श्रीबालाजी। परमहंस स्वामी श्री अडगडनन्द जी महाराज के श्री बालाजी में स्थित आश्रम में हुए आज विशाल सत्संग कार्यक्रम में हुए परमहंस स्वामी ने अपने प्रवचन में कहा कि धर्म जोडता है, तोडता नहीं है। उन्होंने सत्संगियों द्वारा पूछे गये प्रश्न. मनुष्य की वास्तविकता क्या है? हम हैं कौन? जातिय ऊँच नीच का आधार क्या है? के उत्तर में कहा कि
उतर. सम्प्रति भारतीय समाज में करोडों जातीय उपाधियों और तदनुसार रहन सहन के मूल में आर्थिक, राजनीतिक, उत्कर्ष-अपकर्ष, निवास स्थल या यशस्वी पुरूषों का परिचय है। खाने पीने की पुष्कल व्यवस्था मिल गई तो बडे नहीं तो छोटे। आपसी संघर्षो में जो जीत गये वे बडे हार गये व छोटे। किन्तु मूलतः हम क्या ?
भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं-अर्जुन! इस अविनाशी योग को मैने ही आदि में सूर्य से कहा था। सूर्य ने उसे ही आदिमनु से कहा। महाराजा मनु ने उसे अपनी स्मृति में धारण कर लिया क्योंकि कथोपकथन तो याददाश्त अर्थात् स्मृति में ही धारण की जाती है। मनु ने स्मृति परम्परा को अग्रसारित करते हुए इक्ष्वाकु से कहा। इक्ष्वाकु से राजर्षियों ने जाना। इस महत्वपूर्ण काल से यह अविनाशी योग इस पृथ्वी में लुप्त हो गया। वही पुरातन योग में तेरे प्रति कहने जा रहा हूँ, क्योंकि तू प्रिय भक्त है, अनन्य सखा हैं। इस भव्य सत्संग समारोह में परमहंस स्वामी श्री अडगडानन्दजी सहित उनके मिर्जापूर उतरप्रदेश स्थित मूख्य १४ आश्रम सहित देशभर में स्थापित संतमहात्मा भी आये हुये जिनकी संतवाणी का लाभ नोखा नागौर तथा आस पास गांवों से हजारों भक्तों और धर्मअनूयायि ने उठाया। आयोजन समिति के नरेन्द्र गहलोत ने बताया कि श्री बालाजी में यह कार्यक्रम १५ नवम्बर तक नियमित चलेगा तथा परमहंस स्वामी अडगडानन्द जी का १८ नवम्बर को बीकानेर के माखन भोग भवन में विशाल सत्संग कार्यक्रम होगा।