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| 03 December 2008 |
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शिवबाडी के लालेश्वर महादेव मंदिर मठ के अधिष्ठता संवित सोमगिरी ने कहा कि है ‘ऊं‘ से सारे वेद निकलते है, जिनमें से एक आयुर्वेद भी शामिल है बीकानेर, सोमगिरी शुक्रवार को आयुर्वेद विभाग द्वारा मेडिकल कॉलेज मैदान में आयोजित ‘विशाल आयुर्वेद मेले (आयुष 2008) के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह मेला दोपहर बारह बजे से रात नौ बजे तक 23 सितम्बर तक चलेगा। उन्होंने सृष्टि क्रम के बारे में कहा कि ब्रह्म मूहर्त में उठने से मनुष्य को प्राकृतिक वातावरण से सुकुन मिलता है। इसका हमारे वेदों में भी उल्लेख है। उन्होंने स्वस्थ जीवन का मूल मंत्रा में आहार चर्या को बताया। सोमगिरी ने आजादी के कुछ वर्ष पहले तक हमारे देश में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विशिष्ठ वैद्यों के पास थी और गांव-गांव में इसके साधनों को अपना कर व्यक्ति स्वस्थ रहता था। प्रतंत्रा भारत में न केवल आयुर्वेद चिकित्सा हमसे दूर हुई बल्कि शिक्षा,शासन एवं पर्यावरण भी दुषित होता गया। उन्हने कहा कि महाभारत काल में भी आयुर्वेद चिकित्सा उन्नति के शिखर पर थी। वेदों में इसका उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का दर्शन वेदों में मिलता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद औषधियों का उत्पादन हो और यह लोक मंगल की दृष्टि से किया जाना चाहिए। पर्यावण को नुकशान पहुंचाने के लिए औषधीय वनों को कटाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शल्य चिकित्सा पर कार्य करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर विभाग के अतिरिक्त निदेशक (तकनीकी)मदन मोहन शर्मा और उपनिदेशक बीकानेर महेश चन्द्र शर्मा ने मेले के उदे्श्यों पर प्रकाश डाला। सहायक निदेशक बसंत उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया और डा.नरेन्द्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। कुमारी अनुपम शर्मा ने सरस्वती वन्दना की। इससे पहले सवित सोमगिरी ने फीता काटकर और भगवान धन्वतरि के चित्रा पर पुष्प अपर्ति कर मेले का शुभारंभ किया। मेले में सुबह साढे छह बजे से साढे आठ बजे तक योगाचार्य विजय त्रिापाठी योग विधा सिखायेगे। सांय सात बजे से आठ बजे तक आयुर्वेद विद्धानों द्वारा आयुर्वेद पर व्याख्यान होंगे। मेले में उदयपुर और जयपुर आयुर्वेद संस्थाओं के प्रोफेसर क्रमशः महेश दीक्षित और औम दाधिच अपनी सेवाएं रहे है। इसके अलावा बून्दी भीलवाडा से भी आयुर्वेदाचार्य भी रोगियों को परामर्श दे रहे है। मेले में आयुर्वेद दवा उत्पादक और विक्रेताओं ने अपनी स्टाल लगाई है। पाईल्स, भंगदर और फिशर रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक उपचार करने के साथ इसकी विधियों के बारे में बता रहे हैं। मेला स्थल पर विशाल पण्डाल में आयुर्वेद, युनानी एवं होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति की स्टालों में चिकित्सक अपने से संबंधित चिकित्सा प्रणाली की लोगों को जानकारी दे रहे है। चिकित्सक उनके पास आए रोगियों को उपचार संबंधी परामर्श देने और कौन सी दवा लेनी चाहिए के बारे में बता रहे है। भारतीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर द्वारा लगाई गई स्टॉल में चिकित्सक संस्थान की गतिविधियों की जानकारी प्रचार साहित्य के माध्यम से कर रहे है। सरस पार्लर की स्टॉल पर ऊंटनी के दूध से बने उत्पादों की मधुमेह रोग के उपचार में भूमिका के बारे में जानकारी देने के साथ तैयार उत्पाद का विक्रय भी की जा रही है। एक अन्य स्टाल पर वैद्य नरेन्द्र शर्मा ने आयुर्वेद में पंचशील पद्धति के माध्यम से असाध्य रोगों का उपचार करने की विधियों और इसमें उपयोग में आने वाली मशीनों की जानकारी देने के साथ ही उपचार भी कर रहे है। विभिन्न पोस्टरों एवं बैनरों में आयुर्वेद शिक्षा-तनाव से रक्षा,तनाव मुक्ति के लिए आयर्वदीय तरीके अपनाने,एक आवंला रोज खाएं और बुढापे को दूर भगाये, सीमित, नियमित, संतुलित एवं हितकारी आहार लेने और एक गिलास दूध,छाछ व पानी -जीवनभर बनी रहे जवानी आदि संदेश से आयुर्वेद चिकित्सा का संदेश दे रहे है। इस अवसर पर संभाग सहित प्रदेश के अन्य जिलो ंसे बडी संख्या में वैद्य उपस्थित थे।
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