जयपुर सदन में अव्यवस्था फैलाने, विपक्षी सदस्यों को उकसाने और बिना अनुमति बोलने के लिए भाजपा के सचेतक राजेन्द्र राठौड़ को भी एक साल के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया। इससे पहले सत्तापक्ष ने बेवजह आरोप लगाने के कारण भाजपा विधायक हनुमान बेनीवाल को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया था। राठौड़ के निलंबन का प्रस्ताव सरकारी मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल ने रखा जिसे सत्तापक्ष ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके बाद आसन पर मौजूद अध्यक्ष दीपेन्द्रसिंह शेखावत ने राठौड़ को सदन छोड़कर जाने के लिए कहा। विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया और सत्तापक्ष पर हठधर्मिता करने का आरोप लगाया।राठौड़ के बाहर नहीं जाने पर जब मार्शल और सुरक्षाकर्मी आगे बढ़े तो भाजपा विधायकों ने घेरा बना लिया और राठौड़ को नहीं निकालने दिया। इस दौरान विधायकों और सुरक्षाकर्मियों में धक्का मुक्की भी हुई। सदन में जबरदस्त हंगामा हो गया। हंगामे के बीच सत्तापक्ष ने विधायी कार्य निबटाने के साथ ही उद्योग, खनिज और वन विभाग की अनुदान मांगें पारित करवा दीं। राठौड़ के निलंबन के मुद्दे पर भाजपा, माकपा समेत पूरा विपक्ष सदन में ही धरने पर बैठ गया। धरने पर बैठे विधायकों को संबोधित करते हुए उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि गृहमंत्री शांति धारीवाल की जिद की वजह से यह सब हुआ है। सत्तापक्ष सदन नहीं चलाना चाहता और जनता के मुद्दों से भागना चाहता है। हम प्रजातांत्रिक तरीके से इस लड़ाई को लड़ेंगे और पूरी रात सदन में ही धरना देंगे। वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सत्तापक्ष सदन में अव्यवस्था करने का मौका खोज रहा था। सत्तारूढ़ दल इसलिए सदन नहीं चलाना चाहता क्योंकि उन्हें जनहित के मुद्दों पर जवाब देना पड़ेगा।