जयपुर। जोधपुर जिले में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सितम्बर माह तक के लिए 661 लाख 19 हजार रुपये की राशि का कंटीजेन्सी प्लान बनाया गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा ने मंगलवार को जोधपुर में आयोजित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की बैठक में पेयजल व्यवस्था और अकाल की स्थिति में पीने के पानी के प्रबंधन पर विचार विमर्श करते हुए इस कन्टीजेन्सी प्लान की समीक्षा की। मदेरणा ने कहा कि मानसून के कमजोर होने की स्थिति में राज्य में पीने के पानी की समस्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। हालंकि मानसून का समय अब भी शेष है और हम वर्षा के लिए आशावादी भी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पेयजल व्यवस्था को पहली प्राथमिकता में रखते हुए राज्य के जिलों के लिए 213 करोड की राशि का सितम्बर माह तक के लिए कंटीजेन्सी प्लान बनाया है जिसमें जोधपुर जिले के लिए 6 करोड 61 लाख 19 हजार रुपये का प्रावधान रखा है। इसमें शहर क्षेत्र में टयूबवैल व पाईप लाइन के लिए 26 लाख 50 हजार तथा ग्रामीण क्षेत्र के लिए 6 करोड 34 लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 57 नलकूप, 15 किलोमीटर पाईप लाईन, पम्पों को बदलना व अन्य कार्यों को इस कंटीजेंसी प्लान में करवाया जाएगा। मदेरणा ने कहा कि राज्य सरकार पानी की व्यवस्था के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं आने देगी और पेयजल की प्राथमिकता में भी कोई भेदभाव नहीं होगा। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है और निर्देश दिए है कि प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र में अपनी अभिशंषा पर तीस हैण्डपंप लगवा सकेंगे। हैण्डपंप की संभावना वाले क्षेत्र नहीं है वहा के विधायक को पेयजल व्यवस्था के लिए अभिशंषा पर तीस लाख रुपये तक की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि प्राचीन परम्परागत जलस्त्रोतों की मरम्मत करवाने के लिए भी नरेगा में कार्य करवाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पेयजल व्यवस्था के लिए माइक्रोस्तर पर राज्य सरकार कार्यवाही करना चाहती है। इसलिए जिला कलेक्टर स्तर पर कार्य योजना बनाने के अधिकार दिए गए है ताकि जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर क्षेत्रीय जरूरत के मुताबिक पेयजल योजनाओं के कार्य हो सकें। जिला कलेक्टरों को दिशा निर्देश दिए गए है कि वे जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर उनका सहयोग लेवें और ऐसी ठोस नीति व कार्य योजनाएं बनाएं जिससे आमजन को राहत मिले। उन्होंने कहा कि काम ऐसा होना चाहिए जिसमें बदलाव नजर आए। बैठक में सांसद श्रीमती चन्द्रेश कुमारी ने दूरस्थ ढाणियों में पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि पीने के पानी की योजनाओं का ऑगमेंटेशन होना चाहिए और गांवों व स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था कायम हो इसकी कोशिश होनी चाहिए। इसमें यदि उनके सांसद कोष से राशि की आवश्यकता हो तो उसका प्रावधान किया जा सकता है। जिला प्रमुख श्रीमती अमिता चौधरी ने कहा कि अकाल की स्थिति में पूर्व में ही कार्य योजना बनायी जानी चाहिए तथा जो योजनाएं चल रही है उनको गति दी जाएं। गिरदावरी में आकलन सही हो तथा अधिकारी जनप्रतिनिधियों के संपर्क में रहे। जिला कलेक्टर नवीन महाजन ने बताया कि जिले में पिछले दस सालों में औसतन 290 मिमी वर्षा हुई है मगर इस मानसून में अब तक इससे बहुत कम वर्षा हुई है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर कहा कि पेयजल परिवहन में निर्धारित सीमा से हटकर जरूरत के मुताबिक आपूर्ति करने का प्रावधान होना चाहिए। बैठक में विधायक बाबूसिंह राठौड एवं कैलाश भंसाली सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किये।
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