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जयपुर। मुख्यमंत्री गहलोत ने पुलिस आधुनिकीकरण योजना को आगामी दस वर्षो तक जारी रखने की वकालत करते हुए राजस्थान को ए श्रेणी के राज्यों की सूची में रखने की मांग की है, ताकि प्रदेश को केंद्र से शत-प्रतिशत सहायता मिल सके। गहलोत सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आंतरिक सुरक्षा विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की अपनी विशेष विपरीत परिस्थितियाँ हैं जिनमें पडोसी देश पाकिस्तान के साथ लगती 1040 कि.मी. लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के अलावा प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियाँ रेगिस्तानी क्षेत्र और सूखा संभावित क्षेत्र की बहुतायत है। इन सभी परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए राजस्थान को ए श्रेणी के राज्यों की सूची में शुमार करना जरूरी है, जो पुलिस आधुनिकीकरण के अन्तर्गत केंद्र से शत प्रतिशत सहायता के पात्र होते हैं। वर्तमान में राज्य बी श्रेणी में है तथा केन्द्र से 75 प्रतिशत सहायता का ही हकदार है। गहलोत ने जोधपुर में एन.एस.जी. का हब स्थापित करने के साथ ही भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित 20 काउंटर इंसर्जेन्सी एवं आतंकवाद निरोधक स्कूल में से एक स्कूल राजस्थान में स्थापित करने का अनुरोध किया। साथ ही जयपुर में सी.आर.पी.एफ. का गुप सेंटर बनवाने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे सुरक्षा बल सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने कर्त्तव्य का निर्वहन बहुत मुस्तैदी से कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैने स्वयं बोर्डर क्षेत्र का दौरा कर यह पाया है कि वहां जवानों के हौसले बुलंद है और जिला प्रशासन, बी.एस.एफ., पुलिस और अन्य फोर्स के मध्य अच्छा समन्वय है। गहलोत ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक एवं राष्ट्रीय परिदृश्य म आतंकवाद एक गंभीर चुनौती है जिससे निपटने के लिए सभी को समन्वित प्रयास करने होंगे। हर नागरिक को जागरूक बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का प्रत्येक नागरिक सजग रहते हुए राष्ट्रीय सम्प्रभुता एवं अखंडता के प्रहरी का काम करे। उन्होंने सभी के सहयोग से आतंकवाद की कठिन चुनौती से सफलतापूर्वक निपटने का दृढ विश्वास व्यक्त किया। गहलोत ने पिछले वर्ष नवम्बर में मुम्बई में हुए आतंकी हमले के पश्चात् देश की सुरक्षा व्यवस्था ओर आंतरिक सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए इस वर्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह में आयोजित मुख्यमंत्री सम्मेलन के छह माह पश्चात् पुनः मुख्यमंत्री सम्मेलन का आयोजन करने को स्वागत योग्य कदम बताया और आतंकवाद के विरूद्घ यू.पी.ए. सरकार की प्रतिबद्घता की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक वह समय था जब पूरा मुल्क आतंकवाद के दंश से चिंतित था। लालकिला, पार्लियामेंट, अक्षरधाम, रघुनाथ मंदिर आदि स्थानों पर आतंकी हमले हुए। राजस्थान के अजमेर और जयपुर शहर में भी आतंकवादी घटनाएं हुई और सीरियल ब्लास्ट से जयपुर में 70 लोगों की मौत हुई। श्री गहलोत ने कहा कि यू.पी.ए. सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ पूरी प्रतिबद्घता के साथ प्रभावी कार्यवाही शुरू की गई है। केन्द्रीय गृहमंत्री ने राजस्थान सहित सारे मुल्क का दौरा किया। केन्द्र सरकार द्वारा आतंकवाद की चुनौती का सामना करते हुए जो प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इससे देश में विश्वास का एक वातावरण बना है और नागरिकों को इस बात का अहसास हो रहा है कि यूपीए सरकार आतंकवाद के विरूद्घ कडे कदम उठाने में कोई कसर बाकी नही रख रही है। आतंकवाद का दृढता से मुकाबला करने के संबंध में प्रधानमंत्री के विचारों से आज सारा देश सहमत है। गहलोत ने राजस्थान में पिछले वर्ष गुर्जर आंदोलन की चर्चा करते हुए कहा कि इस आंदोलन की लपटें दिल्ली और आसपास गुडगांव, नोएडा, उत्तरप्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों तक फैली थी और पूरे देश में राजस्थान को लेकर एक चिंता उत्पन्न हो गई थी, लेकिन हमारी सरकार ने इस समस्या का शांतिपूर्ण ढंग से हल निकाल कर देश और प्रदेश में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। गहलोत ने विगत 6-7 माह के अंतराल में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा उठाए गए कई प्रभावी कदमों की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य में आतंकवादी विरोधी दस्ता (ए.टी.एस.) एवं स्पेशल ऑपरेशन गु*प (एस.ओ.जी.) का गठन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य में आतंकवादी घटनाओं से निबटने के लिए एन.एस.जी. की तर्ज पर चार त्वरित कार्रवाई बल बनाए गए हैं। इन्हें जयपुर, जोधपुर एवं अजमेर में तैनात किया गया है। ऐसे ही तीन अन्य बलों को जोधपुर में प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रदेश में कुल नौ ऐसे बल बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही राज्य के हर जिला मुख्यालय पर स्पेशल इंटरवेशन यूनिट का गठन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा राज्य विशेष शाखा को मजबूत किया जाकर राज्य में इंटेलिजेंस के लिए ‘पृथक केडर’ का गठन का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। राज्य विशेष शाखा को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में पुलिस के रिक्त पदों को भरने की कार्यवाही सतत जारी है। पुलिस विभाग को भर्ती में रोक से मुक्त कर दिया गया है। प्रदेश में 5 हजार कांस्टेबलों और सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का काम शुरू किया गया है। एस.टी.एस.सी. के बैकलॉग को भी दूर किया जा रहा है। गहलोत ने बताया कि प्रदेश के संवेदनशील स्थानों एवं आईकॉनिक स्थलों की सुरक्षा के लिए राजस्थान संवेदनशील प्रतिष्ठान सुरक्षा (विनियमन) बिल, 2009 लाया जा रहा है। इस कानून के बनने के अंतराल में कार्यपालिकीय आदेश जारी किए गए हैं। अजमेर में विश्व प्रसिद्घ दरगाह शरीफ एवं नाथद्वारा में श्रीनाथ जी मंदिर की सुरक्षा सुदृढ करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी स्वीकृत किए गए हैं। राज्य विशेष शाखा में ऐसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ भी बनाया गया है। गहलोत ने बताया कि राजस्थान में सीमावर्ती जिलों में 15 काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट एवं जिला पुलिस की मदद से निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था की देखभाल की जा रही है। सीमा क्षेत्र में 500 मीटर में आने वाले क्षेत्र और उससे सटे एक हजार मीटर की दूरी तक स्थित क्षेत्र में आवागमन प्रतिबंधित घोषित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर रात्रि कफयू लगाया गया है और जोधपुर, जैसलमेर, बाडमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में संयुक्त पूछताछ केन्द्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के हर पुलिस थाना स्तर पर सामुदायिक समन्वय समूह’ का गठन कर पुलिस के विभिन्न कार्यो के लिए उनकी सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। आंतरिक सुरक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्घता का परिचय देते हुए श्री गहलोत ने राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए केन्द्र से पुलिस आधुनिकीकरण योजना को अगले 10 वर्षो तक और लागू रखने और राजस्थान को उपयुक्त सहायता देने के लिए आग्रह किया। सम्मेलन में मुख्य सचिव श्रीमती कुशाल सिंह, पुलिस महानिदेशक हरीश चंद्र मीणा, प्रमुख गृह सचिव एस.एन.थानवी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्रीमत पांडे, दिल्ली में राज्य के प्रमुख आवासीय आयुक्त डाँ. पी.के.आनंद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग आदि ने भी भाग लिया। सम्मेलन के प्रारंभ में प्रधानमंत्री डाँ. मनमोहन सिंह, केन्द्रीय गृह मंत्री श्री पी.चिदंबरम और केन्द्रीय गृह सचिव जी.के.पिल्लई ने सम्मेलन के उद्देश्य एव कार्यसूची पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री मुल्लापन्ना रामचंद्रन और अजय माकन भी मौजूद थे।
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