जयपुर, १९ दिसंबर, २००७ राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालीन विकास की नींव रखते हुए निजी क्षेत्र में चार विश्वविद्यालयों की स्थापना के अध्यादेश जारी किए गए हैं। जयपुर, उदयपुर एवं झुंझुनू में स्थापित होने वाले इन विश्वविद्यालयों की स्थापना से राज्य में प्रत्यक्षतः ३५० करोड का निवेश होगा। चार विश्वविद्यालयों की स्थापना की पहल के साथ ही अभी निजी क्षेत्र म २१ और विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। चार नए विश्वविद्यालयों की प्रदेश में स्थापना से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से ५ हजार के करीब व्यक्तियों को प्राध्यापक एवं कर्मचारी के रूप में रोजगार प्राप्त होगा वहीं आरंभ में उच्च शिक्षा के वैश्विक पाठ्यक्रम के अन्तर्गत तीन हजार ६०० विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा। शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश के साथ ही वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप नए-नए कोर्सों के जरिए रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में उच्च शिक्षा के इन प्रयासों से राजस्थान शीघ्र ही देश ही नहीं अपितु विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर उभरेगा, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता।
राजस्थान में पिछले चार वर्षों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए विशेष प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य में उच्च शिक्षा का औसत राष्ट्रीय औसत से अधिक हो गया है। वर्तमान में राजस्थान का उच्च शिक्षा औसत ११ प्रतिशत हो गया है जबकि राष्ट्रीय औसत अभी भी ८ प्रतिशत का ही है। देश में औसतन ७७ हजार जनसंख्या पर एक महाविद्यालय है जबकि राज्य में ६३ हजार जनसंख्या पर एक महाविद्यालय है। भविष्य के आंकडों में राजस्थान का उच्च शिक्षा औसत और भी बढेगा। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि योरोप, अमेरिका एवं अन्य विकसित राष्ट्रों में उच्च शिक्षा का प्रतिशत अभी ४० प्रतिशत के करीब है।
वर्तमान सरकार जब सत्ता में आयी तब प्रदेश म ५२ उपखंड ऐसे थे जो महाविद्यालय विहीन थे। आज एक भी ऐसा उपखंड नहीं है जहां महाविद्यालय नहीं है। यही नहीं कालेज शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी राज्य सरकार द्वारा रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक पाठ्यक्रम को अधिकाधिक रूप में समावेशित करने की पहल की गयी है। इस पहल का ही परिणाम है कि कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए बडी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध हुए हैं। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में कालेज शिक्षा पाठ्यक्रम के अन्तर्गत १०० रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक पाठ्यक्रम सम्मिलित किए गए। विद्यार्थियों में औद्योगिक कुशलता विकसित करने के उद्देश्य से १० राजकीय एवं ४० निजी महाविद्यालयों में ज्ञान तंत्र की स्थापना भी की गई है। ‘ज्ञान तंत्र‘ का अर्थ है कम्प्यूटर के जरिये विश्व जानकारियों की महाविद्यालयों में उपलब्धता।
विद्यार्थियों में संप्रेषण एवं विश्लेषण योग्यता विकसित करने की दृष्टि से भी ७० से अधिक महाविद्यालयों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। लगभग सभी महाविद्यालयों में कैरियर काउन्सिलिंग एवं प्लेसमेंट सैल की स्थापना भी जहां की गई है वहीं सरकारी कालेज व्याख्याताओं के कार्यकौशल को विकसित करने की दृष्टि से प्रदेश के उच्च शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण अकादमी (हर्ट) की स्थापना भी पृथक से की गई है।
महाविद्यालय सुदृढीकरण के तहत प्रदेश में राज्य के ऐसे जिला मुख्यालय जहां पर कन्या महाविद्यालय नहीं थे, वहां कन्या महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में विशेष प्रयास किए गए हैं। प्रदेश के राजसमंद, सीकर, हनुमानगढ तथा धौलपुर जिलों में कन्या महाविद्यालय खोले जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए इन स्थानों पर राज्य सरकार द्वारा महाविद्यालयों हेतु निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के साथ ही भवन लागत का ५० प्रतिशत राज्य सरकार ने वहन करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार राजकीय कन्या महाविद्यालय झालावाड तथा राजकीय बिडला महाविद्यालय भवानीमंडी में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय प्रारंभ किया गया है। यहां यह गौरतलब है कि वर्ष २००३-२००४ में महाविद्यालयों में कन्याओं के नामांकन के मुकाबले २१.९ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। महाविद्यालयों में कन्या पंजीकरण वृद्धि दर अब १०.६३ हो गई है।
राष्ट्रीय उत्पादकता के सभी क्षेत्रें में काम करने वाले लोग तैयार करने में भी सर्वाधिक भूमिका उच्च शिक्षा की ही है। इसे ध्यान में रखते हुए राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा के जो प्रयास हुए हैं उससे प्रदेश की पृथक विशिष्ट पहचान बनी है। उच्च शिक्षा के अन्तर्गत पहले प्रदेश के महाविद्यालयों में जहां लगभग २ लाख विद्यार्थी ही पंजीकृत हुआ करते थे वहीं अब इनकी संख्या बढकर ३.५० लाख के लगभग हो गई है। विशेष रूप से इस दौरान छात्रओं के नामांकन में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पहले जहां ६८ हजार छात्रएं ही महाविद्यालयों में पढती थी अब यह संख्या एक लाख ४० हजार के करीब हो गई है। भीम (राजसमंद), महुवा (दौसा), उनियारा (टोंक) व जैतारण (पाली) में सार्वजनिक क्षेत्र के नये महाविद्यालय खोलने की भी पहल की गई है ताकि उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार सभी स्तरों पर हो। साथ ही महाविद्यालयों में समयानुरूप अध्ययन करने में नये विषयों का समावेश किया गया है । झुंझुनू के राजकीय महाविद्यालय को विज्ञान में स्नातकोत्तर स्तर पर क्रमोन्नत किया गया है वहीं लालसोट (दौसा) में कृषि महाविद्यालय प्रारंभ किया गया है। इसी प्रकार भीण्डर (उदयपुर) में पशुपालन महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की पहली की गई है। राज्य सरकार ने जन सहभागिता के आधार पर विज्ञान संकाय और महिला छात्रवास खोलने हेतु सभी राजकीय महाविद्यालयों को सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान की दिशा भविष्य की बेहतरीन संभावनाएं लिए हैं। निजी क्षेत्र में ४ नये विश्वविद्यालयों की स्थापना और २१ और खुलने जा रहे विश्वविद्यालयों के साथ ही उच्च शिक्षा में राज्य के विद्यार्थियों का विदेशों में ही नहीं अन्य राज्यों की ओर बडी संख्या में पलायन करने की प्रवृति पर भी रोक लगेगी। इससे बडे स्तर पर उच्च शिक्षा में निवेश का लाभ तो राज्य को मिलेगा ही साथ ही शोध एवं अनुसंधान की दिशा में भी एक प्रकार से नई सक्रांति की शुरुआत होगी। जाहिर है तब शिक्षा का स्तर भी यहां तेजी से बढेगा। ऐसे में उच्च शिक्षा का कल राजस्थान का होगा, इससे क्या कोई इन्कार कर सकता है ?