मांगों को लेकर किसान हुए उग्र, एसडीएम कार्यालय में तोड-फोड
19 May
2008
विभिन्न मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आक्रोशित होकर एसडीएम की जीप व कार्यालय के कूलर को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को कार्यालय से बाहर खींचने का प्रयास किया गया, स्थिति काफी तनाव पूर्ण हो गई।
सूरतगढ से विकास यादव
सूरतगढ, विभिन्न मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आक्रोशित होकर एसडीएम की जीप व कार्यालय के कूलर को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को कार्यालय से बाहर खींचने का प्रयास किया गया, मगर पुलिस दल ने बीच-बचाव कर लोगों के प्रयास को नाकाम कर दिया। इससे स्थिति काफी तनाव पूर्ण हो गई। हालांकि पुलिस अधिकारियों की मशक्कत तनाव को कम हो गया, मगर किसानों एसडीएम को बंधक बनाकर कार्यालय के बाहर बेमियादी पडाव शुरू कर दिया। यकायक हुई इस घटना से जिले की पुलिस व प्रशासन के अधिकारी हरकत में आ गये हैं।
किसान व्यापारी मजदूर संघर्ष समिति के पूर्व आह्वान पर सोमवार सुबह 11 बजे संयोजक राजेन्द्र भादू की अगुवाई में पूरे तहसील क्षेत्र से सैकडों की तादाद में महिला-पुरुष एसडीएम कार्यालय के समक्ष एकत्रित हुए। दोपहर तक कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष रामनारायण सुथा की अध्यक्षता में सभा चलती रही। दोपहर करीब डेढ बजे संयोजक श्री भादू ने एसडीएम कार्यालय की तरफ कूच का आह्वान किया। देखते ही देखते सैकडों की तादाद में भीड नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय परिसर में जमा हो गई। हालांकि मौके पर तैनात पुलिस जवानों व अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कार्यालय के भीतर नहीं घुसने दिया। इस बीच गेट के पास आये उपखण्ड अधिकारी रामदेवसिंह बेनीवाल को आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने बाहर खींचने का प्रयास किया। मगर पुलिस दल ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। स्थिति भांपते हुए एसडीएम बेनीवाल तुरंत अंदर चले गये। भीड के बीच खडी एसडीएम की जीप पर हमला कर लोगों ने शीशे तोड दिए। बताया जाता है कि भीड ने चालक को जीप बीच में से हटाने के लिए कहा था, मगर चालक ने कहा कि चाबी नहीं है। इस पर भीड में शामिल कुछ जनों ने जीप के शीशे तोड दिए। कार्यालय का कूलर भी क्षतिग्रस्त कर दिया। तनावपूर्ण स्थिति के चलते पुलिस उपाधीक्षक नाजिम अली खान ने राजियासर थाना प्रभारी सहित अतिरिक्त जाब्ता बुला लिया। एसडीएम करणसिंह ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर संघर्ष समिति के राजेन्द्र भादू व प्रवक्ता मदन ओझा से वार्ता की। मगर भादू ने स्पष्ट कहा कि वे आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे। मांगें एडीएम के बस की नहीं होने पर वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद भादू ने बेमियादी पडाव डालने की घोषणा कर दी। आक्रोशित महिला पुरुष एसडीएम कार्यालय के आगे जमे हुए हैं और एसडीएम बेनीवाल को बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है।
भादू ने कहा कि उपखण्ड अधिकारी रामदेवसिंह बेनीवाल की हठधर्मिता के कारण तहसील का हर किसान परेशान है और इसी कारण आज किसानों का आक्रोश मुखर हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शीघ्र चार सूत्री मांगों पर विचार नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम शासन व प्रशासन को भुगतने होंगे। इससे पहले हुई सभा को राजेन्द्र भादू सहित सरपंच देवीलाल सहारण, परमजीत सिंह रंधावा, साहबराम पूनियां, बलराम वर्मा, वेदप्रकाश कडवासरा, ब्लॉक महासचिव विजयसिंह ताखर, प्रभुदान गेदर, मदन ओझा, छतरसिंह, जसवंत नायक, काशीराम मेघवंशी, भैराराम मंगलराव, छतरसिंह, संदीपसिंह राठौड, प्रभुराम बालोदिया, बलवंतराम वर्मा आदि ने सम्बोधित किया। वक्ताओं ने राज्य सरकार पर सिकानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि आज भाजपा राज में हर वर्ग परेशान है।
ये है मांगें
चार सूत्री मांगों में सिंचाई व पेयजल समुचित मात्रा में उपलब्ध करवाने, नरेगा में लगे श्रमिकों को सौ रुपये मजदूरी तय करने, फसल बीमा कम्पनियां द्वारा बीमा क्लेम तुरन्त दिलाने तथा पाळा प्रभावित फसलों की दुबारा गिरदावरी कर तत्काल मुआवजा करवाने की मांग शामिल है।
महिला थी ज्यादा आक्रोशित
संघर्ष समिति के प्रदर्शन में भीड के मामले में खूफिया तंत्र व पुलिस प्रशासन के आंकडे फैल हो गये। भीड काफी ज्यादा जुट गई। महिलाओं की तादाद भी सैकडों में थी। महिलाओं का गुस्सा पूरे परवान पर था। उन्होंने खूब खरी-खरी सुनाई। महलाओं का आक्रोश शांत करने में नेताओं को भी काफी जोर आया।
एसडीएम द्वारा पुलिस की शिकायत
सूरतगढ। एसडीएम कार्यालय में हुए हंगामे के लिए उपखण्ड अधिकारी रामदेवसिंह बेनीवाल ने पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कलेक्टर को शिकायत की। एसडीएम ने कलेक्टर को दूरभाष पर बताया कि पुलिस बल कम होने के कारण यह हंगामा हुआ है। उधर पुलिस अधिकारियों ने एसडीएम के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पर्याप्त पुलिस बल नहीं होता तो घटना कोई भी रूप ले सकती थी। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि पुलिस बीच-बचाव नहीं करती थी तो एसडीएम के साथ हाथापाई भी हो सकती थी।
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