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बीकानेर। पाश्चात्य सभ्यता का बढता प्रभाव चिंता का विषय है इसे न सिर्फ भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात हो रहा है बल्कि धीरे धीरे संस्कृति में व्याप्त मौलिक तत्व खत्म होते नजर आ रहे हैं इसको बचाने के लिए पुनःसंस्कृति, धारावाहिक व फिल्मों की आवश्यकता है ये विचार टीवी सीरियल बालिका वधू, लाडो के पटकथाकार रघुवीर सिंह शेखावत ने शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि इन नाटकों में राजस्थानी परिवेश को पहुंचाने का प्रभाव किया गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थानी परंपराएं आज मरूस्थलयी प्रदेशों में भूलते नजर आ रहे हैं इसके लिए वह कई ऐसे धारावाहिकों का निर्माण किया है जिसमें राजस्थानी परंपराओं को बेखूबी से उजागर किया है। उन्होंने कहा कि आजकल नाटकों में महिला प्रधान दिखा जाता है इसका मुख्य कारण यह है कि घरों में महिलाएं ही टीवी सीरियल देखती हैं जिससे उनमें आने वाले चरित्र को बच्चों में बखूबी निभाती है। कई लोगों ने कयास लगाया कि टीवी सीरियलों के माध्यम से बच्चों क साथ शोषण किया जा रहा है लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि टीवी सीरियलों के शूटिंग के समय कलाकारों को वह व्यवस्थाएं दी जाती है जो उन्हें घरों में भी मुहैया नहीं होती उनका पूरा ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि मेरा राजस्थानी फिल्मों की तरफ झुकाव है और जल्द ही इस ओर प्रयास करूंगा। अब तक वे साढे तीन हजार एपीसोड लिख चुके हैं तथा इतनी ही संख्या में डॉयलॉग दिये हैं उनके द्वारा लिखा गया अग्नि साक्षी सीरियल जल्द ही पर्दे पर आने वाला है।
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