ता के दौरान बिजली की उपलब्धता के अनुसार ग्रामीणों को 4 घंटे से अधिक बिजली देना संभव नहीं है। जोधपुर वितरण निगम के मुख्य अभियंता एम.पी.चौहान ने कहा कि जोधपुर डिस्कॉम 4 घंटे बिजली देने को कहा गया है इससे ज्यादा घंटे बिजली देना संभव नहीं हो सकता। ग्रामीण सुरजाराम ने बताया कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जायेगा क्योंकि ग्रामीण खेती पर ही निर्भर हैं जब उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिलेगी तो उनका गुजारा कैसे होगा तथा खेतों की फसलें पूर्ण बर्बाद हो जाएगी और ग्रामीणों की हालात दयनीय हो जाएगी। ग्रामीण धूडाराम ने कहा कि किसानों को चार घंटे बिजली के लिए कभी खुश नहीं होंगे किसानों को कम से कम 6 घंटे बिजली की आपूर्ति होनी चाहिए। वार्ता के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि अभी 160 मेगावाट से एक घंटे किसानों को मिल रही है। लेकिन मुख्य अभियंता ने जानकारी दी कि 162 मेगावाट से 4 घंटे बिजली आपूर्ति करेंगे इससे ग्रामीण भडक उठे। ग्रामीणों ने कहा कि 160 मेगावाट से एक घंटे बिजली आपूर्ति मिलती है तो 162 मेगावाट से इसकी 4 घंटे की बिजली की कैसे पूर्ति होगी।