नई दिल्ली, आगामी 22 जुलाई को होने वाले इस सदी के सबसे बडे सूर्य ग्रहण को राजस्थान की सूर्यनगरी जौधपुर व गुलाबी नगरी जयपुर और अन्य क्षेत्रों में भी देखा जा सकेगा। इन क्षेत्रों में सूर्य ग्रहण का 90 प्रतिशत नजारा ही देखा जा सकेगा, लेकिन घ्पडोसी राज्य गुजरात के सूरत एवं बडोदरा आदि शहरों में इसे शत-प्रतिशत देखा जा सकेगा, जबकि देश की राजधानी दिल्ली के लोग सूर्य ग्रहण का करीब 80 प्रतिशत दृश्य ही देख सकेंगे।
सौर वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में इस अद्भुत खगौलीय घटना की शुरूआत ’सूर्य के पुत्रा‘ और ’सूर्य नगर‘ कहे जाने वाले गुजरात के सूरत शहर में सूर्योदय के साथ होगी और यहां प्रातः 6:26 बजे से 6:30 बजे तक करीब चार मिनट तक सूरज बिल्कुल नहीं दिखाई देगा और पूर्ण सूर्य ग्रहण के अद्भुत एवं अनूठे दृश्य को देखा जा सकेगा।
भारत में यह खगौलीय नजारा बुधवार 22 जुलाई को प्रातः 5:28 बजे से 7:40 बजे तक दो घंटे से भी अधिक समय तक देखा जा सकेगा। लेकिन इसका केन्द्र बिन्दु सूरत से लेकर पटना और गया तक की पट्टी होगी। इसी प्रकार पृथ्वी के करीब आधे भाग के एक तंग गलियारे में देश-दुनिया के अन्य लोग भी इसे देख सकेगें। सूर्यग्रहण जिस भाग से भी गुजरेगा वहां रोशनी सायंकालीन वेला जैसी मंधिम-मंधिम हो जायेगी। सौर वैज्ञानिकों के अनुसार धरती पर इस प्रकार का सूर्य ग्रहण अब 123 वर्षो के पश्चात् 13 जून, 2132 को होगा।
सौर वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना आंखों की रोशनी के लिए घातक सिद्व हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक राय के अनुरूप इसे विशेष लेंस अथवा धूप के काले चश्मों से ही देखना श्रैयस्कर होगा। वैज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण से जुडी अन्य भ्रंतियों को आधार हीन बताया है।