दलित चेतना यात्रा जैसलमेर रवाना, उरमूल सरकिल तक रैली निकाली khabar Bikaner Hindi Bikaner News, Bikaner Latest News, Bikaner Hindi News, Bikaner English News, Business News">
सदियों से दबा कुचला प्रत्येक गरीब दलित ः गौड Bikaner Hindi News : khabarexpress.com : The news portal of North India
बीकानेर, १९ मार्च, पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों मे निकलने वाली दलित चेतना यात्रा बीकानेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर सोमवार अपराह्न स्थानीय अम्बेडकर सरकिल पहुंची। इस दौरान सभा आयोजित की गई तथा उरमूल सरकिल तक दलितों ग्रामिणों ने विशाल रैली निकाली। कासा राजस्थान के सौजन्य से यह चेतना यात्रा शांति मैत्री मिशन और अन्य संस्थाओं के साझा मंच राजस्थान विकास मंच द्वारा निकाली जा रही है। अम्बेडकर सरकिल पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए यात्रा के संयोजक और शांति मैत्री मिशन संस्थान के सचिव कपिल गौड ने कहा कि दलित का अर्थ किसी जाति विशेष से नहीं है। सदियों से सामाजिक से सामाजिक और जातीय व्यवस्था के कुचक्र में दबा कुचला प्रत्येक गरीब दलित का अर्थ किसी जाति विशेष से नहीं है। सदियों से सामाजिक और जातीय व्यवस्था के कुचक्र में दबा कुचला प्रत्येक गरीब दलित है लेकिन लोकतंत्र में उसे स्वतंत्रता से जीने का हक है। इस यात्रा का मकसद दलित को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागृत करना है। श्री गौड ने बताया कि यात्रा के दौरान अनुभव किया गया कि अनेक ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां भूमिहीन दलितो को वर्षो पूर्व का आबंटन हुआ परंतु उस भूमि का कब्जा उन्हें आज तक नहीं मिला है। कुछ दलितों को आधा अधूरा कब्जा मिला है और प्रभावशाली लोगो ने उनकी कृषि भूमि दबा रखी है। इन दलितों द्वारा पटवारी से लेकर तहसीलदार तक का दरवाजा खटखटाने के बावझूद फसल नष्ट होने का बहाना बनाकर प्रभावशाली लोग भूमि की पैमाइश के आदेश निरस्त करवा देते हैं। विडम्बना यह है कि खेत का कब्जा मिले बिना ही सरकार ने इन दलितों को जमीन के कागजात और पासबुकों के आधार पर ५०,००० से एक लाख रूपये तक का ऋण दे रखा है। ऐसी स्थिति में ये दलित किसी भी सूरत में कर्ज नहीं चुका सकते । विशिष्ट अतिथि गंगानगर के एड्वोकेट जगदीश नायक ने कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं, संपूर्ण मानवता के मसीहा थे। उन्होने भारतीय संविधान का निमार्ण प्रसव की तहर समूची सामाजिक व्यवस्था को अनुभूत करके किया है। डॉ. अम्बेडकर निम्न वर्ग से जरूर थे परन्तु वे उच्च वर्ग के लिए आदर्श और प्रेरणा के पुंज बने । अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पत्रकार अशोक माथुर ने कहा कि सदियों से शोषित और पीडत दलित के साथ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी भेदभाव बरता जाता है। आजादी मिलने के छह दशकों बाद भी यह स्थिति सोचनीय है। दलित वर्ग के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी ही चाहिए। उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए यह यात्रा प्रभावी भूमिका निभाएगी क्योंकि पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के लोगों को रोटी, कपडा और मकान के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी प्राथमिक सुविधाएं भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सभा में उपस्थित जनों को खिंयेरा के नरसाराम, उदयासर के भैराराम, जैतपुर के गोरू राम, सामाजिक कार्यकर्ता मोहनी देवी, जितेन्द्र शर्मा, इन्द्र राव आदि ने संबोधित किया । संस्था का परिचय सुमन ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन लूणकरणसर के ओम प्रकाश नायक ने किया। सभा के समापन पर अम्बेडकर सरकिल से उरमूल सरकिल तक दलित चेतना रैली निकाली गई जिसमें बडी संख्या में ग्रामिण शामिल थे। यात्रा के आगे ढोल के डंके और बांकिये की धुन पर ग्रामिण युवक नाच रहे थे। कार्यकर्ताओं ने हाथों में यात्रा के नारों की तख्तियां ले रखी थीं । आगे के वाहन पर चार घोडे की मूर्तियां तथा अम्बेडकर का आदमकद चित्र लगा था। के.ई.एम. रोड, जूनागढ के आगे से होती हुई यह रैली उरमूल सरकिल पर पहुंची जहां से यात्रा खींचन गांव के लिए रवाना हुई।