राष्ट्रपति ने हिंदी विद्वानों को सम्मानित किया
19 Dec
2007
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हिंदी भाषा के विकास एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी विद्वानों को वर्ष 2005 और वर्ष 2006 के पुरस्कारों से सम्मानित किया।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हिंदी भाषा के विकास एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी विद्वानों को वर्ष 2005 और वर्ष 2006 के पुरस्कारों से सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में कई गैर हिन्दी भाषी विद्वान भी शामिल हैं जिन्होंने हिन्दी के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राष्ट्रपति भवन के अशोक हाल में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति ने प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए वर्ष 2005 का गंगाशरणसिंह पुरस्कार डॉ. आर. वेंकटकृष्णन, केएम सामुवल, फुराइलात्पम, गोकुलानंद शर्मा और एच. पहलीरा नवनीत आर ठक्कर और सुतीक्ष्ण कुमार शर्मा को प्रदान किया।
वर्ष 2006 के गंगाशरणसिंह पुरस्कार से प्रो. शेख मुहम्मद इकबाल डॉ. टीवी कट्टीमनी, प्रो. इंद्रनाथ चौधरी, शशिकांत रघुनाथ जोशी और विलास सोलू सर्लकर (संयुक्त रूप) को सम्मानित किया।
हिंदी पत्रकारिता तथा रचनात्मक साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए वर्ष 2005 के गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से भारत डोगरा और रमेश उपाध्याय तथा वर्ष 2006 के इसी पुरस्कार से शरद दत्त और रमणिका गुप्ता को विभूषित किया गया।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी साहित्य और उपकरण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए वर्ष 2005 के आत्माराम पुरस्कार से देवेंद्र मेवाड़ी और डॉ महेंद्र मधुप तथा वर्ष 2006 के इसी पुरस्कार से डॉ. खड्ग सिंह वल्दिया रेखा अग्रवाल एवं प्रदीप शर्मा को संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।
|