सरकार और प्रशासन द्वारा केवल घोषणाओं के अम्बार लगाने तथा सामाजिक तिरस्कार से क्षुब्ध वृद्धजन करेंगें सूझावपूर्ण प्रदर्शन। दाण्डीयात्रा, पुष्पभेंट, सुझाव पत्र सौंपने के साथ ही होगी सर्वधर्म प्रार्थना।
वृद्ध हक मांगते नही है यही है भारतीय संस्कृति, अतः कोई मांग पत्र नही, केवल दिया जायेगा सुझाव पत्र।
हेल्पऐज इण्डिया के कार्यालय मे आज हुई एक पत्रकार वार्ता मे प्रोजेक्ट ऑफीसर राजेन्द्र राजपुरोहित ने पत्रकारों को वृद्धजनों को सामाजिक स्तर और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को लेकर हर पल, हर जगह हो रही अव्यवस्था से शान्तिपूर्ण रवैये से नियन्त्रित करने हेतु बीकानेर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक सुझाव पत्र देंगें। इस सुझाव पत्र मे प्रशासन वृद्धजनों की ओर, वृद्धावस्था पेंशन योजना, कानून व्यवस्था, सरकारी कार्यालयों मे वृद्धजनों हेतु कार्मिक पद, यातायात सुविधा, चिक्तिसा सुविधा, हेल्पलाईन, वृद्धाआश्रम अथवा वृद्ध देखभाल केन्द्र तथा वृद्ध व्यापारीयों हेतू पेंशन योजना आदि योजनाओं को बनाने तथा कि्रयान्वित करें।
हेल्पेज इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफीसर राजेन्द्र राजपुरोहित वृद्ध व्यक्तियों के सहायतार्थ हेल्पेज इण्डिया द्वारा पूरे भारत मे चलाई जा रही इन योजनाओं के बारे मे विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हम १७ नवम्बर को सुबह इसके लिये गांधी वादी तरीका अपनाते हुए १५०० वूद्धों व गणमान्य व्यक्तियों सहित एक शांतिपूर्ण दाण्डीयात्रा रखेंगे जो कि पब्लिक पार्क से शहीद पार्क तक होगी। दाण्डीयात्रा जिला कलेक्टर के कार्यालय पहुंचने के बाद वहां पर सभी को गुलाबपुष्प दिये जायेगें तथा कार्यालये के आस पास फुल बिखेरे जायेगें जिससे की वहां के सरकारी कार्यालयों मे कार्यरत कर्मचारीगण भी वृद्धों की पीडा को समझते हुए अपने स्तर पर सहायता करते रहने के लिये अपील करते रहे। दाण्डीयात्रा व पुष्पभेंट कार्यक्रम के बाद संत दुलाराम कुलरिया व युवाओं सहित २५ गणमान्य व्यक्तियों का एक शिष्ट मण्डल जिला कलेक्टर को अपना सुझाव पत्र सौंपेगा तथा उसके बाद एक सर्वधर्म प्रार्थना रखी जायेगी।
वरिष्ठ नागरिक समिति के अध्यक्ष डॉ कालीचरण माथुर ने भी पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए
बताया कि शासन व प्रशासन स्तर पर कई बार घोषणाऐं हो चुकी है जिसमे २७-२८ अक्टूबर को होने वाले सम्मेलन मे प्रदेश की मुख्यमंत्री ने वृद्वजनों के लिये एक पृथक आयोग की भी घोषणा कर रखी है लेकिन कोई कार्यवाही होती नजर नही आ रही है और आज के समय मे वृद्धों के लिये विशेष रूप से स्वास्थ्य संम्बन्धी समस्याऐं ज्यादा है जो पृथक रूप से चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने से ही हल हो सकती है।