नई दिल्ली,१३ नवम्बर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में मंगलवार से शुरु हो रहे २६वें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के लिए राजस्थान का भव्य एवं आकर्षक पेवेलियन सजधज कर तैयार हो गया है। परम्परा और आधुनिक प्रगति का बेजोड संगम-राजस्थान मण्डप में प्रदेश के भावी विकसित स्वरुप की सुन्दर झाँकी को भी प्रदर्शित किया गया है।
राजस्थान मण्डप के निदेशक रवि अग्रवाल ने बताया कि भारतीय व्यापार संवर्धन प्राधिकारण (आई.टी.पी.ओ.) द्वारा इस वर्ष के लिए तय की गई थीम ’’लघु उद्योग और पर्यटन‘‘ के अनुरुप मण्डप में मुख्य द्वार के दोनों ओर राजस्थान की मशहूर भीत्ति चित्राकला की विविधताओं को पिछवाई कला शैली में बारीकी के साथ उकेरा गया है। भित्ति चित्रा कलाकार जयपुर के श्री अशोक कश्यप ने बताया कि ये भित्ति चित्रा ’’टैम्प्राफ्रेस्को‘‘ शैली में बनाए गए हैं, जिनके आकर्षक रंग संयोजन पर धूप, पानी आदि का विपरीत प्रभाव नहीं पडता। इसी प्रकार मुख्य थीम ऐरिया में बीकानेर के करीब ४१८ वर्ष पुराने ऐतिहासिक जूनागढ महल की झलक और इस महल के एक भाग अनूपगढ की प्रतिकृति को दर्शाया गया है।
अनूपगढ के कलात्मक झरोखों पर सुनहरी लघु चित्राकला और कांच के कलात्मक कार्य के लिए राजस्थान से विशेष रुप से बुलाये गये चित्राकारों द्वारा कार्य किया गया है। वर्ष १५८८ में लाल बालू पत्थर से निर्मित ऐतिहासिक जूनागढ और इसके एक भाग अनूपगढ महल की कलात्मकता से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मण्डप में विशाल थार रेगिस्तान में संगीत की मधुरता बिखेरने वाले लोक कलाकारों के विहंगम दृश्य के साथ ही राजस्थान की समृद्ध वस्त्रा और हस्तशिल्प कला के बेजोड कला कृतियों को भी दर्शाया गया है।
मण्डप के हृदय स्थल में राजस्थानी कला कृतियों से सजे-धजे गुम्बद के नीचे केन्द्रीय कक्ष म चमचमाते क्षितिज के नीचे राजस्थान पर्यटन की झाँकी प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा मण्डप में विभिन्न राजकीय विभागों की सुन्दर झाँकियों का प्रदर्शन भी किया गया है। हर वर्ष की तरह राजस्थान की हस्तशिल्प कलाओं और स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टाल भी आम दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होंगे। व्यापार मेला में इस वर्ष २४ नवम्बर को -राजस्थान-दिवस‘ मनाया जायेगा।