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ग्रहण के दौरान जमकर दान पुण्य किया
15 Jan 2010

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बीकानेर सवेरे बडी थाली की शक्ल वाला स्वर्णिम सूर्य आज ग्रहण शुरू होने से पहले हीरे की चमकती अंगूठी में बदल गया। ग्रहण से सात मिनट पूर्व सूर्य की धूप काफी धूमिल पड गई। आकाश में विभिन्न रंगों की तरंगें दिखाई दीं। कुछ सैकंड के लिए अंधेरा हो गया। पक्षी घोंसलों की ओर उडान भरने लगे तो कुत्ते, पशु परेशान हो उठे। लोगों का कहना था कि ऐसा नजारा उन्होंने पहले नहीं देखा। नए साल के पहले सूर्यग्रहण को लेकर मरूनगर वासियों में एक अजब उत्साह और जिज्ञासा देखी गई। ग्रहण के कारण मंदिरों के पट मंगल रहे, शुद्धि के बाद मंदिरों को धोकर ठाकुरजी को स्नान कराया जाएगा तथा आरती होगी। श्रद्धालु सवेरे से दान-पुण्य, भजन-कीर्तन में व्यस्त रहे। ज्यादातर लोगों ने आज सूतक के कारण चाय, भोजन से परहेज रखा। सदी का सबसे लम्बा खण्डग्रास सूर्यग्रहण आज सुबह बीकानेर में 11 बजकर 50 मिनट पर शुरू हुआ और अपरान्ह 3 बजकर 10 मिनट पर इसका मोक्ष हुआ। सूर्यग्रहण के कारण धर्मनगरी में अघोषित कफ्र्यू के हालात नजर आये। इस दरम्यान शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों में ज्यादातर दुकानें-प्रतिष्ठान बंद रहे और धर्म पारायण लोगों ने हवन, भजन कीर्तन तथा दान पुण्य किया।  ग्रहण का सूतक देर रात लग जाने के कारण सूतक के चलते कर्मकाण्ड करने वाले लोगों के प्रभु आराधना में विघ्न रहा। शहर के मंदिरों में भक्त शुऋवार सुबह पूजा अर्चना नहीं कर पाये। ग्रहण मोक्ष के बाद ही मंदिरों में पूजा व श्रृंगार किया जायेगा। अनेक वैष्णव मंदिरों में भी भगवान के पट्ट नहीं खुले। उधर पवित्र कपिल सरोवर कोलायत में हजारों श्रृद्धालुओं ने डुबकी लगाई।  तीन बजकर 10 मिनट पर ग्रहण शुद्ध होने के बाद शहरवासियों ने अपने घरों में स्नान किया। जनेऊ धारियों ने अपनी जनेऊ  बदलकर सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया। ग्रहणकाल के दौरान अनेक जगह हवन किए गए और जमकर दान पुण्य का दौर चला। बारहगुवाड में पंडित गणेश छंगाणी के आचार्यत्व में वेदपाठी ब्राह्मणों ने विश्व शांति व राज्य की सुख समृद्धि के लिये हवन कर आहूतियां दी। वहीं अनेक स्थलों पर सुंदरकांड के पाठ किए गए। श्रद्धालुओं ने गायों को गुड, हरा चारा व पालक डलवाया।  आज के सूर्यग्रहण की खासियत यह रही कि आसमान में इस बार सूर्य डायमंड रिंग की जगह कंगन के आकार का दिखाई दिया, जिसे देखने के लिये बच्चों व युवाओं ने एक्स-रे व चश्मों का प्रयोग किया। ग्रहणकाल के चलते शहर में सन्नाटा सा पसर गया और व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। दुकानदार दुकानों के आगे ताश व क्रिकेट मैच का लुत्फ उठाते नजर आये। गलियों में भी बच्चों व युवाओं ने जमकर धमा चौकडी मचाई। वहीं बर्तन की दुकानों पर तांबे की कटोरी लेने वालों का तांता लगा रहा। ऐसी मान्यता है कि तांबे की कटोरी में तेल डालकर घर के बाहर रख दिये जाने से कष्ट का निवारण होता है। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालुओं ने तांबे की कटोरियां खरीद कर अपने घरों के बाहर रख दी और ग्रहण क्षय होने के बाद उसका दान कर दिया।
 




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