बीकानेर। टीबी की दवाइयां लेने में लापरवाही बरतने वाले मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। अपनी थोडी सी लापरवाही से इलाज में असफल हुए मरीजों को अब ‘डॉटस प्लस‘ के तहत इलाज दिया जाएगा। राष्ट्रीय क्षय निवारण कार्यऋम के तहत टीबी रोग के कुछ केसेज असफल होने पर ऐसे मरीजों के इलाज के लिए केटेगरी चार के तहत महंगी दवाइयां शामिल की गई हैं, ताकि टीबी को देश से भगाया जा सके।
वर्तमान में टीबी के मरीजों को डॉटस के तहत दवाई दी जा रही है। लेकिन किन्ही विशेष परिस्थितियों में डॉटस की केटेगरी प्रथम के चौथे व केटेगरी दो के पांचवें माह तक इलाज लेने के बाद भी मरीज का स्पूटम पॉजीटिव आता है, तो ऐसे मरीज के लिए केटेगरी चार तैयार की गई है। जिसे अब ‘डॉटस प्लस‘ नाम दिया गया है।
यह होगा डॉटस प्लस में
डॉटस प्लस में टीबी के फेलियर मरीज को करीब दो साल तक नियमित इलाज लेना पडेगा। केटेगरी एक व दो में इलाज के बाद भी स्पूटम पॉजीटिव आने पर उसके स्पूटम की कल्चर सेंसेटिव रिपोर्ट निकाली जाएगी। यह रिपोर्ट तीन माह में तैयार होगी।
इसके बाद भी स्पूटम पॉजीटिव आने पर उसका डॉटस प्लस के तहत इलाज शुरू किया जाएगा। इसमें मरीज को एक माह तक चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाएगा। उसके बाद छह माह तक निर्घारित अंतराल से इंजेक्शन लगाए जाएंगे व उसके बाद करीब डेढ से दो साल तक उसे इलाज दिया जाएगा।