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वसुंधरा राजे ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में केन्द्र-राज्य के वित्तीय संबंधों के बारे में मूलभूत सवाल उठाए
19 Dec 2007

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने केन्द्र द्वारा दी जाने वाली सहायता का बडा भाग केन्द्र के मार्गदर्शन में ही खर्च करने की बाध्यता पर चिंता जाहिर की है। इस प्रवृति के कारण राज्य अपने स्वयं की जरूरत के अनुरूप योजना बनाने व लागू करने में सक्षम नहीं रहते हैं।


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जयपुर, १९ दिसम्बर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने केन्द्र द्वारा दी जाने वाली सहायता का बडा भाग केन्द्र के मार्गदर्शन में ही खर्च करने की बाध्यता पर चिंता जाहिर की है। इस प्रवृति के कारण राज्य अपने स्वयं की जरूरत के अनुरूप योजना बनाने व लागू करने में सक्षम नहीं रहते हैं। श्रीमती राजे ने सांसद विकास निधि और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से राज्यों को प्राप्त हो रहे ऋणों को केन्द्रीय सहायता कहने पर आश्चर्य व्यक्त किया।
राष्ट्रीय विकास परिषद् की बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री डाँ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता म आयोजित ५४वीं बैठक में श्रीमती राजे ने संघीय व्यवस्था में केन्द्र-राज्य के वित्तीय संबंधों के बारे में मूलभूत सवाल उठाए। इन संबंधों में केन्द्रीयकरण की प्रवृति के कारण आ रही क्रियात्मक बाधाओं पर केन्द्र का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें आम आदमी से सीधे संवाद करती हैं और दैनिक समस्याओं के लिये आम आदमी इनकी तरफ देखता है। केन्द्रीय सहायता का स्वरूप पूरे देश में एक जैसा होने के कारण स्थानीय समस्याओं का निराकरण राज्य द्वारा बनायी और लागू की गई योजनाओं से ही संभव है।
श्रीमती राजे ने कहा कि निर्बन्ध ;नदजपमकद्ध राशि के घटते जाने के कारण राज्य सरकारों की केन्द्र पर निर्भरता बढती जा रही है। अधिकतर केन्द्र प्रवर्तित, अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता एवं विशेष केन्द्रीय सहायता योजनाओं में राज्यांश की बाध्यता रहती है। इस दायित्व के कारण राज्य के साधनों में और कमी हो जाती है।
उन्होनें बताया कि कुछ केन्द्रीय योजनाओं के साथ विशेष शर्तें जुडी रहती हैं। इन शर्तों के कारण राज्य के प्रशासनिक अधिकारों में अप्रत्यक्ष कटौती होती है। गैर आयोजना मद में भी केन्द्रीय पर्यवेक्षण की प्रवृति को बढावा दिया जा रहा है। कुछ केन्द्रीय योजनाओं की राशि सीधी कार्यकारी संस्थाओं को दी जा रही है, इससे राज्य सरकारों की उत्तरदायित्वता पर सवाल खडा होता है।
मुख्यमंत्री ने मांग कि इस पंचवर्षीय योजना में राज्यों को दी जाने वाली नार्मल निर्बन्ध ;नदजपमकद्ध  केन्द्रीय सहायता की राशि कम से कम दो लाख करड रुपये की जाये। योजना सहायता का वर्गीकरण केवल केन्द्रीय योजना एवं नार्मल केन्द्रीय सहायता में ही किया जाये। केन्द्रीय कार्यक्रमों को धीरे-धीरे कम किया जाये।
उन्होंने मांग की कि गाडगिल फार्मूला को नवीन परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाये। योजना आयोग के उपाध्यक्ष एवं किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री की सह-अध्यक्षता मे एक समिति का गठन कर उपरोक्त बिन्दुओं पर उनकी सिफारिशों को इसी पंचवर्षीय योजना में लागू करने के लिये श्रीमती राजे, उडीसा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितिश कुमार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सयुंक्त रूप से इस संबंध में एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।
श्रीमती वसुंधरा राजे ने राज्य में हुये नवाचारों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ नवाचारों को भारत सरकार ने भी अपनाया है। गरीबी की रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिए राजस्थान में २००६ से ’पन्नाधाय बीमा योजना‘ लागू की गई है।  भारत सरकार द्वारा भी लगभग इसी तरह की योजना ’’आम आदमी बीमा योजना‘‘ के रूप में लागू की गई है। राज्य में २००४ से जारी ’मौसम बीमा योजना‘ के लाभों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ’कृषि बीमा योजना‘ में भी इसको शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य में सामाजिक क्षेत्रें में सेवा की गुणवत्ता और पहुंच को सुधारने के लिये ’’सोशियल सैक्टर वाइबिलिटी गैप स्कीम २००७‘‘ लागू की गई है। संभवतः देश में यह अपने किस्म का पहला प्रयास है। इसी प्रकार असंगठित कामगारों के लिये विश्वकर्मा पेंशन योजना लागू की गई है। राज्य में अपर प्राईमरी में पढने वाले बच्चों के लिये मिड-डे-मील योजना सभी विकास खण्डों में लागू की गयी है। भारत सरकार ने इसे केवल चिन्हित विकास खण्डों में ही लागू किया है।
श्रीमती राजे ने बताया कि राजस्थान में बालिकाओं में शिक्षा को बढावा देने के लिये यातायात वाउचर एवं साईकिल देने की योजना लागू की गई है। अनुसूचित क्षेत्रें में प्रतिभाशाली छात्रओं को स्कूटी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य बिजली के संकट से निकल कर अगले पांच सालों में अपनी जरूरत से अधिक विद्युत उत्पादन करने लगेगा। प्रदेश में फीडर सुधार कार्यक्रम लागू होने के बाद ऊर्जा की छीजत में अप्रत्याशित कमी आयी है।
बैठक में वित्त राज्यमंत्री श्री वीरेन्द्र मीणा, मुख्य सचिव श्री डी.सी. सामंत, प्रमुख वित्त सचिव श्री राजीव महर्षि, वित्त सचिव (व्यय) श्री सुभाष गर्ग, आयोजना सचिव श्री वी.श्रीनिवास, आवासीय आयुक्त श्री पी.के.आनंद एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।




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