KhbarExpresswww.khabarexpress.com

Post Your Trade Lead free at leading online business place - rajb2b.com

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS Friday, February 17, 2012


उपन्यास के बहाने साहित्य और राजनीति के सम्बंधों पर जमकर हुई चर्चा
13 Feb 2010

Add comment          Mail          Print          Write to Editor


कोलकाताः शंकर तिवारी के पहले उपन्यास 'नई सुबह' का लोकार्पण प्रख्यात आलोचक डॉ.विजय बहादुर सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिन्दी में उपन्यास विधा का ढांचा अब तक तैयार नहीं हुआ है। और यह उसकी सेहत के लिए ठीक है क्योंकि ढांचा तैयार हो जाने के बाद इस विधा की आज़ादी छिन जायेगी और ढांचा केन्द्रीय तत्व हो जायेगा। उन्होंने कहा कि साहित्य की दृष्टि से राजनीति को देखा जाना चाहिए। राजनीति की दृष्टि से जब साहित्य को देखा जाता है और तो साहित्य पतित होता है संस्कृति पर अंकुश लगने शुरू होते हैं। राजनीति की दृष्टि से किया गया लेखन कैडर लेखन है। राजनीति जब पाठ¬क्रम तक तय करने लग जाये तो उसका विरोध जरूरी हो जाता है। कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद में प्रफुल्ल चंन्द्र कॉलेज, (सिटी कालेज साउथ) के हिन्दी विभाग की ओर से आयोजित था। इमरजेंसी के पूर्ववर्ती हालात और बाद की राजनीतिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि पर लिखे इस उपन्यास की चर्चा के क्रम में उन्होंने कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम पर लिखे जाने के बावजूद इस उपन्यास में लेखक ने राजनीति नहीं की गयी है। जो एक बड़ी बात है।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय वक्तव्य में ललित निबंधकार डॉ.कृष्णबिहारी मिश्र ने कहा कि महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण दो ऐसी प्रतिभाएं हैं जिन्होंने कुर्सी की राजनीति नहीं की। उन्होंने कहा कि विधायक व सांसद चुन सत्ता के गलियारे तक पहुंचाने वाली आम जनता के पास इन नेताओं को कुर्सी से हटाने का भी अधिकार है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इसी उद्देश्य के तहत आंदोलन किया था। इंदिरा गांधी के शासन काल में स्थिति लोकतंत्र के विरोध में हो गयी थी। जयप्रकाश नारायण स्थिति को सुधारने के लिए 72 साल की उम्र में इंदिरा गांधी के खिलाफ मैदान में उतरे। जब भी ऋषि सत्ता व राज सत्ता में टकराहट होती है ऋषि सत्ता की ही विजय होती है। शंकर तिवारी ने नई सुबह उपन्यास में जेपी आंदोलन को उपन्यास की विषय वस्तु बनायी है और व्यवस्था में बदलाव की ललक उपन्यास में दिखायी है, जो सराहनीय है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कथाकर डॉ.अभिज्ञात ने कहा कि मौजूदा राजनीति में व्याप्त अवसरवादिता को इस उपन्यास ने उजागर किया है। युवकों के स्वप्नों के साथ राजनीतिक छल को पूरी शिद्दत से उकेरा गया है। पत्रकार गीतेश शर्मा ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का नारा तो दिया किन्तु उसका कोई खाका प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने जो पांच सूत्र दिये थे उसमें दहेज प्रथा हटाने जैसे मुद्दे थे जो क्रांति नहीं समाज सुधार से जुड़े थे। कथाकार अनय ने कहा कि शंकर तिवारी ने राजनीति के जोड़तोड़ की तो चर्चा की है किन्तु उसमें प्रतिपक्ष गायब है। कवि-आलोचक डॉ.सुब्रत लाहिड़ी ने उपन्यास में वर्णित एक संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि उपन्यास में बिहारी अस्मिता की बात कही गयी उसमें कोई हर्ज नहीं किन्तु इस बात की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि बंगाल में भाषा और क्षेत्रीयता को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। और यहां का समाज किसी को मुद्दों पर समर्थन देता है या विरोध करता है। वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर ने कहा कि मौजूदा राजनीति से मोहभंग की कहानी है। राजनीति का मौजूदा स्वरूप उपन्यास के नायक को निराश और हताश करने वाला है। डॉ.राम आह्लाद चौधरी ने उपन्यास पर आलेख का पाठ किया और उसे एक बेहतरीन उपन्यास बताया जिसका घटनाक्रम दिलचस्प, फलक विस्तृत है। उन्होंने कहा कि उस उपन्यास में बिहारी अस्मिता का संघर्ष झलकता है जो इसे विश्वसनीय और महत्वपूर्ण बनाता है। उपन्यास में मूल्य की तलाश पर जोर दिया गया है। कथाकार विमलेश्वर ने कहा उपन्यास का फलक बहुत विस्तृत है और इसमें दो उपन्यासों की सामग्री है। विप्लवी हरेकृष्ण राय ने कहा कि उपन्यास अंततः पाठकों को अपने साथ बांधे रखने में कामयाब है। कार्यक्रम में पत्रकार इसराइल अंसारी भी उपस्थित थे।
शंकर तिवारी ने इस अवसर पर बताया कि इस उपन्यास के लेखन और परिदृश्य के अध्ययन में पंद्रह साल लगे हैं। वे फिर एक उपन्यास लिखने की सोच रहे हैं लेकिन वह भी विशद अध्ययन के बाद सामने आयेगा संभव है दस साल लग जायें। उन्होंने कहा कि नई सुबह उपन्यास में उन्होंने किसी खास राजनीतिक दल को अपना निशाना नहीं बनाया है बल्कि तथ्यों के आधार पर उसके भ्रष्टाचार में लिप्त चरित्र को स्पष्ट किया है।




Discuss this story on KhabarExpress Forum  

More News: Kolkata Dr Abhigyat Hindi Nai Subah Novel

Pelagian Dictionary

बहाने
साहित्य
और
राजनीति
सम्बंधों
जमकर
हुई
चर्चा


Comments to this News

Be the first to comment on this News


 
Post Your Comments to this News
 Posting Rules
 
  Name: Email:
 

Top Story of The Day
Latest Articles

Jain Calendar Launched at Terapanth Bhawan, Gangasahar



Shrinath JI


Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares