रेलवे से संबंधित महिलाओं के केंद्रीय कल्याण संगठन (आरडब्लूडब्लूसीओ) ने आज महिला दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री के.सी. जेना ने कहा कि आरडब्लूडब्लूसीओ देश के अग्रणी स्वयसेवी संगठनों में से एक है। उन्होंने कहा संगठन का प्राथमिक लक्ष्य रेलकर्मियों और उनके परिवारों का कल्याण है लेकिन संगठन ने वक्त पडने पर समाज की मदद की है और इसके साथ ही रेलकर्मियों के परिवार वालों, बच्चों और महिलाओं के कल्याण का काम किया है। उन्होंने उन महिला रेलकर्मियों को सम्मानित भी किया जिन्होंने शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने भारतीय रेलवे से संबंधित उन बच्चों को भी प्रशंसा की जिन्होंने अखिल भारतीय चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कार जीते हैं। इस अवसर पर ३२ महिला रेलकर्मियों और ४५ मेधावी बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना शोवना नारायण ने कहा कि महिलाएं शक्ति का प्रतीक होती हैं और वे समाज को बदलने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा भारतीय दर्शन में भी महिलाओं के महत्त्व को रेखांकित किया गया है। कन्या भ्रूणहत्या और कन्याओं के साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए सुश्री शोवना नारायण ने कहा कि इस तरह के कार्यों के खिलाफ महिलाओं को खुद आगे आकर विरोध करना चाहिए। रेलवे द्वारा कला और खेल को प्रोत्साहन दिए जाने की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक खिलाडी दिए हैं।
१९८६ में कायम आरडब्लूडब्लूसीओ हर साल १९ नवंबर को प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्मदिवस के उपलक्ष में महिला दिवस का आयोजन करता है। इस दिन आरडब्लूडब्लूसीओ न्नसी न्न और न्नडी न्न वर्ग की चुनी हुई महिला रेलकर्मियों का सम्मान करता है। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को नैतिक बल प्रदान करना है जिन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी लगन, समर्पण, साहस और अडिग रहकर कार्य किया। उन चुनी हुई महिला रेलकर्मियों का भी सम्मान किया जाता है जो अस्पताल, स्कूल, खेल, रक्तदान, परिवार कल्याण कार्यक्रम, स्काउट व गाईड, आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया हो।