बीकानेर। इण्डियन साइक्रेटिक सोसायटी (राजस्थान ब्रांच) की दो दिवसीय 24 वीं वार्षिक कांन्फ्रेंस पी.बी.एम.अस्पताल स्थित जिरियाट्रीय रिसर्च सेन्टर में सम्पन्न हुई। कान्फ्रेंस के दूसरे दिन रविवार को प्रथम सत्रा में भांग के उपयोग और एन.डी.पी.एस.एक्ट-1985 विषय पर मेडिकल कॉलेज,उदयपुर में मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डा.डी.एम.माथुर ने कहा कि भांग का उपयोग समाज के बडे तबके द्वारा उत्सव और त्यौहारों पर और कई स्थानों पर दैनिक उपयोग में लिया जा रहा है। भांग के लम्बे समय और अधिक मात्रा में उपयोग के कारण विभिन्न प्रकार की मानसिक व्याधियां उत्पन्न हो जाती है। यद्यपि अभी तक भांग को एन.डी.पी.एस. अधिनियम में शामिल नहीं किया गया और विभिन्न न्यायिक निर्णयों में भी भांग को नारकोटिक नहीं माना गया है। कान्फ्रेंस के दूसरे सत्रा में देशभर से आए मनोरोग विशेषज्ञों ने स्थानीय रोगियों एवं आम नागरिकों के खुले सत्र में मानसिक रोगों पर परामर्श और लोगों किये गये प्रश्नों का जबाब दिया गया। विशेषज्ञों में जी.बी.पन्त मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ. आर.सी.जिलोहा,एस.एम.एस.मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ. शिव गौतम,पी.जी.आई.चण्डीगढ में विभागाध्यक्ष डॉ.अजीत अवस्थी और सम्पूर्णानन्द मेडिकल कॉलेज,जोधपुर में विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप गुप्ता ने मनोरोग से संबंधित भ्रंतियों को दूर किया और उपचार की नवीनतम तथा इनसे जुडे विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों पर सलाह दी। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक रोगों के संबंध में बहुत सारी मिथ्या धारणाएं विद्यमान है। डॉ. आर.सी.जिलोहा ने जीवन को सरल ढंग से चलने और अपनी क्षमताओं के विकास के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर आयोजित तीसरे सत्र में डॉ. प्रेम प्रकाश अग्रवाल ने एड्स रोगियों में मानसिक परेशानियां विषय पर शोध पत्रा प्रस्तुत किया और कहा कि एड्स रोगियों में अवसाद,नशे की प्रवृति, आत्म हत्या जैसे अनेकों मनोरोग बढे है। इण्डियन साइक्रेटिक सोसायटी (राजस्थान ब्रांच) के अध्यक्ष डॉ.प्रदीप गुप्ता ने कहा कि मनोचिकित्सकों अपने उत्तर दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। समाज में मनोचिकित्सा और मनोरोगों के विषय में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास करने चाहिए। आयोजन सचिव डॉ. के.के.वर्मा ने दो दिवसीय कांन्फ्रेंस पर बनी रिपोर्ट को इण्डियन साइक्रेटी सोसायटी में प्रस्तुत करने पर जानकारी दी और कहा कि संगोष्ठी जिस उद्श्यों के लेकर आयोजित हुई उससे मनोचिकित्सक और मनोरोगियों को निःसंदेह लाभ होगा। उन्होंने प्रतिभागियों का आभार भी व्यक्त किया।