बीकानेर में महापौर व कॉरपोरेटर के चुनाव की सरगर्मी जोरों पर है। अब चुनाव में सिर्फ दो दिन ही शेष रहे हैं इसलिए जहाँ भी लोग मिल रहे हैं चाहे वह शादी का माहौल हो या चौक का धूणा बस एक ही सवाल सब के जुबान पर है कि किने जिता रिया हो ई बार और इस तरह शुरू होता है चुनाव पर बहस का सिलसिला जो कितना लम्बा चलेगा वो करने वाले भी नहीं जानते। सब अपने अपने हिसाब से अपने अपने प्रत्याशी को जीताने का प्रयास करते हैं और अपने अपने समीकरण प्रस्तुत करते हैं। बहस दर बहस और हार जीत इन सब के बीच में कब रात हो जाती है और मोबाईल फोन बजता है कि कब घर आ रहे हो तब ध्यान आता है कि यार आज दो एक बजगी है घरे जावणो ही पडसी। मतलब जाने की इच्छा तो नहीं है लेकिन जाना पडेगा।
इस बीच प्रत्याशी भी दिन रात एक किए हुए है और घर घर सम्फ कर रहे हैं तो कहीं उनका स्वागत हो रहा है तो कहीं मिठाईयाँ बाँटी जा रही है और कहीं कार्यालय खुल रहे हैं। प्रत्याशियों को पता ही नहीं चल रहा है कि कब रात हो जाती है और कब दिन। प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार वाले और रिश्तेदार भी पूरी तरह से चुनाव में लगे हुए है। अपने मिलने वालों को देखेते ही कहते हैं कि आपोरो ध्योन राखणो है अबके पेली बार थोने केय रेया हो, सो ध्योन राखिया। जबाब मिलता है मैं तो थोरा ही वोट हो शुरू सू थोरी पार्टी ने ही वोट देवता आ रैया हो थोने केवणे री जरूरत ही कोयनी मे तो खुद थोरे वास्ते वोट मोंग रेया हो। महापौर के एक प्रत्याशी की जो निर्दलीय है श्रीमान् शांतिलाल बैद की तबीयत खराब हो जाने पर काँग्रेस के भवानी भाई ने फोन कर पूछा है कि कैसे हो बैद जी और भाजपा के गोपाल गहलोत ने भी उनकी कुशलक्षेम पूछी है यही है बीकानेर की तहजीब और तमीज कि कोई गिला नहीं कोई शिकवा नहीं सब एक है और यही बात सबके मह पर अंत मे आती है कि चौफूली का नारा है जीते सो हमारा है।
पाट पर ताश खेलते लोग हो या रेलवे क्रॉसिंग पर फंसे लोग सब के जेहन में एक ही बात है कि अगला महापौर कौन होगा और सब जानते ही कोई हो है तो हमारे ही चाहे जय भवानी हो या जय गोपाल जी।