आर.एस. झंवर स्मृति पुरस्कार सरोदवादक अमित गोस्वामी को
15 Mar
2007
इसी वर्ष शुरू किए गए कृष्णा देवी झंवर पुरस्कार समाजसेविका भंवरी देवी एवं लोक गायिका मांगी देवी को मरु परम्परा के निदेशक डॉ.श्रीलाल मोहता ने मरु परम्परा की ओर से प्रतिवर्ष कला, संस्कृति और परम्परा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य करने वाले पश्चिमि राजस्थान के संस्कृतकर्मियों को इस पुरस्कार से समानित किया जाता है।
खबरएक्सप्रेस.कॉम, १५ मार्च। देश के प्रख्यात सरोद वादक श्री अमित गोस्वामी को सन् २००६ के आर.एस.झंवर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। मरु परम्परा के निदेशक डॉ.श्रीलाल मोहता ने मरु परम्परा की ओर से प्रतिवर्ष कला, संस्कृति और परम्परा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य करने वाले पश्चिमि राजस्थान के संस्कृतकर्मियों को इस पुरस्कार से समानित किया जाता है। पूर्व में सस्था सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. अर्जुनदेव चारण व नाट्य निर्देशक सुधेश व्यास को पुरस्कृत व सम्मानित कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि अमित गोस्वामी सुप्रसिद्ध सितारवादक पं.जसकरण गोस्वामी के पुत्र हैं और आपने उन्हीं से सरोदवादन की शिक्षा प्राप्त की। गोस्वामी इससे पूर्व राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा सन् २००३ में पुरस्कार भी मिल चुका है। ऑल इंडिया सिटी जूनियर चैम्बर द्वारा भी सन् १९९१ में आपको Most Standing Youth का सम्मान मिल चुका है। गोस्वामी आकाशवाणी के सर्वोच्च श्रेणी के कलाकार है।
विगत पन्द्रह वर्षो मे अमित गोस्वामी देश के विभिन्न भागों में अपना सरोदवादन कर चुके हैं।
डॉ. मोहता ने बताया कि मरु परम्परा की ओर से प्रतिसर्ष दिए जाने वाल २१,००० रु. का यह पुरस्कार बीकानेर में दिनांक २८ मार्च के दिन आयोजित एक समारोह में दिया जाएगा।
गौरतलब है कि मरु परम्परा इस वर्ष से ग्रामीण अंचलो मे सामाजिक चेतना, कला तथा शिल्प के क्षेत्र विशिष्ट कार्य करने वाली दो महिलाओं को भी पुरस्कृत करेगी। उन्हें श्रीमति कृष्णादेवी झंवर स्मृति पुरस्कार से २८ मार्च को ही सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान में उन्हे प्रशस्ति-पत्र के साथ ११,००० रु की राशि सम्मान स्वरूप भेंट की जाएगी।
श्रीमति कृष्णा देवी झंवर स्मृति पुरस्कार के लिये इस वर्ष नोखा तहसील के झाडेली गांव की सामाजिक कार्यकर्त्री भंवरीदेवी व श्रीकोलायत की लोकगायिका मांगी देवी की घोषणा की गई।.jpg)
श्रीमति देवी ने न केवल अपने गांव में अपितु संपूर्ण नोखा तहसील मे समाज विरोधी जमींदारों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा लिया। मांगी देवी माड गायकी के लिए जानी जाती है। वे ढोलक की निष्णात वादिका है। इन्होने राजस्थान के बाहर कई स्थानों पर अपने गायन की सफल प्रस्तुतियां दी है।
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