रंगारंग कार्यक्रमों से सजेगी डूंगरपुरवासियों की शाम 20 Nov
2007
मेरे उत्तर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की कर्मस्थली मेवाड की भूमि मुझमें ओज का संचार करती है, तो दक्षिण - पश्चिम में अवस्थित गांधी के गुजरात से आती हवाएं अहिंसा संदेशों का प्रसार कर मुझे शीतलता प्रदान करतीं हैं।
डूंगरपुर २० नवंबर/जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग द्वारा डूंगरपुर नगर के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित हो रहे पांच दिवसीय भव्य वागड महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकारों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सांगितिकी प्रस्तुतियों समां बांधा जाएगा।
जिला कलक्टर नीरज के. पवन ने बताया कि पर्यटन की दृष्टि से डूंगरपुर की राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बनाने के उद्देश्य से आयोजित वागड महोत्सव में इस बार आम जनों को राजस्थानी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए विभिन्न लोक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाएंगे। इसके अतिरिक्त पडौसी राज्यों की संस्कृति का दिग्दर्शन कराने वाले कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
उन्होंने बताया कि ‘ वागड महोत्सव‘ की प्रथम रात्रि लोक कलाकारों के नाम रहेगी। इसके तहत २१ नवंबर को लक्ष्मण मैदान में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के सहयोग से अहमदाबाद की स्माना बैन के दल द्वारा सिद्धी धमाल, राजेन्द्र बी रावल के द्वारा केरवा नो वेश प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रकार मानसा पंजाब के तरसेम कलहमी द्वारा पंजाबी भांगडा, चौरवाड (जूनागढ) के नरसीह पुना सेवरा द्वारा गरबा नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा।
कलक्टर पवन ने बताया कि भरतपुर के ललित चरकला द्वारा होली के अवसर पर किया जाने वाला प्रसिद्ध होली नृत्य व मयूर नृत्य किया जाएगा। बाडमेर के प्रसिद्ध लोककलाकार गाजी खां का कार्यक्रम, कालबेलिया नृत्य के दम पर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली प्रख्यात नृत्यांगना गुलाबो तथा अलवर के प्रसिद्ध भपंग वादक जफर खां मेवाती के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
महोत्सव की दूसरी संध्या को अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन आयोजित होगा जिसमें विनीत चौहान(अलवर), प्रताप फौजदार(मुम्बई), विष्णु सक्सेना(सिकन्दराबाद), संजय झाला(दौसा), मंजू दीक्षित(आगरा), रास बिहारी गौड(अजमेर), एकेश पार्थ(जयपुर), प्रवीण शुक्ल(दिल्ली) तथा पद्म अलबेला(अलीगढ) काव्य पाठ करेंगे।
जिला कलक्टर पवन ने बताया कि वागड महोत्सव की तीसरी संध्या होगी महाराष्ट्र के थाना से आए कलाकारों के दल ‘सृजन आर्ट‘ द्वारा शास्त्रीय व लोकसंस्कृति को प्रदर्शित करते कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाएंगे।
वागड महोत्सव में २४ व २५ की संध्या होगी सूरों के नाम जब भारत के उभरते हुए गायक अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। नई दिल्ली की ईवेन्ट मेनेजमेंट कंपनी बी टू इवेन्ट्स के माध्यम से सुप्रसिद्ध पाश्र्व एवं पॉप गायक हंसराज हंस क संगीत संध्या होगी तो २५ नवंबर की शाम को वॉयस ऑफ इण्डिया के माध्यम से अपनी पहचान बना चुके गुलाबी नगर के कलाकार तोषी एवं सुमीरा अयर द्वारा सांगितिकी प्रस्तुतियां देकर सुरों की बरसात की जाएगी।* विशेष लाईट एण्ड साउण्ड इफेक्ट
बी टू इवेन्ट्स के माध्यम से आयोजित हो रही हंसराज हंस, तोषी एवं सुमीरा अइयर के कार्यक्रमों का विशेष आकर्षण इसमें किया जा रहा लाईट शो रहेगा। बी टू इवेन्ट्स के मैनेजर डीपी चौहान ने बताया कि इस दौरान लाईट्स एवं साउण्ड के स्पेशल इफैक्ट्स विश्ेाष आकष् ार्ण के केन्द्र रहेंगे। इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही है। मैं डूंगरपुर ह, दक्षिणी राजस्थान के वागड अंचल का एक भाग।
मेरे उत्तर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की कर्मस्थली मेवाड की भूमि मुझमें ओज का संचार करती है, तो दक्षिण - पश्चिम में अवस्थित गांधी के गुजरात से आती हवाएं अहिंसा संदेशों का प्रसार कर मुझे शीतलता प्रदान करतीं हैं। मेरा सहोदर बांसवाडा माही के उस पार से अपनी हरियाली चादर ओढे प्रतिदिन प्राची में अरूणिमा का दर्शन कराता है। सोम, जाखम और सदानीरा माही का कल कल करता निर्मल - पावन जल मेरे रोम रोम में जीवन का संचार कर रहा है तो तन पर लहराती, बल खाती अरावली की ऊंची - नीची उपत्यकाएं मेरे सौन्दर्य को बहुगुणित करतीं हैं।
कृष्ण लीलावतार संत मावजी ने मेरी ही धरा पर कालिन्दी प्रतिरूपा सोम - माही के तट पर अवस्थित बेणेश्वर टापू पर धवल पूर्णिमा की रजत आभा में रास रचाया था। मावजी की वाणी आज भी मेरे रोम रोम को झंकृत करती आ रही है। मेरा सौभाग्य है कि गोविन्द गुरू जैसे महान संत ने मेरी धरा पर जन्म लिया। विश्व विख्यात पीर सैयद फखरूद्दीन मेरी ही गोद में अपने बन्दों की दुआएं कबूल करते हुए रहमत की बारिश कर रहे हैं।
शहादत की अनुपम उदाहरण अमर शहीद वीरांगना काली बाई मेरी ही कोख से जन्मी थीं तो सारी दुनिया को न्याय की सीख दने वाला डॉ. नागेन्द्र सिंह जैसा नायाब रत्न मेरी ही भूमि ने उगला था।
बेटियों को कोख में ही मार देने की दुष्प्रवृत्ति के विरूद्ध मैंने सदैव बेटियों को सम्मान दिया है। मेरी बेटियां मेरी धरोहर है। जिसका प्रमाण मेरी कोख में बेटों से ज्यादा पलती बेटियां हैं।
मेरी धरा पर बसने वाले जनजाति जन जब अपने त्यौहारों और उत्सवों पर ढोल की मदमस्त कर देने वाली थाप पर नृत्य करते हैं तो मेरा रोम रोम पुलकित हो उठता है। मेरा मन उनकी ताल के साथ झूमने लगता है।
सतरंगिनी परिधानों में सुसज्जित जनजाति बालाओं का मुक्त परिहास अभावों में भी प्रसन्न रहने का गूढ आध्यात्मिक संदेश प्रसारित करत प्रतीत होता है।
आज देश - विदेश से मुझे बधाइयां और शुभकामनाएं मिल रही है। मैं अपनी ७२५ वीं वर्षगांठ जो मना रहा ह। इन सात सदियों म मेरा व्यापक विकास और विस्तार हुआ है।
मेरे सपूतों ने अपने कठोर श्रम और मेधा के बल पर जो विकास किया है, वह गर्व करने लायक है। न केवल देश में अपितु दुनिया के कोने - कोने में अपनी प्रतिभा के बल पर सफलता हासिल कर रहे हैं।
यहां की जनता की यही विशेषता है कि सभी जाति और धर्म के लोग यहां पर बिना किसी भेदभाव, द्वेष और शत्रुता के पूरे सद्भाव और सौहार्द्र के साथ रहते आए हैं। कितना सूकून मिलता है मुझे यह देखकर।
कैसा सुन्दर दृश्य होगा जब संध्याकाल में गेप सागर की श्यामल जल राशि पर हजारों दीप झिलमिल - झिलमिल करते धरा पर अम्बर का दृश्य उपस्थित कर देंगे, निस्संदेह अद्भुत ! मैं तो अभी से रोमांचित हूं।
मेरी वर्षगांठ पर सभी लोग तरह तरह के आयोजन कर इसे अविस्मरणीय बनाने को तत्पर हैं, मैं इन सब का स्वागत व अभिनन्दन कर इनका आभार ज्ञापित करता ह।
मेरी सन्तानों को इस मौके पर आशीर्वाद देते हुए मैं इनके निरन्तर विकास की कामना करता ह। यहां की जनता सदैव प्रगति पथ पर बढती रहे, सदैव सद्भाव और समभाव बनाए रखे। सदैव प्रसन्न रहे। अपनी शांतिप्रियता और परोपकार की भावना से सारे विश्व में अपना नाम रोशन करे......। यही आशा, अपेक्षा, विश्वास और प्रार्थना है।