जयपुर। ऊर्जा मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने बिजली की वर्तमान कमी को अस्थाई बताया है और इंजीनियरों को किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न आक्रोश को कम करने के लिए क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर कार्य करने को कहा है। सिंह बुधवार को शासन सचिवालय में विद्युत कंपनियों के अधिकारियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित कर रहे थे। सिंह ने कहा कि नई विद्युत इकाइयों के आने में कुछ देरी हुई है और बरसात कम होने तथा गर्मी अधिक पडने से 200 लाख यूनिट प्रतिदिन की मांग बढ गई है। कोटा ताप बिजलीघर की सातवीं इकाई में आज शाम से उत्पादन प्रारंभ हो गया है तथा सूरतगढ की छटी इकाई के भी कल सवेरे से प्रारंभ होने की पूरी संभावना है। ऐसी आशा है कि अगस्त माह में ही नई इकाइयों के आने से स्थिति काफी हद तक सुधर जाएगी। सिंह ने किसानों को चार से पांच घंटे बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए अधिकारियों से कहा कि वे कोई भी समस्या आने पर जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उन्हें विश्वास में लें। साथ ही उन्होंने कहा कि छीजत निरंतर कम करने के प्रयास जारी रखे जाएं। बजट में घोषित ग्राम पंचायत विद्युत वितरण योजना को ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हने इसके शीघ्र क्रियान्वयन पर जोर दिया। इसके तहत 33 केवी के सब स्टेशन स्थापित करने के लिए उन्होंने पंचायत समिति वार मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि छीजत में बढोत्तरी अथवा बिजली आपूर्ति में व्यवधान के लिए जवाबदेही तय की जाए। बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमत पांडेय ने फीडर सुधार अभियान के बचे हुए कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि पिछले कुछ समय से इसमे आई ढिलाई आगे नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने पंचायत विद्युत योजना की क्रियान्विति का रोडमैप तैयार करके जुट जाने का आग्रह किया। विशिष्ठ सचिव ऊर्जा नरेशपाल गंगवार ने इस योजना की क्रियान्विति के लिए प्रसारण तंत्र को आवश्यकतानुसार सुदृढ करने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। विद्युत वितरण निगमों के अध्यक्ष आर.जी. गुप्ता ने बताया कि इस योजना में 33 केवी के 800 नए जीएसएस बनाए जाएंगे जिससे किसानों को आठ घंटे बिजली देने की तैयारी पूरी हो सके। कांफ्रेंस में प्रदेश के अधिकारियों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया जिसका समाधान किया गया।