बसंत पंचमी के अबूझ सावे के मौके पर बुधवार को सावों की धूम रहेगी। दो महीने बाद शादी समारोह होने के कारण लोगों ने अपनों की शादियों की विशेष तैयारियां की है। मंगलवार को शहर में शादियों की रौनक साफ दिखाई दे रही थी। मलमास हटने के साथ ही मांगलिक कार्य आरंभ हो चुके है और बसंत पंचमी के अबूझ सावे पर कई जोड़े परिणय सूत्र बंधकर सदा के लिए एक-दूजे के हो जाएंगे। अबूझ सावा होने से शहर में शादियों की भरमार है, जिसके चलते लगभग सभी मैरिज हॉल और गार्डन बुक हो चुके हैं, तो बैंडबाजे वालों ने भी अपने बाजों को तैयार कर लिया है और शादी के तराने छेडऩे को तैयार है। मंगलवार को बाजारों में सभी दुकानों पर भीड़ रही, लोगों ने जमकर खरीददारी की कपड़े से लेकर सोने की दुकानों पर खासी भीड़ रही। भाषाओं में देववाणी संस्कृत भाषा का जन्म भी आज ही हुआ। ब्रह्मा की प्रथम श्रृष्टि आज ही से प्रारम्भ मानी जाती है। त्रिदेव में ब्रह्मा विष्णु महेश का मृत्युलोक में आगमन आज ही के दिन हुआ। इसलिए बसंत पंचमी को अबूज देव मुहूर्त भी माना जाता है। इस दिन सभी मांगलिक कार्य का शुभ दिन माना गया है। इनमें विवाह, देव गृह प्रवेश, नूतन वाहन, सभी प्रकार के छोटे से बड़े मुहूर्त का शुभ दिन है।ज्योतिष मत के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार भगवान भास्कर के गति क्रम दक्षिणायण हो छोड़कर उतरायण में होने की खुशी में मनाया जाता है। भगवान सूर्य की रश्मिया बसंत पंचमी से ही युवा अवस्था को प्राप्त होने लग जाती है, जो निरन्तर छह माह तक धूप में तेजी का सूचक बनती है। बारह राशियों में से छह राशियों पर इस उत्तरायण काल में एक-एक राशि में भ्रमण करते हुए छह माह का काल पूरा करते है।