वाणिज्य शिक्षा को वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप बनाया जाए -- प्रो.देवनानी khabar Regional Hindi Regional News, Regional Latest News, Regional Hindi News, Regional English News, Business News">
वाणिज्य शिक्षा को वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप बनाया जाए -- प्रो.देवनानी Regional Hindi News : khabarexpress.com : The news portal of North India
खबरएक्सप्रेस, शिक्षा राज्यमंत्री प्रो.वासुदेव देवनानी ने कहा है कि वाणिज्य शिक्षा एवं तत्संबधी पाठ्यक्रम को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
प्रो.देवनानी शनिवार को उदयपुर में मोहनलाल सुखाडया विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय में ग्लोबल कन्वरजेन्स एण्ड कॉमर्स एजूकेशन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व ग्लोबल विलेज के रूप में परिवर्तित हो गया है तथा आर्थिक उदारीकरण की लहर में नई परिस्थितियां बनती जा रही है। इसके साथ ही पडौसी देशों में आर्थिक व्यवस्था में भी हो रहे बदलाव के चलते परिस्थितिय बदली है।
उन्होंने कहा कि लेखा कार्य का जुडाव आज आम आदमी से रहता है। व्यक्तिगत, सामाजिक एवं राष्ट्रीय हित एक दूसरे से जुडे हुए हैं। विकसित देश विकासशील देशों की अनदेखी कर रहे हैं, ऐसे में करारोपण व्यवस्था पर विचार करना जरूरी हो गया है। साथ ही बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भी यहां आने से लेखांकन की पद्धति में बदलाव जरुरी है। इसके लिए युगानुरूप परिवर्तन लाएं तथा बाहर की पद्धति को देशानुरूप बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वाणिज्य शिक्षा एवं पाठ्यक्रमों के निर्धारण में वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट्स को भी भागीदार बनाया जाना चाहिए। जिससे वह पाठ्यक्रम अन्तर्राष्ट्रीय मानको के अनुरूप बन पाए। इसके लिए हर तीन वर्ष में पाठ्यक्रम की समीक्षा भी की जानी चाहिए तथा विश्वविद्यालय की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में भी इस पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए जिससे छात्र,समाज व देश हित की बात हो।
प्रो.देवनानी ने कहा कि आज छात्र के लिए डिग्री के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी अपडेट हो, यह जरूरी है। तभी हम वर्तमान परिस्थितियों में टिक पाएंगे। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में जो भी चीज उभर कर आएगी उसमें सरकार के स्तर पर जो भी कार्य होगा, उसे कराने का प्रयास किया जाएगा।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए मोहनलाल सुखाडया विश्वविद्यालय के उफलपति प्रो.बी.एल.चौधरी ने कहाकि अंकेक्षण एवं लेखा पद्धति की आज समाज में विशेष महत्ता है, इसके लिए चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट्स एवं वाणिज्यकर्मियों को समाज का विश्वास अर्जित किया जाना जरुरी है। उन्होंने कहा कि आज कर प्रणाली के मामलों में प्रत्येक व्यक्ति को सी.ए.की सेवाएं लेनी पडती है। इसके लिए जरूरी है कि वह विश्वासपात्र हो। उन्होंने वाणिज्य शिक्षा को प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में निरन्तर प्रेक्टिस किए जाने से अनुभव प्राप्त होगा, जो समाज के हित में रहेगा।
मोहनलाल सुखाडया विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउण्टेन्ट्स ऑफ इंडिया नईदिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को डॉ.वी.मुरली, टी.पी.घोष, कैलाश सोडानी, जी.सोरल ने भी संबोधित करते हुए वैश्वीकरण के युग में वाणिज्य एवं लेखा कार्य की उपादेयता पर प्रकाश डाला।
अंत में आभार विश्वविद्यालय के लेखा एवं सांख्यिकीय संकाय के विभागाध्यक्ष आर.एल.तम्बोली ने व्यक्त किया। इस मौके पर समस्त संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।