बीकानेर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग को लेकर जयपुर में आज भाजपा और काँग्रेस नेताओं की धडेबंदी साफ नजर आई। जहाँ संभाग के काँग्रेसी नेताओं ने बी डी कल्ला के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से अलग वार्ता की वहीं राकृष्णदास गुप्ता व मानिकचंद सुराणा के नेतृत्व में संघर्ष समिति व भाजपा के नेता अशोक गहलोत से अलग से मिले। संघर्ष समिति व भाजपा के नेताओं ने बिना समय लिए ही मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की। इस कारण उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने के लिए धरना देना पडा व काफी समय तक इंतजार भी करना पडा। जबकि काँग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने सोचे समझे तरीके से मुलाकात की। संघर्ष समिति में बीकानेर के शहरी क्षेत्र से चेहरे ज्यादा दिखाई दे रहे थे जबकि काँग्रेस प्रतिनिधि मंडल में संभाग भर के काँग्रेसी विधायक व सांसद तथा नेता नजर आ रहे थे।
इस घटनाक्रम पर खबरएक्सप्रेस से बात करते हुए सरकारी मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल ने कहा कि संघर्ष समिति का जयपुर में मार्च निकालने का निर्णय तर्कसंगत नहीं था। बेनीवाल के अनुसार जब सरकार ने कोई निर्णय लिया ही नहीं है तो आंदोलन का रास्ता अपनाना बिल्कुल गलत है। बेनीवाल ने मुलाकात के इस तरीके को नकारात्मक बताते हुए कहा कि अशोक गहलोत का बीकानेर के प्रति हमेशा से ही सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है और इस मुद्दे पर भी हम मुख्यमंत्री से ऐसी ही आशा करते हैं।
इसी तरह इस मुद्दे पर प्रदेश काँग्रस के पूर्व अध्यक्ष बी डी कल्ला का कहना था कि काँग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और शांतिपूर्वक तरीके से अपनी बात कहने में विश्वास करती है। संघर्ष समिति के तरीके को गलत बताते हुए कल्ला ने कहा कि काँग्रेस पार्टी व इसके नेता बीकानेर की पैरवी हमेशा से करते आए है और आगे भी करते रहेंगे। कल्ला ने विश्वास जताया कि बीकानेर के हितों के साथ कुठाराघात नहीं होगा।
इसी तरह संघर्ष समिति के नेताओं के साथ काँग्रेसी नेताओं की अनुपस्थिति ने बीकानेर के इस मुद्दे को हल्का ही किया है। जहाँ शहर के हितों की बात हो वहाँ एक ही मंच पर सभी की उपस्थिति ही शोभा देती है। इस तरह के मुद्दों पर नेताओं का यह रवैया शहरवासियों के चिंता के का विषय है। शहरवासियों को केन्द्रीय विश्वविद्यालय से मतलब है कि आपसी गुटबाजी से और यह तभी संभव होगा जब एक ही मंच सभी नेता एक स्वर में इस आवाज को पुकारेंगे।
अफ़सोस! हमारी मरुभूमि राजस्थान का सबसे पिछड़ा संभाग रह गया है..केंद्रीय विश्वविद्यालय भी हाथ से गया. पता नहीं अशोक गहलोत को बीकानेर से हमदर्दी क्यूँ नहीं? वेटेरनरी विश्वविद्यालय का शगूफा फेंक कर राज्य सरकार कोई बहुत बड़ा काम नहीं कर रही है. वेटेरनरी कॉलेज को ही विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जा रहा है और ये कॉलेज भी "विजय भवन" में ही प्रारंभ हुआ जो रियासतकालीन है. इसके अलावा मुझे बीकानेर में इतने सालों में एक भी ऐसा स्तरीय इंस्टिट्यूट बताइए जिसमे २०००-१०,००० करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश हुआ हो और जिस से यहाँ लोगों को रोजगार मिला हो जैसा की जोधपुर में IIT, AIIMS , National Law UNI., ayurved uni. इत्यादि के लिए हुआ है... अगर मैं कल्ला जी की जगह या देवी सिंह भाटी जी की जगह होता तो जन आन्दोलन करता पर फिर अफ़सोस! में एक आम आदमी हूँ जिसकी इस देश में कोई इज्ज़त नहीं ! अब तो मुझे अपने बीकानेरी होने का उतना गर्व भी नहीं जितना पहले था! काश कोई नरेन्द्र मोदी जी जैसा नेता मेरे शहर में या राज्य में होता जो private sector ki help se इस मरुस्थल में भी रोजगार के अवसर बढ़ता और infrastructure and developement करवा सकता., dr.vinay (8/14/2009 1:58:06 AM)