जलवायु परिवर्तन सम्मेलन शनिवार को बिना किसी आम सहमति के खत्म हो गया। हालांकि अमेरिकी प्रयास से भारत सहित तीन अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और अमेरिका के बीच उत्सर्जन कटौती पर कानूनी रूप से एक गैर बाध्यकारी समक्षौता हुआ जिसे ज्यादातर विकासशील देशों ने आत्मघाती करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।सम्मेलन में कोई आम सहमति नहीं बन पाई और अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रयासों से बेसिक देशों के साथ हुआ उनका समक्षौता भी विकासशील देशों ने नामंजूर कर दिया। सम्मेलन के शनिवार की सुबह खत्म होने पर डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स रासुमसेन ने बिना झिझक इस बात को स्वीकारा कि कोई आम सहमति नहीं बन पाई और कोई समझौता स्वीकार नहीं किया गया। कोपेनहेगन सम्मेलन में बराक ओबामा और आथिक रूप से उभरते चार देशों द्वारा तैयार प्रस्ताव को मानने से कई विकासशील देशों ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि यह जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का मसौदा नहीं हो सकता