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लालच से बढ रहा है तनाव
12 Sep 2009

अंधविश्वासों से समाज को दूर रहने की हिदायत


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बीकानेर (नसं)। पी.बी.एम. अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओर से शनिवार को जिरियाट्रिक रिसर्च सेंटर में दो दिवसीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों में आ रहा बदलावः मनोरोग विशेषज्ञों के लिए एक चुनौती विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन इण्डियन साइकेट्रीक सोसाईटी के अध्यक्ष डा.अजीत सिंह ने किया। इण्डियन साइकेट्रीक सोसाइटी राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डा.अजीज सिंह ने कहा कि सामाजिक बदलाव के कारण हम अपनी सांस्कृतिक विरासत से दूर होकर आयातित संस्कृति को अपना रहे है। इससे समाज लालच व तनाव बढ रहा है। बहुत कुछ होने के बाद भी तनाव से ग्रस्ति होते जा रहे है। उन्होंने कहा कि लोगों के तांत्रिकों, झाडफूंक में विश्वास पर चिन्ता जताई और कहा कि समाज को इससे बचाने के लिए हमें आगे आना होगा। 
सवाई मानसिंह अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डा.शिव गौतम ने राजस्थान में मनोचिकित्सा के विषय पर प्रकाश डाला और बताया कि वर्ष १८०३ में इस्ट इण्डिया कम्पनी और राजपूताना स्टेट के मध्य हुई संधि के तहत पहला मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र १८८६ में अजमेर जेल में स्थापित किया गया। इसी क्रम में १८९१ में जयपुर शहर में मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र खोला गया। १९७० के आस-पास मानसिक रोगी और उसके परिजन रोगी को गोपनीयता के साथ चिकित्सक के पास लाते थे। अनेको रोगियों को उपचार भी उपलब्ध नहीं होता था, परन्तु आज ऐसी स्थिति नहीं है। पीपुल्स यूनियन फार सीविल लिबट्री राजस्थान की जनरल सैक्टरी कविता श्रीवास्तव ने भारतीय महिलाओं की आकाक्षांए और समाज की उनके प्रति अपेक्षाओं के मध्य सामजस्य बिठाने में चुनौतिया विषय पर कहा कि आज भारतीय समाज कई पूर्वाग्रहों और कुण्ठाओं से पीडित है, इसमें भी सामजस्य बिठाने की कामना महिलाओं से ही की जाती है। नेशनल फैमेली हैल्थ सर्वे के अनुसार वर्तमान में ७० प्रतिशत भारतीय महिलाएं विवाहित होने के उपरान्त भी अच्छी स्थिति में नही कहा जा सकता। बनारस हिन्दू विश्वद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मानसिक रोग डा.इन्द्रा शर्मा ने विवाह और मानसिक रूप से असमर्थ महिलाओं के विवाह संबंधी कानूनी मुद्दे पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से सेवानिवृत हुए डा.मधु निझावन ने ‘इल लेजीटिमेंट गर्भधारण व जन्म के मनोचिकत्सीय सामाजिक कारणों पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर जी.बी.अस्पताल दिल्ली के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डा.आर.सी.जिलोहा ने किशोरो में नशे के बढते प्रभाव से सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव और डा.शिव गौतम ने भारतीय युवाओं में मनो वैज्ञानिक समस्याओं की वर्तमान स्थिति विषय पर पत्रवाचन किया। संगोष्ठी में एडवोकेट आर.के.दास गुप्ता ने कहा कि संविधान में अवैध गर्भधारण का कही भी उल्लेख नहीं है। केवल गर्भधारण ही शब्द का प्रयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण हुए शिशु को दुनिया में आने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। रति रोग एवं चर्म रोग विशेषज्ञ डा.आर.डी.मेहता ने चर्म रोग को लेकर मानसिक तनाव की स्थितियों पर व्याख्यान दिया। संगोष्ठी के आयोजन सह सचिव डा.के.के.वर्मा ने संगोष्ठी की उपायदेयता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सामाजिक एवं मूल्यों में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आकर मानसिक अस्वस्थता की स्थिति में बढोतरी हुई है। इससे पूर्व पी.बी.एम.अस्पताल के अधीक्षक डा.विनोद बिहाणी और आयोजन सचिव एवं विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा पी.बी.एम.अस्पताल डा एलएन गुप्ता और कार्यक्रम के अध्यक्ष डा.अजीत सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया।  अतिथियों ने इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया। संगोष्ठी के दूसरे दिन आज पूर्वान्ह ग्यारह बजे से दोपहर बारह बजे तक बीकानर वासियों से देश के वरिष्ठ मनोचिकित्सक रूबरू होंगे।




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