रंग नहीं मन होता है लडकी का आधार: सारा खान
20 Apr
2008 भोपाल से मुंबई पहुंचने वाली और विज्ञापनों की दुनिया में पहले ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाली सारा को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि भोपाल जैसे शहर से टीवी और फिल्मों की दुनिया मुबई में भी उन्हें स्वीकार तो किया जाएगा पर इतनी जल्दी इतनी लोकप्रियता भी मिल जाएगी।
स्टार प्लस के धारावाहिक ' बिदाई:सपना बाबुल का ' की नायिका साधना बनी अभिनेत्री सारा खान के लिए यह जश्न मनाने का मौका हो सकता है। इसकी वजह है कि भोपाल से मुंबई पहुंचने वाली और विज्ञापनों की दुनिया में पहले ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाली सारा को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि भोपाल जैसे शहर से टीवी और फिल्मों की दुनिया मुबई में भी उन्हें स्वीकार तो किया जाएगा पर इतनी जल्दी इतनी लोकप्रियता भी मिल जाएगी। हालांकि मिस एमपी रही और भोपाल दूरदर्शन पर एंकर रहीं सारा के खाते में उनके तीन लोकप्रिय धारावाहिक भी हैं पर उनका मानना है कि स्कूल में किए गए नाटकों के बाद देखा गया अभिनेत्री बनने का सपना अब सच जो हो गया है। वे कहती हैं, 'हालांकि यह चुनौती भरा भी है।` पिछले पखवाड़े वे दुल्हन के लिबास में सजी धजी दिल्ली पहुँची तो लोग हैरान थे, बाद में पता चला कि वे तो अपने किरदार के अनुसार ये कपड़े पहनकर आई है।
प्रस्तुत है एक मुलाकात। आप ऐसी चुनौतियों के लिए तैयार है ?
हाँ, पहले मैं समझती थी कि मैं जिस तरह अपने प्रदेश में लोकप्रिय हूँ मुंबई में भी कोई दिक्कत नहीं होगी पर वहाँ जाने के बाद मुझे फिल्म और टीवी की दुनिया की हकीकत भी पता चला कि यहाँ काम करना ही नहीं काम पाना भी एक चुनौती है। खास तौर से छोटे शहरों से आने वाले लोगों के लिए ।
यानी मिस मध्य प्रदेश चुने जाने के बाद आपकी मंजिल तय नहीं थी?
शायद नहीं, पर जाहिर तौर पर फिल्में करना चाहती थी। लेकिन मैं चूंकि पहले से ही टीवी से जुड़ी थी सो मैंने पहले टीवी पर ही किस्मत आजमाने का फैसला किया।
आप तो पारंपरिक मुस्लिम परिवार की हैं तो परिवार का दबाव और कड़ा रूख भी आपके आडे आया होगा?
हाँ, पर मेरी माँ ने इसमें काफी मदद की। वे भोपाल में एक बुटिक चलाती हैं और मेरे पिता एक डॉक्टर हैं। हमारे घर में कोई लड़का नहीं है सो वे चाहते थे कि उनकी बेटियाँ बेटों से किसी तरह कम न रहे इसलिए जब बिदाई में चुनाव हो गया तो मैं बोरिया बिस्तर लेकर मुंबई आ गयी।
लेकिन कहा जा रहा है कि यह राजश्री की हिट फिल्म विवाह का ही टीवी रूपांतरण है ?
ऐसी बात नहीं है। इसकी कहानी किसी से प्रेरित नहीं है। बल्कि यह हमारे समाज की हर लड़की की सच्चाई है जो किसी से कही तो नहीं जा सकती पर उस कुंठा से हर लड़की या महिला कहीं न कहीं ग्रसित तो होती है।
साधना इस बात से कितना मेल खाती है?
साधना का चरित्र एक ऐसी सुंदर लड़की है जो अपने परिवार में अपने पिता के बगैर अपने मामा के यहाँ रह रही है और उसकी सांवली ममेरी बहन के साथ उसके संबध भी बहुत प्रगाढ़ हैं। लेकिन समस्या तब आती है जब दोनों के विवाह की तैयारियों के बारे में बात होने लगती है।
आप खुद भोपाल की हैं और यह कहानी एक और छोटे शहर आगरा की है आपको क्या लगता है कि यह तथ्य केवल छोटे शहरों तक ही सीमित है ?
नहीं, आगरा तो केवल प्रतीक मात्र है। यह एक ऐसी कहानी है जो कहीं भी हो सकती है।
साधना बनने के बाद अब आपके जीवन में क्या बदलाव आया ?
लोगों के बीच पहचानी जाने लगी हूँ। मुझे यकीन नहीं होता कि जो सपने मैंने देखे थे वे सच हो गए हैं।
टीवी पर आपने पहले कौन से शो एंकर किए थे ?
स्टाइल है तो लाइफ है, बॉलीवुड हंगामा और हम है तो क्या गम है।
यह रोजाना शो है आप अचानक बिजी हो गयी हैं ?
शायद, पर जब समय मिलता है तो खुद के बारे में सोचती हूँ ।
क्या सोचती हैं...?
यही कि पहले मैं हमेशा मस्ती और मजा करने वाली एक लापरवाह लड़की मानी जाती थी पर साधना के चरित्र की सादगी और उसके संस्कारों ने मुझे काफी अनुशासित बना दिया।
आप अभी अठारह साल की भी नहीं हैं और अपने शो में दुल्हन बन गयी हैं कैसा लगता है?
यह है तो रोमांचक पर उम्र के इस दौर में इसका अनुभव जरा चौंकाने वाला है। हाँ यह अलग बात है कि एक दिन दुल्हन बनना हर ल़डकी का सपना होता है।