जनयाचिकाः अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर, राष्ट्रभाषा हिन्दी को राजभाषा बनाने हेतू
बाँसवाडा, सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई में आज विदेशी भाषा अंग्रेजी के अनिवार्यता को समाप्त करके राष्ट्रभाषा को राजभाषा बनाने के लिये पैरवी के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश बालकृष्णन ने संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत प्रकरण कि सुनवाई कि ओर याचिकाकर्त्ता प्रमोद राय नागर की प्रबल पैरवी को देखकर एवं बढती उम्र के मद्देनजर सरकार को प्रार्थी को वकील की सुविद्या मुहैया कराने के निर्देश प्रदान कर अगली पेशी सोमवार को रखने के निर्देश जारी किये
यह जानकारी देते हुये राष्ट्रभाषा आन्दोलन के प्रवक्ता अरूण व्यास ने बताया कि दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रभाषा एवं चरित्र रक्षा संगठन कि ओर से याचिकाकर्त्ता प्रमोद राय नागर की पैरवी के बाद की स्थिति के मद्देनजर नागरवाडा में महामंत्री सुभाष त्रिवेदी की अगुवाई में भुपेन्द्रनाथ तनिक, इर्श्वर लाल वेश्य, धनपतराय नागर, अरूण व्यास, जयप्रकाश नागर, सत्यनारायण व्यास, देवशंकर जोशी, परथा दामा, अशोक ठाकुर, सहित अनेक राष्ट्रभाषा प्रेमियों की आपात बैठक करते हुए स्थिति की समीक्षा की।
महामंत्री सुभाष त्रिवेदी ने बैठक में बताया कि याज्ञिक का राष्ट्रभाषा के साथ अटुट प्रेम ही है कि अपनी पेंशन का 80 प्रतिशत भाग इस आन्दोलन पर खर्च कर रहे है और जीवन गाधीवादी तरीके के साथ सादगी से जीवन यापन कर रहे है 13 अक्टुबर 08 को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई होते ही यह तारिख इतिहास में दर्ज हो गई है और उन्होने आषा जताई कि विदेषी भाषा की अनिवार्यता समाप्त हो राष्ट्रभाषा को शीघ्र ही गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त हो, राष्ट्रभाषा को जन-जन की भाषा बनाने हेतु जनआन्दोलन का यह सही वक्त हैं।
कर्मचारी नेता सत्यनारायण व्यास ने कहा कि यह राष्ट्रभाषा का दुभार्ग्य है कि सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रभाषा को राजभाषा बनाने के लिये जनहित याचिका को विदेशी भाषा अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत करना पड रहा है उन्होने राजस्थान सहित अनेक राज्यों के चुनाव में धोषणा पत्रों में हिन्दी को राजसत्ता के शिखर के सवौच्य स्थान प्रदान करने तथा माननीय न्यायालय सहित प्रत्येक जगह हिन्दी में कार्य करने पर जोर देने हेतु शामिल करने का आग्रह घोषणा पत्र के निमाणर्कताओ को किया।