जयपुर। पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री श्रीमती बीना काक ने कहा है कि जवाहर कला केन्द्र की तरह रविन्द्र मंच को भी विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सभी कला अकादमियों को एक छत के नीचे लाकर उसे हब का स्वरूप दिया जायेगा। श्रीमती काक आज यहां रविन्द्र मंच पर राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर की 50वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के उद्घाटन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप म बोल रही थीं। उन्होंने ऐसे कलाकारों को जो अपने मन के विचारों को पन्नों पर उकेर कर देश व विदेश में प्रदेश का नाम रोशन किया उन्हें बधाई देते हुए कहा कि मन की चीजों को पन्नों पर उकेरना बहुत बडी उपलब्धि है। श्रीमती काक ने कहा कि राज्य सरकार ने कला एवं कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए इस वर्ष अकादमी राशि को बढाकर दुगुना कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि कला अकादमियों को एक छत के नीचे लाकर कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाये। उन्होंने बताया कि जवाहर कला केन्द्र की भांति रविन्द्र मंच को भी विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह जवाहर कला केन्द्र परिसर में एक काफी हाऊस खुलने से वह जीवित हो गया उसी तरह रविन्द्र मंच भी जीवित हो, ऐसे कार्य किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि रविन्द्र मंच शहर के नजदीक होने के कारण यहां हम एक हब बनाना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख शासन सचिव एवं ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उमराव सालोदिया को निर्देश दिये कि वे शीघ्र इसके प्रस्ताव बनायें। श्रीमती काक ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री किसान होने के साथ एक कलाकार भी हैं और इसी कारण कला एवं कलाकारों के विकास के प्रति उनकी सकारात्मक सोच है। इसी सोच के फलस्वरूप मुख्यमंत्री ने अपने पूर्ववर्ती काल में स्थापित कलाकार कोष को पुनः जीवित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि इस कोष में वर्तमान में एक करोड रुपये हैं जिनका कलाकारों के काम में उपयोग किया जायेगा। उन्होंने इस अवसर पर स्वर्गीय राजीव गांधी की जयन्ती पर उन्हें श्रद्घांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं उनकी बदौलत ही आज राजनीति में हूँ। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए मैं हमेशा तत्पर रहूंगी। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने रविन्द्र मंच की आधुनिक कला दीर्घा में प्रदर्शनी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन एवं अवलोकन भी किया। इस अवसर पर ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उमराव सालोदिया ने कहा कि चित्रकला, मूर्तिकला, ललित कला या फिर कोई भी कला हो, वह मानव के रंगहीन जीवन में रंग भरती है। उन्होंने कहा कि ललित कला अकादमी कला के क्षेत्र में अपना हर संभव सहयोग देती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कला अकादमियों को एक छत के नीचे लाने के लिए आवश्यक प्रयास शुरू किये जा रहे हैं।