मर्चेंट बैकिंग व खरीद-बिक्री से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले शमीर टंडन ने मनोरंजन की दुनिया में एक बडा कदम उस वक्त बढाया जब वर्जिन ईएमआई म्यूजिक ने भारत में अपनी दुकान खोली। अपने ंसंगीत बनाने के सपने को सच करने के लिए २००६ में वह देश में वर्जिन के सर्वोच्च पद पर रहते हुए आगे बढे। आज वह कंपंनी के प्रबंध निदेशक तो हैं ही और साथ ही संगीत निर्देशक का भी रोल निभा रहे है।
शमीर का कहना है कि ’’संगीत बनाने की कला उन्हें भगवान से वरदान के रुप में मिली है।’’ हांलांक उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत रवीना टंडन की फिल्म स्टंपड से की थी, पर संगीत की दुनिया में एक उम्दा म्यूजक डायरेक्टर के तौर पर उन्हें प्रशंसा मधुर भंडारकर की पुरस्कृत फिल्म पेज ३ व कॉरपोरेट और ट्रैफिक सिग्नल में म्यूजक देकर अपनी अद्भुत संगीतकला से प्रभावित करने के बाद मिली।
संगीत को जीवन्त रखनेवाला यह युवा संगीतकार, जिसने बहुत ही कम समय में न सिर्फ आसमान की बुंलदियों को छूआ है, बल्कि सिर्फ ४ वर्शों की अवधि में ७ फिल्मों में संगीत देकर अपनी काबिलियत को भी सिद्व किया है।
एक ओर जहां लताजी और आशाजी इनके ’’कितने अजीब रिश्तें है यहां पे’’, ”हुजुर-ए-आला“ जैसे गानों से प्रभावित हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों की जुबंा पर भी शमीर का नाम चढ चुका है, फिर चाहे वह ब्लफमास्टर के ’बुरे-बुरे’’ गाने के कारण हो या कैलाश खेर के द्वारा गाई गई कव्वाली ’’ओ सिकंदर’’ का खुमार हो।
१५० से भी ज्यादा नामचीन ब्राण्डों जैसे कोक, पेप्सी, रिलायंस के विज्ञापनों में अपना जिंगल म्यूजक देने वाले शमीर को कई अवार्ड भी प्राप्त है। इतना ही नहीं, अंतिम वर्ल्ड कप के लिए ११ गायकों को एक साथ लेकर गायकी तैयार करने वाला और कोई नह बल्कि शमीर टंडन ही है जिसने अपने संगीत के माध्यम से लोगों को न सिर्फ नाचने पर मजबूर किया, बल्कि विश्व-संगीत को भारतीय संगीत के रुप में एक नई पहचान भी दी है।
उम्र का तकाजा कहें या कोई अनूठी मिसाल जिसने इतनी कम उम्र में लता, आशा, मन्ना डे और जगजीत सिंह जैसे महान गायको से भी अपने गीत गवाए।
हाल ही में शमीर ने ०६-०७ के नं १ एलबम में म्यूजिक दिया है जिसमें आशाजी, सुपरस्टार संजय दत्त, अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर, आस्ट्रेलियन गेंदबाज ब्रेट ली एवं सारेगमप लिटिल चैंपस की विजेता ने मिलकर गाया है।
जहां एक ओर मधुर भंडारकर की समाज के गंभीर विषयों पर बनी फिल्मों में संगीत देकर उन्हने संगीत की गंभीरता और संवेनदशीलता को साबित किया है वहीं दूसरी ओर नए विषयों एवं नए कलाकारों के साथ बन रही नई फिल्मों में संगीत देकर संगीत के नए आयाम कायम किए हैं।
साल के शुरुआत में ’’सुपरस्टार ’’ जैसी कामर्शियल फिल्म में संगीत देकर उन्होंने यह साबित किया है कि सिर्फ गंभीर फिल्मों में ही नह बल्कि कामर्शियल फिल्मों के लिए भी वह ’’परफेक्ट’’ है।
ंषमीर टंडन का मार्केटिंग में भी काफी योगदान रहा है। साथ ही उन्होंने एक देश की संगीत शैली को दूसरे देश से जोडने की भरपूर कोशिश की है। शायद इसलिए कहा जाता है कि संगीत के लिए कोई सरहद नह होती। वे अपना धमाल विदेशों में भी दिखा चुके हैं। फिर बात चाहे बीट्ल की हो या नोरा जोन्स की।
पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ प्रमुख अंश
अचानक ऐसा क्या हुआ जिससे आपने अपना रुख कॉरपोरेट जगत से फिल्मी जगत में मोड
लिया
पूछने पर शमीर ने बताया कि संगीत मेरी दिवानगी ही नही मेरा जुनून भी है। हम जिंदगी एक बार ही जीते हैं। मैंने हमेशा जिदंगी को पूरी तरह से जीना सीखा, इसके हर एक पहलू को काफी पास से महसूस किया। फिर चाहे वों नरीमन-प्वाइंट से लेकर टाई और सूट पहने बोर्ड मीटिंग ही क्यूं न हो ,सबका अनुभव हासिल करना चाहता हूं। पर सही मायने में मैंने जिंदगी की शुरुआत अब की है।
क्या संगीत की ओर रुझान बचपन से ही था
संगीत मुझे विरासत में तो नह मिला है, पर हां, इतना जरुर है कि संगीत का शौक मुझे बचपन से था और शायद यही वजह है कि मैंने बचपन से ही स्कूल-कॉलेज में गाने के कार्यक्रमों मे पूर्णरुप से भाग लेना शुरु कर दिया था।
इस प्रतियोगी युग में आपने अपनी व्यवसायिक जिंदगी और संगीत की दुनिया के बीच कैसे तालमेल बिठाया-
शमीर ने बताया कि १२ वर्षो के कारॅपोरेट जिंदगी के दौरान मेरे बॉस ने मेरी बहुत सहायता की। कडी मेहनत के कारण ही आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। अब मुझे पहले से भी ज्यादा मेहनत करनी पडेगी, इन दोनों व्यवसायों में संतुलन बनाए रखने के लिए। शायद यह बताने की जरुरत नह कि हफ्ते के आखिर में भी अपने लिए समय न निकाल पाउं और किसी रिकार्डिंग स्टूडियो में बैठा मिलूं।
फिल्म पेज-३ के आपकी झोली में आने का कारण क्या रहा
शमीर ने बताया कि जब एक दिन मैं मुबंई के कॉफी शॉप में बैठा था, तभी किसी ने मेरा परिचय मधुर भंडारकर जी से करवाया। उन्हें अपनी नई फिल्म के लिए एक नए संगीतकार की तलाश थी। मैंने अपने कुछ बोल उन्हें सुनाए। और फिर क्या था, अगले ही दिन उन्होंने मुझे साइन कर लिया।
आज जहां इंडस्ट्री नए लोगों को मौका दे रही है ऐसे में आपने मंगेशकर बहनें, मन्ना डे और जगजीत सिंह जैसें गायकों के साथ काम किया। ऐसा क्यों
लता दी, आशा ताई, और मन्ना डे जो किसी परिचय के मोहताज नह, के साथ काम करने की दिलीख्वाहिश सिर्फ मेरी ही नहीं बल्कि सभी भारतीय संगीतकारों की होती है। मैं यह सुनहरा मौका पाकर अपने आप को काफी भाग्यशाली मानता हूं।
आपका संगीत सुनकर अक्सर पुरानी यादें ताजा हो जाती है, कोई खास कारण
मैंने हमेशा संगीत के साथ इंसाफ करने की कोशिश की है। जैसी फिल्म होती है वैसा ही उसका म्यूजिक का प्रारुप भी होता है। पर मैं किसी सीमित दायरे में बंधकर नहीं रहना चाहता। हाल ही में मैने युवाओं पर बनी फिल्म में काफी उत्साहपूर्ण म्यूजिक दिया है।
मधुर भंडारकर के साथ फिल्में करने की कोई खास वजह
हंसते हुए शमीर कहते है हम अच्छे दोस्त हैं जो एक दूसरे को काफी समझते भी है। ऐसा लगता है मानो मेरा म्यूजक सिर्फ उनके फिल्मों के लिए ही बना है। मैं उनके साथ काम करके काफी संतुष्ट हूं।
आपने अब तक सिर्फ संवेदनषील फिल्मों में म्यूजिक दिया है, क्या कहना चाहेगें आप इस बारे में
यह एक महज संयोग की बात है और कुछ नह। मैं हर तरह की फिल्मों में म्यूजिक देना चाहता हूं। मुझे किसी दायरे में बंधकर रहना नह आता।
आने वाली फिल्में जिसमें आफ संगीत सुनने को मिलेग
मेरे पास कुछ फिल्में हैं जैसे अश्टविनायक फिल्मस, संगीत सिवान, रुपाली फिल्मस, शेमारु, करण राजदान, पॉपकार्न एवं आदि।
आज की आधुनिक परिस्थिति में विधिवत सहयोग के बारे में आफ क्या विचार हैं
यह मेरी खुशकिस्मती है कि मैंने अंतराष्ट्रीय प्रोजेक्टस पर काम किया है। अभिषेक और बिपाषा पर फिल्माए गए गीत ’वन लव’ जिसमें ’ब्वायॅ बैंड ब्लू’ और शान का सहयोग था, साथ ही आशाजी और रॉबी विलियम्स ने भी मेरे ही संगीत पर साथ गाया था।
आफ गीत बहुत अच्छे लिखे होते है, कहां से लाते हैं इतने अच्छे आईडिया
मैं अक्सर अपने लेखक के साथ बैठकर शब्दों और विचारों पर चर्चाएं करता हूं, शायद वहीं से इसकी उपज होती है।
आज मार्केट में धडल्ले से नकली कैसेट्स एवं सीडी बेचे जा रहे हैं, आप कैसे इसकी रोकथाम करेंगें
आज लोग शिक्षित जरुर है पर सचेत नहीं। उन्हें खुद ये नहीं पता होता है कि जो सीडी वह खरीद रहें हैं वह अवैधानिक है। जरुरत है उन्हें सचेत करने की तभी समाज से इन तत्वों का खात्मा हो सकता है।
शमीर की आने वाली फिल्में हैं- फैशन, मित्तल बनाम मित्तल और कुछ फिल्मों के प्रसिद्व निर्माता हैं शेमारु, अश्टविनायक फिल्मस, परसैप्ट, संगीत सिवान इत्यादि और भी हैं जिनका विवरण शायद किसी खास वजह से देना नहीं चाहते।