बीकानेर, २० जुलाई। संभागीय आयुक्त ललित मेहरा ने कहा है कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान समुदाय, प्रधान व जन केन्दि्रत अभियान है, इसकी सफलता के लिए जन प्रतिनिधि, अधिकारी, स्वयं सेवी संगठन मिलकर ऐसा माहौल तैयार करें कि आम जन को यह समझ में आ जाए कि जल स्वच्छता व मानव स्वच्छता एक दूसरे के पूरक है। भारत सरकार वर्ष २०१२ तक देश के सभी जिलों को सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के दायरे में लाना चाहती है। इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
मेहरा शुक्रवार को सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान एवं स्वच्छता मिशन की ओर से आयोजित संभागीय कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लोगों को अभियान से जोडने के लिए स्थानीय जन प्रतिनिधियों, पंच व सरपंचों की बैठक जिला प्रमुख की अध्यक्षता में चारों जिलों में अगस्त के प्रथम पखवाडे में करवाई जाए। सभी को मिलकर ग्रामीण क्षेत्र में यह कल्चर विकसित करना होगा कि सम्पूर्ण स्वच्छता अपनाने से ही हमारे चारों ओर फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सकेगा। वैज्ञानिक शोध के आधार पर यह बात सामने आई है कि हमारे आस-पास फैलने वाली बीमारिय में लगभग ८० प्रतिशत बीमारियां जल व मल से फैलती है। साथ ही स्वच्छता की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण शिशु व मातृ मृत्यु दर अधिक होती है।
संभागीय आयुक्त ने कहा कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान सभी के जीवन की अनिवार्यता है। आंनदमय व स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिकाधिक शौचालय बने, लोग खुले में शौच नहीं करें इसके लिए ऐसे स्थान जहां शौच करते है, वहां होर्डिग्स लगाए जाएं तथा समझाइश की जाए कि खुले में लोग शौच नहीं करें। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार का कार्य स्थानीय भाषा में किया जाए। ऐसे चित्र के बडे पोस्टर लगाए जाए जिसमें खुले में शौच जाने के बाद किटाणुओं का फैलाव किस तरह होता है यह भी दर्शाया जाए। उन्होंने कहा कि परिवार के मुखिए की जिम्मेवारी है कि वह जलजनित बीमारियों को रोकने की दिशा में लोगों को समझाएं।
मेहरा ने कहा कि इस कार्य के लिए स्वयं सहायता समूह व सहकारी समितियों के माध्यम से उचित मूल्यों पर सेनेटरी के सामान ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध करवाए जाए। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों पर आम जन में जागरूकता है, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पूर्ण स्वच्छता को लेकर जितनी जागरूकता होनी चाहिए उतनी नहीं है। गांवों में कम मूल्यों पर आधुनिक तकनीक से शौचालय बन सकें इसका प्रदर्शन कर लोगों को समझाया जाए।
बैठक में बीकानेर के जिला कलेक्टर आलोक गुप्ता ने बताया कि जिले के सींथल व बरसिंहसर ग्राम को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला है। शीध्र ही बीकानेर की २० पंचायतों को निर्मल ग्राम बनाया जाएगा। इन चिन्हित २० गांवों के जन प्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों को समझाया जाएगा कि सभी घरों में जलबद्ध शौचालय का निर्माण हो। पेयजल स्त्रोतों के चारों ओर साफ सफाई रहे। जल स्त्रोतों के पास पानी की निकासी के लिए नाली बनाई जाए। भूजल पुर्नभरण के लिए सोखता गड्ढा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इन गांवों में स्वयं सेवी संस्थाओं व जन प्रतिनिधियों के साथ चौपाल पर बैठकें कर लोगों में यह भी विचार विकसित किया जाएगा कि घरों के अंदर व आस पास सफाई रहें, फलों व सब्जियों को खाने व बनाने से पहले अच्छी तरह धोए। वृक्षारोपण कर गांव का पर्यावरण बेहतर बनाएं।
जिला कलेक्टर श्रीगंगानगर भवानी सिंह देथा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों को मिलकर एक अभियान के तहत माहौल तैयार करें। जिला कलेक्टर हनुमानगढ श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने कहा कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान द्वारा किए जा रहे प्रचार-प्रसार में अब तक किए जा रहे तरीकों के अलावा अब जो होर्डिग्स व बैनर बनाए जाए उनमें समय-समय पर खुले में शौच करते समय होने वाली दुर्धटनाओं के बारे में बताया जाए। कई बार समाचार पत्रों में पढने को मिलता है कि शौच के समय जानवर द्वारा काटना, जमीन धसना आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में जो शौचालय बने है उनकी साफ सफाई की व्यवस्था नियमित की जाए। स्कूलों में पानी की समूचित व्यवस्था की जाए। जिला कलेक्टर चूरू अर्जुन मेघवाल ने कहा कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान में स्थानीय तौर तरीकों से बनने वाले शौचालय को बनाने की इजाजत दी जाए।
कार्यशाला में श्रीगंगानगर के जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील ने कहा कि शौचालय निर्माण में गरीबों को आर्थिक मदद अधिक दी जाए। ग्राम पंचायतों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले चिन्हित लोगों के अलावा जो गरीब है, उन्हें भी आर्थिक सहयोग दिया जाए। बीकानेर के उप जिला प्रमुख प्रेमसुख सहारण ने सम्पूर्ण स्वच्छता के लिए जन चेतना की आवश्यकता प्रकट की।
इस अवसर पर सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के कार्यकारी निदेशक हेमंत जोशी ने कहा कि सफाई रखी जाए तो बीमारियां पैदा ही नहीं होगी। बीमारियों का इलाज करवाने से तो अच्छा है उससे बचा जाए तो बेहतर है। इसके लिए हमें घर, परिवार व आस-पास में साफ सफाई रखनी होगी।
यूनिसेफ के कार्यक्रम अधिकारी पंकज माथुर ने अपने प्रदर्शन में बताया कि आज से ढाई हजार साल पहले चाणक्य ने धरती पर प्रदूषण व आम लोगों को स्वस्थ रखने के लिए हर घर में रसोई व शौचालय बनाने के लिए आदेश पारित किया। वर्षों पहले दी गइ चाणक्य की सीख आज भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम अधिकारी कुलीन देशमुख ने बताया कि अब तक राज्य में २३ ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला है। इसमें ११ ग्राम पंचायतों की सरपंच महिला है।
बैठक में चूरू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरज भान जैमन ने बताया कि चूरू में शौचालय सुविधा सहित ५२५६० परिवार है जबकि शौचालय सुविधा रहित परिवार की संख्या एक लाख ४९ हजार ४९४ है। वर्ष २००५-६ में बी.पी.एल. परिवारों के लिए ३६५६, ए.पी.एल. के लिए २९८१, विद्यालयों में ६८२ व आंगनबाडी केन्द्रांे में १६८ शौचालय बनाए गए। हनुमानगढ में व्यक्तिगत शौचालय ३१ हजार ६२१, विद्यालयों में १०४२, आंगनबाडी केन्द्रों में १२२ तथा १०० सुलभ शौचालय बनाए गए। इससे पूर्व संभागीय आयुक्त ललित मेहरा व जिला प्रमुख श्री गंगानगर पृथ्वीराज मील ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया।