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मुंख्यमंत्री ने की कई घोषणाऐं, फिर से साथ चलने का भी किया आह्वान
15 Aug 2008

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बीकानेर मे इस बार मनाये गये ६२वें राज्यस्तरीय स्वाधीनता समारोह मे राजस्थान के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणाओं के साथ ही कई अन्य परियोजनाओं की उम्मीदवारी जतायी।


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पन्दरै सौ पैंताळवे, सुद बैसाख सुमेर, थावर बीज थरपियो, बीके बीकानेर और सियाळो खाटू भलो, ऊन्दाळो अजमेर, नागाणो नितरो भलो, सावण बीकानेर जैसे बीकानेर की कीर्ती के परिचायक दोहो को पेश करते हुए बीकानेर मे मनाये जार रहे कार्यक्रम की शुरूआत सांख्य दर्शन प्रणेता कपिलमुनि तथा मॉ करणी की इस भुमि को नमन किया वहीं जनता को सम्बोधित करते हुए कहा की बीकानेर वीरों की धरती है ये वो शहर है जहां के इन्सानों में ’’अपणायत‘‘ का भाव आज भी बरकरार है। यहां के भुजियों में तीखापन जरूर है, लेकिन यहां के लोगों की जुबान बीकानेरी रसगुल्ले की तरह मीठी है जो सबका मन जीत लेती है। मैं खुद भी यहां की इस मीठी बोली की कायल हूं।

ढेर सारी नवीन घोषणाओं की उम्मीदें लगाये हुए लोगो के सामने जब  मुख्यमंत्री राजे अपना पिटारा खोल रही थी तो उन्होने बार बार अपने सरकार द्वारा किये गये कार्यो को मुल्यांकन कर फिर से समर्थन की उम्मीदवारी भी जताती रही।

आफ सामने प्रस्तुत है मुख्यमंत्री के दिये गये भाषण की एक प्रतिलिपिः-

पांच साल पहले के बीकानेर और आज के बीकानेर में क्या अन्तर है, इसका फैसला मैं आप पर छोडती ह। बीकानेर ही नहीं श्रीगंगानगर, हनुमानगढ और चूरू जिले पहले के मुकाबले आज तरक्की के किस पायदान पर खडे हैं, इसकी तुलना आप को करनी है।
बीकानेर के लोगों की आवश्यकता को देखते हुए सीवरेज लाइनें डालने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट बनाने के लिए ७० करोड रुपये की योजना हमने मंजूर की। नगर विकास न्यास और सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से सडकों को चौडा करने के साथ ही उनका सुधार करने के लिए ७० करोड रुपये के काम युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। ये सारे काम आप स्वयं देख रहे हैं।
इस संभाग में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए शहरी जनसहभागिता योजना के तहत पी.एम.बी.अस्पताल में १७ करोड रुपये की लागत के Cardio]     10 करोड रुपये की लागत का Trauma] 3 करोड रुपये की लागत का छमनतवसवहल और च्ेलबीपंजतल अस्पताल के निर्माण के काम को अन्जाम दिया जा रहा है।
बीकानेर शहर के स्कूली बच्चों को समग्र स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने के मकसद से Public Private Partnership पर आधारित एक अभिनव कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया है, जिससे नौनिहालों के स्वास्थ्य की देखभाल का पुख्ता बन्दोबस्त हो सके।
जिस प्रकार से राजस्थान का कोई जिला आज विकास से अछूता नहीं रहा है, उसी प्रकार से इस पूरे संभाग के प्रत्येक जिले में स्थानीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य कराये गये हैं। अगर श्रीगंगानगर में शहर के बीचों बीच लग रह  Sugar Mill को शहर से बाहर स्थापित करने का काम शुरू किया गया है तो चुरू में विश्व प्रसिद्ध तालछापर कृष्ण मृग अभ्यारण्य का व्यापक विस्तार कर इसे पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। संभाग के ग्रामीण क्षेत्राों को राजस्थान की अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा से जोडने के लिए हमने  State Mega Highway का निर्माण कराया, जो इस क्षेत्रा के लिए एक वरदान साबित हुआ है।
शहरी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने के साथ-साथ हमने अपने ग्रामीण भाईयों और बहिनों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष IGNP क्षेत्रा का सघन दौरा किया था और न केवल दौरा किया बल्कि सभी विभागों के उच्च अधिकारियों को इस दौरे में शामिल किया। लम्बे समय से लम्बित काश्तकारों की समस्याओं का समाधान किया - चाहे वो भूमि आवंटन का मुद्दा हो, चाहे ब्याज एवं आबियाना माफी का, या फिर मोगों को दुरूस्त कर अंतिम छोर के काश्तकारों को पानी पहुंचाने का मसला हो। हमने प्ळछच् के साथ-साथ सिंचिंत क्षेत्रा के विकास और नहर की मरम्मत एवं रख-रखाव में धन की कमी नहीं आने दी।
हमारी सरकार ने यह निर्णय लिया है कि सिद्धमुख नोहर एवं अमरसिंह जरसाना कमाण्ड क्षेत्रा के खालों के निर्माण पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित रूपये १०,००० प्रति हैक्ट. की सीलिंग राशि के ज्यादा की राशि को राज्य सरकार द्वारा वहन करते हुए इन कार्यो को पुनः चालू किया जाये।
नोहर फीडर की मरम्मत के लिए मैं हरियाणा सरकार को १.१ करोड रूपए की राशि दिए जाने की घोषणा करती हूं। मुझे विश्वास है कि इससे इस क्षेत्रा के किसानों को सिंचाई का पानी नियमित रूप से मिल सकेगा।
यह आफ अभूतपूर्व विश्वास और आशीर्वाद का ही फल है कि हमारी सरकार को आपकी सेवा करने का एक सुनहरा अवसर मिला। मुझे याद है वह दिन, जब पिछडेपन का दंश झेल रहे बीमारू प्रदेश को लेकर कई चुनौतियां हमारे सामने थी। विरासत में मिला खाली खजाना, कर्ज का बोझ और राज्य का जर्जर आर्थिक ढांचा हमार सामने था, लेकिन हमने एक संकल्प लिया था, कि हम सब मिलकर एक ऐसे आधुनिक राजस्थान का निर्माण करेंगे जिसमें हर प्रदेशवासी के चहरे पर स्वाभिमान, स्वावलम्बन और खुशहाली की मुस्कान होगी। इसके लिए हमने एक Vision Document तैयार किया, जो एक ऐसा योजनाबद्ध संकल्प था जिसमें प्रदेश के सर्वांगीण विकास का प्रतिबिम्ब साफ-साफ दिखाई दे रहा था।
प्रदेशवासियों को सुशासन मिले। विकास के लिए धन की कमी महसूस न हो, इसके लिए हमने सबसे पहले शासन को चुस्त-दुरूस्त कर कुशल वित्तीय प्रबन्धन पर विशेष ध्यान दिया। यह हमारे बेहतर वित्तीय प्रबन्धन का ही नतीजा है कि जो राजस्व प्राप्तियों का वित्तीय घाटा वर्ष २००३ में ३० प्रतिशत था, वह वर्ष २००६-०७ में मुनाफे के बजट में तब्दील हो गया। यहां तक कि फरवरी, २००४ के बाद हमने कभी भी ओवरड्राफ्ट की नौबत नहीं आने दी। हमारा वित्तीय प्रबन्धन और आर्थिक अनुशासन इतना बेहतर रहा, कि देशभर में उसकी सराहना की गई। हालांकि ५ साल का समय बहुत कम होता है फिर भी हमारा राजस्थान बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकलकर विकसित राज्यों की कतार में खडा हो गया है।
हमने बजट को सिर्फ घोषणाओं का पर्याय और आंकडों का मायाजाल ही नहीं समझा बल्कि बजट में की गई घोषणाओं की क्रियान्विति करने के लिए हर योजना को वित्तपोषित भी किया। यही कारण है कि हमारी बजट घोषणाऐं, कार्य के रूप में परिणीत हुई हैं।
यह तो सभी मानते हैं कि हर खुशहाल परिवार के पीछे महिला का महत्वपूर्ण योगदान होता है। मेरा मानना है कि प्रदेश में सच्ची खुशहाली तभी आ सकती है, जब महिला सामाजिक, राजनैतिक तथा आर्थिक रूप से सशक्त हो। हमारे अब तक के सभी बजट आम आदमी के साथ-साथ महिलाओं के आत्मविश्वास व स्वाभिमान बढाने के प्रति समर्पित रहे हैं। पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए ५० फीसदी आरक्षण कर हमने महिलाओं के सामाजिक व राजनैतिक सशक्तिकरण की दिशा में एतिहासिक कदम उठाया है।
महिलाओं को विकास में निर्णायक भूमिका देने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में ८५० करोड रूपये की लागत से विश्व की सबसे बडी और महत्वाकांक्षी - ‘‘भामाशाह वित्तीय सशक्तीकरण योजना‘‘ ¬की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत हम गांव-गांव में उसी प्रकार की ठंदापदह सुविधा शुरू करायेगें जो आज शहरों में है। आने वाले कुछ ही समय में हमारी बहिनें  Smart Card के जरिये घर के नजदीक ठंदा से न केवल पैसा निकाल सकेंगी, बल्कि ऋण भी प्राप्त कर सकेंगी। इसी प्रकार से अब उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पडेगें क्योंकि विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाला पैसा सीधे ही उनके इस बैंक खाते में जमा हो जायेगा। ग्रामीण क्षेत्रा के पात्रा परिवारों की महिलाओं के नाम बैंक खाता खुलवाने पर उनके खाते में राज्य सरकार की ओर से पंद्रह सौ रुपये प्रोत्साहन के रूप में जमा करवाये जा रहे हैं। महिला के नाम जमा इस पैसे को उसके खाते से और कोई नहीं निकलवा सकेगा। राज्य सरकार का यह कदम महिलाओं के स्वाभिमान के साथ-साथ उनकी समाज में हैसियत को और अधिक बढायेगा। सिर्फ चार महिनों में ऐसे पचास लाख खाते खोल दिये जायेगें, जो इस प्रकार की एक अनूठी पहल है।
इसी   Smart Card के माध्यम से राज्य के ग्रामीण BPL परिवारों को ३० हजार रूपये तक का निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा भी राज्य सरकार द्वारा कराया जायेगा। पन्नाधाय जीवन अमृत योजना के तहत राज्य के २६ लाख ४८ हजार BPL परिवारों को निःशुल्क जीवन बीमा सुविधा प्रदान की जा रही है, जिसको भी ैउंतज ब्ंतक से जोड दिया जायेगा ।
महिलाओं के लिए कृषि भूमि हस्तान्तरण पर लगने वाली  Stamp Fees को आधा किए जाने और भू आवंटन में पति-पत्नी के संयुक्त नाम से ही पट्टे जारी किये जाने के हमारे निर्णय से महिलाओं का मालिकाना हक बढा है।
शहर और गाँव के बीच विकास के अंतर को पाटने के लिए हमने शहरों के साथ-साथ गांवों की आधारभूत संरचना को भी मजबूत किया है। आज देश की राजधानी दिल्ली तक में बिजली की कमी चल रही है। महाराष्ट्र में उद्योगों पर सप्ताह में ४० घण्टे बिजली कटौती हो रही है। उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, हरियाणा और पंजाब बिजली संकट से जूझ रहे है।
कोई जमाना था, ५-७ साल पहले, जब हमारी माता-बहिनें चिमनी की रोशनी में खाना बनाती थी, हमारे गाँव के बच्चे लालटेन की रोशनी में पढते थे। गावंों में शहर के समान बिजली मिलना एक सपना था। इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए हमने शहरों के समान गांवों में बिजली देने का निर्णय लिया। इसके लिए पूरे प्रदेश में फीडर सुधार अभियान चलाकर कृषि और घरेलू बिजली की लाइन अलग की गई। फलस्वरूप आज करीब ३४ हजार गांवं के घरों में शहरों के समान बिजली मिलने लगी है। जिससे ग्रामीण क्षेत्राोंे में एक नई सामाजिक और आर्थिक क्रान्ति का सूत्रापात हुआ है और वहां शहरों के समान सुविधाऐं मुहैया होने लगी हैं। ग्रामीण क्षेत्रा की छोटी-छोटी ढाणियों को ’’मुख्यमंत्राी सबके लिए विद्युत योजना‘‘ से जोडा जा रहा है। छबडा, सूरतगढ और कोटा में बिजलीघरों की नई इकाइयां काम शुरू करने वाली हैं। उसके बाद मार्च, २००९ तक हम बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जायेंगे।
काश्तकारों को बिजली कनेक्शन के लिए पहले सालों तक इंतजार करना पडता था। हम पिछले पाँच वर्षों क मुकाबले काश्तकारों को करीब दुगुने बिजली कनेक्शन दे रहे हैं। अब तक करीब डेढ लाख कृषि कनेक्शन तो दिए जा चुके हैं और जल्द ही ८० हजार कनेक्शन और दिये जा रहे हैं।
PMGSY योजना के सफल क्रियान्वयन से अब शहरों जैसी सडकें गाँव-गाँव में दिखने लगी हैं। विश्व बैंक के मिशन ने पिछले २७ जून को प्रेषित रिपोर्ट में भी इस योजना की क्रियान्विति में राजस्थान को देश का अग्रणी राज्य माना है, जो हम सबके लिए गर्व की बात है।
हमने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ विकास कार्यों को अंजाम दिया है। योजना केन्द्र की हो या राज्य की, पैसा तो आम जनता का है और उसका पूरा सदुपयोग होना चाहिए। जहां तक गरीब की रोटी का सवाल हो तो हम सबको राजनीति से ऊपर उठकर उसके हित के बारे में ही सोचना चाहिए। हमने इसी सोच के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कार्यक्रम को क्रियान्वित किया है। आज गाँव के हर परिवार को १०० दिवस का रोजगार उपलब्ध हो रहा है। अब तक इस योजना में करीब ४५ लाख परिवारों को रोजगार मिल चुका है। यह जानकर आपको खुशी होगी कि इस योजना की क्रियान्विति में हमारा प्रदेश पूरे देश में अव्वल रहा है। इसका पूरा श्रेय Team Rajasthan को ही जाता है। इस Team Rajasthan में अकेली वसुंधरा राजे ही नही है, इसमें हमारे सभी जनप्रतिनिधि, कर्मचारी, अधिकारी और इन सबसे बढकर प्रदेश की जनता यानि आप सब शामिल हैं। इसका श्रेय, मैं खास तौर पर प्रदेश की महिलाओं को देना चाहगी, जिन्होंने इस योजना में न केवल बढ-चढकर हिस्सा लिया बल्कि कडी मेहनत कर राजस्थान के विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसी लिए महिला श्रमिकों को प्रोत्साहित करने के लिए हमने ‘‘अमृता देवी विश्नोई योजना‘‘ शुरू की है, जिसके अन्तर्गत १०० दिन का रोजगार पूरा करने वाली महिलाओं को एक साडी अथवा घाघरा-ओढनी सम्मान के रूप में दिये जा रहे हैं।
हम सभी चाहते है कि हमारे बच्चे पढ लिखकर होनहार बने जिससे कि परिवार तरक्की कर सके। इसी तरह से जब हमारे प्रदेश रूपी परिवार का प्रत्येक सदस्य शिक्षित होगा तब ही हम समृद्ध होंगे। हमारी परिकल्पना है, एक शिक्षित और विकसित राजस्थान की। हमने गांव-गांव में स्कूल खोले, और लगभग १ लाख अध्यापको को नियुक्ति दी । इसके अलावा कई विद्यालयों में अध्यापकों के रूप में जो पैराटीचर थे, तनख्वाह के नाम पर एक श्रमिक से भी कम पैसा मिलने के कारण बच्चों को मन से नहीं पढा पा रहे थे। हम ऐसे २८ हजार पैराटीचर्स को नियमित वेतनमान देते हुए प्रबोधक के रूप में स्थायी कर रहे हैं।
लम्बे समय से विषय अध्यापकों की कमी को देखते हुए हमने यह निर्णय लिया है कि सेवा निवृत्ति से तीन माह पूर्व विषय अध्यापकों से विकल्प लेकर इन्हें अधिकतम दो वर्षो तक निर्धारित शर्तो के अनुसार पुनर्नियुक्त किया जाएगा।
Competition के इस युग में हमने Professional शिक्षा को निरन्तर बढावा देने के प्रयास किये है। जहां पहले प्रदेश में मात्रा १२ आईटीआई संस्थान थे, वहीं पिछले साढे चार वर्षों में इनकी संख्या ३ सौ ३ हो गई और जहां ५ साल पहले मात्रा एक हजार १ सौ २० बच्चे इन संस्थानों में प्रवेश ले पाते थे, वहीं अब ३० हजार ४ सौ ४० बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। कहां ११ सौ २० और कहां ३० हजार ४ सौ ४०।
तकनीकी शिक्षा निदेशालय का पुनर्गठन कर महानिदेशक तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अधीनस्थ निदेशक पोलिटेक्नीक और निदेशक प्रशिक्षण के दो अलग-अलग पद सृजित किये जाएंगे। जिससे कि युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर तकनीकी शिक्षा व प्रशिक्षण प्राप्त हो सके।
पूरे प्रदेश में उच्च शिक्षा का एक अच्छा वातावरण तैयार हो रहा है। आने वाले समय में हम बीकानेर में Triple IT] जोधपुर में   IIMS, उदयपुर में IIM] अजमेर में Central University] जयपुर में  World University] कोटा में IIT स्थापित करना चाहेंगे। इसी प्रकार शेखावाटी में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, भरतपुर में महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय और अलवर में राज ऋषि भर्तृहरि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्रा में इस क्षेत्रा के लोगों के लिए मील के पत्थर साबित होंगे, क्योंकि अब प्रदेश के प्रतिभावान युवाओं को उच्च शिक्षा के लिये बाहर नही जाना पडेगा।
जब आपने हमें प्रदेश की सेवा का मौका दिया, तब बेरोजगारों के लिए नौकरियों के दरवाजे बंद थे। तमाम भर्तियों पर रोक लगी हुई थी। रोजगार के अवसर नजर नहीं आ रहे थे। हमारे नौजवान हताश होकर रोजगार के लिए भटक रहे थे। हमने उनकी इस पीडा को समझा और भर्ती पर लगी हुई रोक हटाई। इन सबका परिणाम है कि अब तक लगभग १० लाख से भी अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिल चुका है।
हमने यह निर्णय लिया है कि अगर किसी वर्ष - विशेष में किसी भी सेवा की सीधी भर्ती की परीक्षा आयोजित नही हो पाती है, तो उस परीक्षा के उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी जो कि तीन वर्ष से अधिक नही होगी।
वर्तमान में नवीन नियुक्तियों में अधिसूचित जनजाति क्षेत्रा के स्थानीय निवासियों के लिये पृथक से रिक्त पदों में से ४५ प्रतिशत अनुसूचित जनजाति एवं ५ प्रतिशत अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिये सीटें आरक्षित कर शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिये निर्धारित करने की व्यवस्था को सेवापूर्व शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों यथा M.Ed., B.Ed., B.P.Ed., शिक्षाशास्त्री,   STC सामान्य, संस्कृत, NTT, ETT पाठ्यक्रम में भी लागू किया जावेगा।
इसी प्रकार प्रारम्भिक शिक्षा विभाग द्वारा  STC / NTT पाठयक्रमों में सत्रा २००६-०७ से बार जिले की शाहबाद एवं ंकशनगंज तहसीलों के स्थानीय निवासियों के लिये २५ प्रतिशत आरक्षण कर शेष ७५ प्रतिशत सीटें सामान्य नियमों के आधार पर तथा अनुसूचित जनजाति अधिसूचित क्षेत्रा में ४५ प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के स्थानीय अभ्यर्थियों को आरक्षित करने के प्रावधान को नियमित किया जाता है।
रोजगार मिलने तक युवाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए हमने अक्षत योजना शुरू की। इस योजना का लाभ अब तक २८ हजार से ज्यादा बेरोजगार युवाओं ने उठाया है। जिन्हें सरकार की ओर से अब तक ५ करोड से अधिक की राशि २ साल तक बेरोजगारी भत्ते के रूप में दी गई है।
"Mission on Livelihood" योजना के तहत युवकों को प्रशिक्षण देने का काम भी हमने किया ताकि वे अपने पांव पर खडे हो सके। अब तक १ सौ ६० से अधिक रोजगार सहायता शिविर लगाकर हमने करीब १ लाख ६४ हजार बेरोजगार नौजवानों को नये अवसर देने की पहल की है। अभी-अभी बीकानेर में आयोजित किए गए रोजगार सहायता शिविर में १५ हजार नौजवानों ने भाग लिया जिनमें से करीब ११ हजार रोजगार पाने में सफल रहे।
प्रदेश के विकास में गैर संगठित मजदूरों की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए व उनकी पीडा को समझते हुए हमने न केवल श्रमिकों की मजदूरी बढाकर ११५ रुपये तक की, बल्कि उनको दो वक्त की रोटी मामूली दाम पर मिल सके, इसका भी बन्दोबस्त कर दिया है। अक्षय कलेवा योजना के तहत अब प्रदेश के ७५ शहरों में १२१ केन्द्रों पर १० हजार से अधिक श्रमिकों को प्रतिदिन सस्ता और पौष्टिक भोजन मिलने लगा है।

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