हनुमानगढ, १४ नवम्बर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की बेहतर क्रयान्वती के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाँ. अंबुमणि रामदोस ने राजस्थान सरकार की मुक्त कंठ से तारीफ करते हुए अन्य प्रदेशों से राजस्थान का अनुसरण करने को कहा है।
डाँ० रामदोस ने दिल्ली में मंगलवार को आयोजित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राष्ट्रीय परिषद के सम्मेलन में बोलते हुए अन्य प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों से कहा कि वे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यों को राजस्थान में जाकर देखें, जिसकी वजह से आज राजस्थान के गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं का हुलिया बदल गया है।
सम्मेलन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डाँ. दिगम्बर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने चिकित्सा-स्वास्थ्य और शिक्षा कि क्षेत्र पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को शहरी क्षेत्र के मुकाबले अधिक पैसा दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए हर जिले में कुछ कठिन क्षेत्रों को भी चिन्हित किया है और दूरदराज के इन क्षेत्रों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है ।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर अब एक मेडिकल डॉक्टर के साथ ही एक आयुष चिकित्सक (आयुर्वेद एवं होम्योपेथी) को भी नियुक्त करने से दो चिकित्सों की सेवाएं सुलभ हो रही है। राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यर्कम की पुर्नसमीक्षा जरुरी
डाँ. दिगम्बर सिंह ने सम्मेलन में सुझाव दिया कि राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यर्कम की पुर्नसमीक्षा बहुत जरुरी हो गई है, क्योंकि वर्तमान कार्यर्कम में अनेक कमियों के चलते राष्ट्रीय धन और सामग्री का अपव्यय हो रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि मलेरिया और डेंगू जैसी घातक बीमारियों के निदान के लिए राष्ट्रस्तर पर व्यूह रचना तैयार कर नई कार्य योजना की क्रियांविती की जानी चाहिए।
डाँ. सिंह ने स्वास्थ्य उप केन्द्रों में ए.एन.एम. के साथ ही तीन वर्ष का डिप्लोमा प्राप्त ७५०० जीएनएमएन स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगाने की मंजूरी देने के लिए केन्द्र सरकार का आभार जताया, लेकिन बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पदो को भरने की शर्त को अव्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि जब हमे डिप्लोमा धारी स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिल रहे हैं तब इस प्रकार की आपत्ति लगाया जाना उचित नहीं है।
डाँ. सिंह ने केन्द्र सरकार से यह मांग भी की कि वे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो के निर्माण के लिए र्कमशः ९ लाख और २४ लाख रुपये के अंशदान को बढायें, क्योंकि इनके निर्माण पर अनुमानित र्कमशः ५५ लाख और एक करोड रु. की लागत आती है।
उन्होंने प्रदेश में चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना की चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ मेडिकल कालेज में आधारभूत सुविधाओं को बढाने के लिए केन्द्र सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए।