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गेर-शिल्पा चुम्बन मामले पर प्रतिक्रिया ने लिया नया मोड, एक इस्तगासा और दायर National Hindi News : khabarexpress.com : The news portal of North India
बांसवाडा, १९ अप्रेल २००७, गुरुवार गेर-शिल्पा शेट्टी चुम्बन मामले को बांसवाडा की अदालत में ले जाने को बांसवाडा के दो जागरुक नागरिकों अजीत कुमार जैन एवं गोविन्द भानु ने सस्ती लोकप्रियता पाने का हथकण्डा बताया है और कहा है कि इस तरह कानून का सहारा लेने के नाम पर कोर्ट एवं पुलिस का समय जाया करने वाले लोगों को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है।
इस बारे में गुरुवार को बांसवाडा के सीजेएम कोर्ट में पेश अपने इस्तगासे में इन दोनों प्रार्थियों ने बताया है कि नई दिल्ली में एड्स जागरूकता अभियान के दौरान सार्वजनिक रूप से अभद्र तरीके से चुंबन लेने के मामले में अभिनेत्री शिल्पा शेट्ठी, हालीवुड अभिनेता रिचर्ड गेर एवं सीना तान के उत्सव कार्यक्रम के आयोजक के खिलाफ उक्त मामले को बांसवाडा कोर्ट के श्रवणाधिकार क्षेत्र में मानते हुए न्यायालय में वकील के मार्फत बांसवाडा के ही एक जने द्वारा पेश इस्तगासे को गलत बताया है।
अजीत कुमार एवं गोविन्द भानु द्वारा पेश इस्तगासे में कहा गया है कि उक्त कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया था जिसका दिल्ली दूरदर्शन ने कोई सीधा प्रसारण नही दिखाया है और न ही पूर्व में इस कार्यक्रम को टी.वी. चेनल पर सीधा प्रसारण करने की कोई उद्घोषणा की गई थी। जबकि इस कार्यक्रम के आयोजन हो जाने के बाद टी.वी. चेनलों द्वारा इस आयोजन को समाचार के रूप में दिखाया गया है।
इसी समाचार को देख कर लोगों ने इसे सार्वजनिक रूप से अभद्र तरीके से चुंबन लेने का विरोध दर्ज कर विभिन्न स्थानों, शहरों में उनके पुतले जलाये गये। इस विवादित मामले को भी टी.वी. न्यूज चेनलों ने दिन भर अपने चेनलो पर दिखाया जाता रहा जिससे प्रेरणा लेकर पेश इस्तगासा सस्ती लोकप्रियता हांसिल करना ही है।
अजीत कुमार एवं गोविन्द भानु ने गुरुवार को इसके विरोध में पेश इस्तगासे में तर्क दिया है कि हिन्दुस्तान में एक अरब से अधिक लोग रहते हं।ै अगर उनमें से कई लाख लोगों ने इस कार्यक्रम को देखा होगा और उन्हे यह लगेगा कि सार्वजनिक रूप से अभद्र तरीके से चुंबन लेने से कानून का उलघ्न हुआ है और उनकी भावनाए आहत हुई हो तो वे जंहा के रहने वाले हैं वहां के न्यायालयों में इस मामले को आई.टी एक्ट की धारा ६७ एवं महिला अशिष्ट प्रतिरूपेण(प्रतिषेध) अधिनियम १९८६ की धारा ४-६ के तहत दर्ज करायेगें तो हिन्दुस्तान के कई न्यायालयों में इस एक ही प्रकरण में लाखों केस दर्ज हो जायेगे जिससे न्यायालयों एवं वहां की पुलिस महकमों का समय तो जाया(बेवजह बर्बाद) होगा साथ ही अपव्यय एवं फिजूल खर्च होगा पहले से तो हिन्दूस्तान के न्यायालयों में लाखों मामले लम्बित होकर विचाराधीन हैं और ऊपर से एक सस्ती लोकप्रियता हांसल करने के लिये इस प्रकार के बेतुके मामले न्यायालयों में दर्ज होकर समय की बर्बादी करेंगे।