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नारी श्रद्धा एवं पूजा की पर्यायवाची-दादी जानकी
19 Aug 2009

नारी शरीर को विज्ञापनबाजी के लिए जिस निर्दयता से प्रदर्शित किया जा रहा है वह शर्मनाक है।


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आबू रोड, 19 अगस्त, निसं। ब्रह्माकमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि अतीत में सोने की चिडिया कहलाने वाले भारत देश में नारी के नित्य प्रति घटते सम्मान चिन्ताजनक है। इस धरा पर नारी सदैव श्रद्धा एवं पूजा की पर्यायवाची मानी जाती थी। लेकिन ज्यों-ज्यों धर्म और मूल्यों की गलानि हुई यह भाव घटता जा रहा है। वे परमात्म शक्ति अनुभूति वर्ष के सन्दर्भ में मूल्यनिष्ठ समाज की स्थापना में परमात्म शक्ति का योगदान विषय पर आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन में देश भर से आये सर्व धर्म के लोगों को सम्बोधित कर रही थी।

 आगे दादीजी ने कहा कि आज नारी शरीर को विज्ञापनबाजी के लिए जिस निर्दयता से प्रदर्शित किया जा रहा है वह शर्मनाक है। देश की आजादी से पूर्व सिंध प्रान्त में भी पांच साधुओं को भोजन करवाने के बाद परिवारजन भोजन ग्रहण किया करते थे लेकिन समय की रफ्तार ने सभी मान-मर्यादाओं परम्पराओं को कूडेदान में फेंक दिया। धर्म की गलानि के साथ पापाचार, भ्रष्टाचार और भौतिक साधनों के प्रति लालसा बढी है। वर्तमान में पैसा प्रधान हो गया, पोजीशन बनाने व दिखाने के लिए लोग गलत साधनों से पैसा बटोरने में लगे हुए हैं। इसी कारण भ्रष्टाचार भी दिन ब दिन Dadi Jaanki and other guest lights the lamp of Sarvdharm Sammelan held at Brahma Kumar Ashram, Mount बढता जा रहा है। आशीवर्चन के दौरान दादीजी ने सिख समुदाय की पावन पुस्तिका सुखमनी साहिब के कुछ अंशों को भी उदघृत किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्म ठगी, काम, क्रोध, लोभ अंहकार से मुक्ति पाने की प्रेरणा व नसीहत देते हैं। संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने भी इन्हीं बुराईयों से मुक्त वायुमण्डल विकसित करने पर बल दिया।

 मनुष्य अपने कर्मों से ही धर्मात्मा या महात्मा और दानी कहलाता है। एक बात स्पष्ट है कि तन के दायरे में सिमट कर कोई भी व्यक्ति महान नहीं बन सकता। महानता के लिए देहाभिमान से ऊपर उठना होगा।

प्रज्ञान पुरी मिशन के सचिव सम्पूर्णानन्द ने कहा कि मातृभाषा और नारी के सम्मान में गिरावट के साथ-साथ भारत में अनुशासन, स्नेह, सदाचार व परोपकार का भी हनन हुआ है। राम, बुद्ध और गांधी के देश की दुर्दशा के प्रति चिंतित धर्मानुजों को एक साथ चलना होगा। स्वार्थों को तिलांजलि देकर किये गये सामूहिक प्रयासों से ही देश की दशा बदलेगी।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद डॉ॰ महेशचन्द्र शर्मा ने कहा कि मूल्यों पर प्रहार विदेशी शक्तियों के साथ-साथ हमारे अन्दर विकार भी भर रहे हैं। समय आ गया है कि आध्यात्मिक नेतृत्व ऐवा कवच प्रदान करें जिससे समाज में मूल्यों की पुनर्स्थापना सम्भव हो। ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यक्रम से निश्चित तौर पर मानवता को अब पराजित नहीं होने की शक्ति प्रदान होगी। संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि महात्मा गांधी सरीखे महापुरूषों ने हमें आजादी दिलाते हुए रामराज्य की स्थापन की जो कल्पना की उसे साकार करना अभी बाकी है। भले ही भारतवासी भगवान की जितन वंदना करते हैं  उतनी किसी अन्य देश में नहीं की जाती। फिर भी मनुष्य पांच विकारों के वशीभूत होने के कारण इस देश की स्थिति निरंतर चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका ब्र॰ कु॰ मनोरमा ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति के मुटठी में एक अदृश्य भय व्याप्त हो गया है। हमारे सामने यक्ष प्रश्न यह है कि मानवता चौराहे पर रो रही है, नारी को देवी माननेवाले इस देश में अखबारों को पन्ने पर नारी के शोषण के समाचारों से लबरेज नजर आते हैं। रक्षक ही भक्षक बन गये हैं। इसलिए हमें एक ऐसा रास्ता तलाशना होगा जिससे इन कुरीतियों से मुक्ति पायी जा सके।

इस अवसर पर सच्चा अध्यात्म आश्रम इलाहाबाद के स्वामी डॉ॰ चन्द्रदेव ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में तो मात्र राजनीतिक उठापटक की चर्चा होती है लेकिन ज्ञानसरोवर में केवल स्नेह, सदभाव और सदचार की चर्चा सुनकर पुनः यह विचार जागृत हो रहा है कि मनुष्य जब पावन विचारों की चर्चा से अपने को ओतःप्रोत करेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब प्रत्येक बच्चा राम और कृष्ण कहलायेंगें।

स्वामीनारायण गुरूकुल वलसाड के स्वामी एलएम शास्त्री ने विकास के साथ मूल्यों को बढावा देने की वकालत की। गुरूसिंह सभा लुधियाना के सचिव राजेन्द्र सिंह बत्रा ने कवितामयी शुभकामनायें दी। कार्यक्रम का संचालन ब्र॰ कु॰ कुन्ती ने किया तथा सभी का धन्यावद ज्ञापन प्रभाग के मुख्यालय संयोजक ब्र॰ कु॰ रामनाथ ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुम्बई की नन्हीं बालिका श्रद्धा ने भारतनाटयम प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया।




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