बीकानेर। बीकानेर जिले के 56 गांवों की भूमि अधिगृहीत करने के प्रस्ताव को भारत सरकार रक्षा मंत्रालय द्वारा नामंजूर कर दिये जाने के फैसले से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। जिले के लूनकरनसर, बीकानेर, पूगल, खाजूवाला, छतरगढ तहसील क्षेत्र के 56 गांवों की भूमि सेना को संयुक्त शस्त्र प्रशिक्षण के लिए अधिगृहीत की जानी थी लेकिन रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर सर्वे के बाद भूमि अधिग्रहण अवरूद्ध हो गया। भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त था। क्योंकि ग्रामीणों का कहना था कि वह यहां के निवासी हैं तथा इनकी कृषि योग्य भूमि भी उनके हाथ से निकलने वाली थी जिनसे कि उनका जीवनयापन होता है। ग्रामीणों का कहना था कि कुछ बाहरी लोगों के द्वारा गांवों में भूमि क्रय कर रखी थी लेकिन वो यह चाहते थे कि अगर सेना प्रशिक्षण के लिए उक्त भूमि ली जाती है तो उनको अच्छा मुआवजा मिल सकता था लेकिन राज्य सरकार के मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल के अथक प्रयासों से गत वर्षों से चल रहा प्रकरण से ग्रामीणों परेशान थे। इस संबंध में बीकानेर पंचायत समिति प्रधान तुलसीराम मूंड ने बताया कि मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल ने सोनिया गांधी व रक्षामंत्री एन.के.एटोनी, आदि से मुलाकात कर इन गांवों के लिए केन्द्र सरकार तक ग्रामीणों के लिए आवाज उठाई जिसके कारण ही आज ग्रामीणों को अपनी भूमि से वंचित नहीं होना पडा। 56 गांवों के ग्रामीणों ने बीकानेर पंचायत समिति पहुंचकर अधिगृहीत होने वाली भूमि नहीं होने पर खुशी जाहिर की।