राजस्थान के ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष पैकेज दिया जाए
19 Mar
2007
राजस्थान के सांसदों की प्रधानमंत्री से भेंट
खबरएक्सप्रेस, १९ मार्च। राजस्थान के सांसदों के प्रतिनिधि मण्डल ने सोमवार को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से उनके संसद स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मांग की है कि प्रधानमंत्री राजस्थान में हाल ही में हुई ओलावृष्टि के प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए हस्तक्षेप करें और प्रदेश के लिए तत्काल विशेष पैकेज की घोषणा की जाए। प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व सांसद प्रकोष्ठ के संयोजक श्री रधुवीर सिंह कौशल ने किया। श्री कौशल के अतिरिक्त प्रधानमंत्री से मिलने वालों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद श्री सुभाष महेरिया, श्री कैलाश मेघवाल, श्री गिरधारी लाल भार्गव, डाँ. कर्ण सिंह यादव, श्री सचिन पायलेट, श्री वी.पी. सिंह, श्री जसवंत सिंह विश्नोई, डाँ. ज्ञान प्रकाश पिलानिया, श्रीमती नजमा हेपतुल्ला, श्रीमती किरण माहेश्वरी, श्रीमती सुशीला बंगारू, श्री महावीर भगोरा, श्री दुष्यंत सिंह, श्री कृष्ण लाल बाल्मीकि, श्री राम स्वरुप कोली, प्रो. रासा सिंह रावत, श्री राम सिंह कस्वां, श्री भवर सिहं डांगावास, श्री पुष्प जैन और श्री श्रीचन्द कृपलानी भी शामिल थे। सांसदों ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि ओलावृष्टि से प्रदेश के २३ जिलों के १५ हजार गांवों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है और लगभग ७५-८० हजार किसान बुरी तरह प्रभावित हुए है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा २५,००० मेट्रिक टन गेह की निःशुल्क आपूर्ति प्रभावित किसानों को की जानी चाहिए, ताकि अगले छह महीनों तक किसानों के परिवार अपना जीवन निर्वाह कर सकें। सांसदों ने प्रधानमंत्री को बताया कि गत वर्ष अगस्त सितम्बर माह में राजस्थान में आई अप्रत्याशित बाढ एवं अतिवृष्टि से भारी जान माल का नुकसान हुआ था। राज्य सरकार ने अगस्त २००६ में राष्ट्रीय आकस्मिक आपदा कोष से विशिष्ट राहत पैकेज के रुप में २४१० करोड रुपये तथा ८७५ करोड रुपये बाढ प्रभावित लोगों के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण कर राहत पुनर्वास कार्यों के लिए मांगे थे। इस संदर्भ में प्रदेश की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने भी आपसे व्यक्तिशः मुलाकात कर राज्य के प्रस्ताव पर त्वरित निर्णय करने का आग्रह किया था, लेकिन ३२८५ करोड की मांग के एवज में केन्द्र सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में अब तक मात्रा २४० करोड रुपये की सहायता राशि दी गई है जिससे प्रदेश में असंतोष है। सांसदों ने कहा कि वर्ष २००० में निर्धारित केन्द्रीय राहत कोष (सी.आर.एफ.) एवं राष्ट्रीय आकस्मिक आपदा कोष (एन.सी.सी.एफ.) द्वारा दी जाने वाली सहायता के मापदण्ड पुराने हो चुके हैं। जिनमें संशोधन किए जाने की आवश्कता है। इन मापदण्डों का वर्ष २००५ में पुनर्निधारण होना था और निर्धारित समिति ने नए सुझावों सहित अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार के समक्ष लगभग एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत कर दी है किन्तु केन्द्र सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है जो कि सर्वथा अनुचित एवं पीडित किसानों के हितों के खिलाफ है। पूर्व मानकों के अनुसार ओलावृष्टि से हुए नुकसान के लिए फसल खराब होने की स्थिति में असिंचित भूमि पर १००० रुपये प्रति हेक्टयर एवं सिंचित भूमि पर मात्र २००० रु० प्रति हेक्टेयर की दर से इनपुट सब्सिडी देने का प्रावधान है, जबकि उपज की वास्तविक लागत ८ से १०,००० रुपये प्रति हेक्टेयर आती है। सांसदों ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि सहायता मापदण्डों के पुर्ननिर्धारण हेतु बनाई गई समिति द्वारा सुझाई गई अनुशंषाओं को तुरन्त प्रभाव से लागू करना चाहिए,ताकि किसानों को गैर सिंचित भूमि पर हुए नुकसान के एवज में ३००० रुपये प्रति हेक्टेयर एवं सिंचित भूमि के लिए ७००० रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिल सके। सांसदों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि सहायता दिलवाने के लिए निर्धारित दो हेक्टेयर की सीमा को हटवाया जाना चाहिए क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को संपूर्ण जीविका बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। सांसदों ने ओलावृष्टि प्रभावित किसानों का पक्ष रखते हुए कहा कि रबी की फसल में बिजली एक बडी लागत होती है और प्रति किसान को लगभग १५ से २० हजार रुपये रबी की फसलों के लिए बिजली मद पर व्यय करने पडते हैं। उन्होंने मांग की कि ओलावृष्टि से फसल के नुकसान की स्थिति में बिजली के व्यय को भी केन्द्रीय सहायता कोष एवं राष्ट्रीय आकस्मिक सहायता कोष द्वारा इनपुट लागत के रुप में शामिल करना चाहिए।
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