डूंगरपुर 19 अप्रेल/ गांवों के सामाजिक और आर्थिक सुदृढीकरण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के प्रभावी निस्तारण की दिशा में अभिनव प्रयासों के क्रियान्वयन की राज्य सरकार की महत्त्वकक्षी सोच के अनुरूप ही आदिवासी बहुल डूँगरपुर जिले में जिला प्रशासन ने लोक कल्याणकारी योजनाओं को मूर्त रूप देते हुए ही कई अभिनव योजनाओं का सूत्रपात किया है। इन्ही प्रयासों के अन्तर्गत जिले की जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक उत्थान की विविध योजनाओं के सार्थक क्रियान्वयन और क्षेत्रीय खुशहाली की विकास दर में वृद्घि के लिए समस्त विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों में निचले स्तर तक समन्वय स्थापित कर जिला कलक्टर कुमारी मंजू राजपाल का ग्राम्यजनों से संध्याकालीन संवाद और समस्या समाधान की चौपाले आयोजित करने का प्रयास यहां के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम जनों को भी बेहद रास आ रहा है ।
दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर संपन्न हो चुकी जिला कलक्टर की चौपालों ने ग्रामवासियों को जहां कई समस्याओं से मुक्ति प्रदान की है वहीं इन चौपालों के आयोजनों से आधारभूत साधन-सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित अधिकारी भी किसी भी स्तर पर अपने कार्य में कमी छोडना नहीं चाह रहे है।
दूसरी तरफ इन चौपालों के आयोजनों से आम तौर पर अपनी समस्याओं को मुखरित करने में हिचकने वाले ग्रामीणजन भी जिला कलक्टर की चौपालों पर अपनी व गांव की समस्याओं पर प्रभावी अभिव्यक्ति देने लगे है और ग्रामवासियों को भी सही मायने में लोकतंत्र के विचाराभिव्यक्ति के अधिकार की स्वतंत्रता का अहसास होने लगा है।
जिला कलक्टर ने जिले में अपने पदस्थापन के पश्चात मुख्यमंत्री शिक्षा संबल महाअभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान गांवों को समस्याओं से जकडे देखा और ग्रामवासियों से इनके समाधान के लिए संवाद की आवश्यकता महसूस हुई। बस फिर क्या था। तुरत फुरत ग्राम पंचायतों के नियमित संध्याकालीन भ्रमण और चौपालों पर बैठकर समस्त विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति में संवाद और समस्या-समाधान का सिलसिला प्रारंभ हुआ जो अनवरत जारी है।
जिला कलक्टर अब तक जिले की ग्राम पंचायत इन्दौडा, माडा, वैंजा, खेडा आसपुर, गामडी अहाडा, चारवाडा, गोल, गलन्दर, गन्दवा, जालुकुआ, करावाडा, सकानी, भेहणा, पाडली गुजरेश्वर , अमृतिया, करावाडा, दामडी, धावडी, झौंथरी, सरोदा, जोगपुर, आंतरी, बोडामली, रेंटा, निठाउवा, लोडावल आदि में अपनी चौपालों का आयोजन कर चुकी है और संवाद और समस्या समाधान का सिलसिला आज भी जारी है।
गांव कस्बों पर गांव की आम समस्याओं के साथ-साथ जिला कलक्टर की प्रभावी प्रशासनिक पकड और ग्रामीण समस्याओं को समूल नष्ट करने की प्रतिबद्घता की प्रशंसा करते स्थानीय वाशिन्दें भी नहीं थकते है।
चौपालों में केवल ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के समाधान ही नहीं अपितु इनमें जिल से जुडी कई समस्याओं का भी प्रभावी ढंग से निस्तारण हो रहा है। अनियमित विद्युतापूर्ति या पेयजलापूर्ति हो चाहे राशन वितरण से संबंधित समस्या, नहरों के सीपेज की परेशानी हो चाहे विद्यालयों में अध्यापकों का अभाव, सरकारी कर्मचारी के व्यवहार से तकलीफ हो चाहे जनप्रतिनिधियों द्वारा सुनवाई न किए जाने की पीडा, प्रत्येक समस्या पर गांव की चौपाल पर कलक्टर की मौजूदगी में चर्चा होती है, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से जवाब तलब के बाद होता है समस्या का निराकरण।
इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय भूमि पर अतिक्रमण के साथ-साथ आधारभूत साधन सुविधाओं की उपलब्धता में आ रही कठिनाईयों के निराकरण में ग्रामवासियों की भूमिका द्वारा समाधान के प्रयास करने में भी यह चौपालें मददगार साबित हुई है। केवल समस्याओं के समाधान ही नहीं अपितु सरकार द्वारा चलाई जा रही लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करने में भी इन चौपालों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है। ग्रामवासियों से संवाद के दौरान समस्या विशेष के समाधान के लिए संबंधित विभागीय अधिकारी को जिला कलक्टर द्वारा इस संबंध में सरकार की योजनाओं और इस हेतु पात्रता की शर्तों का उल्लेख करने को कहा जाता है जिससे संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ अन्य जनों को भी योजना के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो जाती है। जिला कलक्टर स्वयं कई समस्याओं के समाधान पर सरकार की योजनाओं में प्रावधान को बतलाती है और समाधान के प्रयासों को सुझाती है।
इसके अलावा जिला कलक्टर द्वारा विभिन्न विभागीय मासिक समीक्षा बैठकों में भी जिले म संचालित हो रही विभागीय गतिविधियों से लाभान्वित हो रही आम जनता और विभागीय अधिकारियों को ग्रामीणजनों को राहत प्रदान करने के प्रयासों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही ग्राम पंचायतों की चौपालों पर प्राप्त होने वाली समस्याओं पर भी विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देश प्रदान किए जाते है जो कि समस्या समाधान के प्रति सकारात्मक प्रयास है।
जिला कलक्टर द्वारा इन बैठकों को ज्यादा से ज्यादा सार्थक बनाने को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किये गये हैं। समय-समय पर इन बैठकों में जन प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित कर उनसे क्षेत्र की समस्याओं, विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति, सुझावों आदि पर चर्चा की जाती रही है।
निश्चय ही जिला कलक्टर की ग्रामीणजनों की समस्याओं के समाधान के लिए इस अभिनव योजना के सूत्रपात से जहाँ इस आदिवासी क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण को बल मिल रहा है वहीं क्षेत्रीय विकास की धाराओं के तेज होते प्रवाह से हर आम व खास व्यक्ति को सुकून की सांस प्राप्त हो रही है।
संध्याकाल है उपयुक्त संवाद के लिए संध्याकाल को उपयुक्त इसलिए माना गया ताकि स्वयं जिला कलक्टर व विभागीय अधिकारियों के कार्यालयी कार्य बाधित न हो और समस्त ग्रामवासी भी सांझ ढले अपने दैनन्दिन और कृषि कार्योंं से निवृत्त हो समय दें सके। जिला कलक्टर की सोच और समस्याओं के प्रभावी निराकरण की पहल हर गांव के लिए वरदान साबित हो चुकी है और दिन ब दिन इन चौपालों में एकत्र होने वाले ग्राम्यजनों की तादाद भी बढती जा रही है।
जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति भी जरूरी जिला कलक्टर ने अपने संध्याकालीन भ्रमण दौरान ग्रामीणों की आम समस्याओं से संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को स्वयं मौके पर मौजूद रहने के निर्देश प्रदान कर रखे है। इसके तहत जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक व माध्यमिक, जिला रसद अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक के साथ ही संबंधित क्षेत्र के ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यक्रम अधिकारी , उपखण्ड अधिकारी, विकास अधिकारी, तहसीलदार और ग्राम पंचायत क्षेत्र के समस्त सरकारी कर्मचारियों को मौजूद रहने को पाबन्द किया गया है। इन सबकी उपस्थिति से समस्याओं के समाधान में त्वरितता होती है।
अप्रेल माह की शेष संध्याकालीन चौपालें
जिला कलक्टर मंजू राजपाल द्वारा अप्रेल माह की प्रस्तावित 10 संध्याकालीन चौपालों में 4 चौपाले शेष है। इसके तहत 21 अप्रेल को भेमई में, 23 को कोचरी में, 25 को भासौर में तथ 27 अप्रेल को काहेला में कलक्टर ग्रामीणजनों से रूबरू होंगी और समस्याओं के समाधान के संबंध में दिशा निर्देश प्रदान करें