बांसवाडा, १९ अप्रेल /बांसवाडा जिले में निजी स्कूलों और इनसे जुडे किताब, कापियों और स्टेशनरी विक्रेताओं द्वारा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी पुस्तकों और सहशैक्षिक सामग्री आदि पर छपी हुई कीमत पर कई गुना अधिक मूल्य का स्टीकर चिपका कर बडी चालाकी के साथ बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ खुली धोखाधडी की जा रही है।
जिले भर में शिक्षा को व्यवसाय का केन्द्र बनाकर संचालित हो रहे ज्यादातर शिक्षालयों के प्रबन्धकों द्वारा शिक्षा के नाम पर बच्चों का जबर्दस्त शोष् ाण किया जा रहा है।
इस बारे में बांसवाडा जिले के बुद्धिजीविय एवं विभिन्न संस्थाओं ने मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे को भिजवाए ज्ञापनों में बताया गया है कि निजी शिक्ष् ाण संस्थाओं ने जिले में खुली लूट मचा रखी है और कई गुना ज्यादा कीमत वाले छपे हुए मूल्य स्टीकर चिपका कर शिक्षा की आड में धोखाधडी का खुला खेल चल रहा है।
ज्ञापनों में बताया गया है कि जिला प्रशासन, उपभोक्ता संगठन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से बांसवाडा जिले में यह कारोबार लम्बे समय से चल रहा है और जिले के विद्यार्थी तथा उनके अभिभावक अब तक करोडों की ठगी के शिकार हो चुके हैं।
ज्ञापनों मं बताया गया है कि निजी स्कूलों ने शिक्षा के नाम पर अपने खुद के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित कर लिए हैं जहां से विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, रजिस्टर, ड्रैस, टाई-बैल्ट, टिफिन, डायरियां, बैग्स, पानी की बोतलों सहित तमाम जरूरी सामग्री की बिक्री मनमाने दाम पर जारी है।
ज्ञापनों में बताया गया है कि इन निजी शिक्षालयों द्वारा शिक्षा की आड में पैसा बनाने का गोरखधंधा लम्बे समय से बेरोकटोक चल रहा है।
ज्ञापनों में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि बांसवाडा जिले में निजी स्कूलों की किताबों व अन्य सामग्री की धडल्ले से जारी बिक्री रोकी जाए तथा सभी निजी विद्यालयों द्वारा बच्चों को दी गई पुस्तकों, कॉपियों व अन्य सामग्री की जच की जाकर अधिक वसूली राशि बच्चों तथा अभिभावकों को लौटायी जाए।
इस बारे में प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम को ज्ञापन भिजवाए गए हैं जिनमें बांसवाडा जिले की निजी स्कूलों द्वारा पाठ्य सामग्री के नाम पर की जा रही लूट-खसोट के बावजूद आंकडों में फेरबदल कर लाभ छिपाने तथा बिक्री कर म छूट एवं चोरी जैसे हथकण्डों की बारीकी से जांच कराने की मांग की गई है।
ज्ञापनों में स्थानीय बिक्री कर एवं आयकर से जुडे अधिकारियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।