श्रीगंगानगर, (लक्ष्मीकान्त शर्मा) गंगानगर जिले में आठ वर्ष पहले बहुचर्चित श्रमिक नेता दर्शन कोडा हत्याकांड में राजस्थान के पूर्व समाज कल्याण मंत्री कुंदनलाल मिगलानी सहित 26 अभियुक्तों को आज अदालत ने बरी करने का फैसला सुनाया। अनूपगढ में अतिरिक्त जिला सैशन जज (त्वरित न्यायालय) के न्यायाधीश भंवरलाल लोहमरोड ने आज जब यह निर्णय सुनाया, तब सभी अभियुक्त अदालत में उपस्थित थे। अदालत पक्ष के अधिवक्ता तथा दर्शन कोडा के परिजन भी अदालत में उपस्थित थे। इस मामले में एक अभियुक्त भजनसिंह की मृत्यु हो चुकी है। वह मुकदमें का 17 वां अभियुक्त था। दिसम्बर 2000 में हुए इस हत्याकांड का सात वर्षो से अदालत में मामला विचाराधीन चल रहा था। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 45 गवाह पेश किये। इनमें से 21 गवाह पक्षद्रोही करार दिये गये। अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरूद्ध दर्शन कोडा की हत्या करने का आरोप अदालत में साबित करने में नाकाम रहा। अभियुक्तों को संदेह के आधार पर बरी करने का निर्णय सुनाया गया। इस हत्याकांड की जांच तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (बीकानेर) लक्ष्मण मीणा के नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस दल ने की थी। इस हत्यकांड में पूर्व समाजकल्याण मंत्री कुंदनलाल मिगलानी को छोडकर शेष सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। बाद में यह भी जमानत पर रिहा हो गये। मजदूर नेता दर्शन कोडा घटना के दिन 18 दिसम्बर 2000 को अपराह्न जिले के गजसिंहपुर कस्बे में गुरदयालसिंह की कॉटन फैक्ट्री में चल रहे श्रमिक विवाद में मजदूरों की सभा को संबोधित करने के बाद अपने साथी गोपाल,दर्शनसिंह आदि के साथ बस से श्रीकरणपुर में एसडीएम को यह शिकायत करने जा रहे थे कि उन्होंने श्रमिकों को 60 रुपए दिहाडी देने का जो फैसला करवाया, उसे दो दिन बाद भी फैक्ट्री मालिक लागू नहीं कर रहे हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार कोडा फैक्ट्री मालिकों को सभा में यह बात कहके रवाना हुए थे कि वे एसडीएम के पास जा रहे हैं। गजसिंहपुर से रवाना होते ही दो-वाहनों में सवार कुछ लोग बस के पीछे लग ये। उन्होंने चरनौली गांव के पास बस को रुकवाया और दर्शन कोडा को नीचे उतार कर पीटा। यह लोग दर्शन कोडा को गुरदयालसिंह की फैक्ट्री में ले गये, जहां और पिटाई की गई। बाद में उसे चक 29 व 31 बीबी के खेतों में ले जाकर और पीटा गया। तत्पश्चात उसे एक खेत में फेंक कर मारपीट करने वाले फरार हो गये। घायल दर्शन कोडा को कुछ लोगों ने पदमपुर के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया, जहां कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। दर्शन कोडा की मौत कही खबर से इलाके में जनाक्रोश भडक गया था। अगले दिन मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम होने के पश्चात वामपथी दलों ने दर्शन कोडा के शव को श्रीगंगानगर के गोलबाजार के गांधी चौक में लाकर रख दिया। दर्शन कोडा के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर तीन दिन तक शव गांधी चौक में पडा रहा। प्रदेश तथा देश के विभिन्न इलाकों के वरिष्ठ श्रमिक नेता इस चौक में दर्शन कोडा के अंतिम दर्शप करने और उन्हे लाल सलाम देने पहुंचे। इस प्रकरण में उस समय गंगानगर जिले पुलिस अधीक्षक को भी बदल दिया गया था। मामले में पूर्व मंत्री कुन्दनलाल मगलानी, भूपेंन्द्रसिंह, अमरीकसिंह, कुलविन्द्र, अमरजीतसिंह उर्फ पप्पी, मन्दरसिंह, गुरदयालसिंह,जसविन्द्रसिंह, मनजीतसिंह, हरविन्द्रसिंह, महावीर, ओंकारसिंह, जगजीतसिंह, बिन्दरसिंह उर्फ बलविन्द्रसिंह, तलविन्द्रसिंह तथा भजनसिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। बाद में भजनसिंह की मृत्यु हो गई। यह मामला करणपुर के क्षेत्राधिकार का था, इसलिए इसकी सुनवाई वहां के एडीशनल सैशन जज की अदालत में हुई। प्रतिवादी पक्ष याचिका पर इस मामले को अनूपगढ के फास्टट्रेक कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। इस अदालत से अभियोजन पक्ष मामले को अन्य अदालत में स्थानांतरित करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर रखी है। इस पर कल निर्णय संभावित था। दर्शन कोडा हत्या प्रकरण घटना के दिन से ही श्रीगंगानगर जिले में जबरदस्र्त चर्चा का विषय रहा है। इस मामले में जिले की कई मंडियां न केवल बंद रहीं, बल्कि गजसिंहपुर क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के आमने-सामने होने की नौबत आ गई थी। मामले के अभियुक्तों की उच्च न्यायालय से हुई जमानत पर यहां कलेक्ट्रेट के समक्ष हुई सभा में उस समय माकपा नेता पूर्व सांसद श्योपतसिंह सहित कई नेताओं द्वारा न्यायालय पर तल्ख टिप्पणियां किये जाने और उन्हें प्रकाशित कर देने पर माकपा के कई नेताओं तथा दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक व लोकसम्मत के संपादक के खिलाफ उच्च न्यायालय में अवमानना का मामला शुरू हो गया था। आज इस फैसले के साथ ही जहां अभियुक्तों में राहत देखी गई, वही अभियोजन दुखी नजर आया।