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आतंकवाद की रोकथाम के लिए टाडा और पोटा जैसे कानून की जरूरत- मुख्यमंत्री

20 Dec 2007
मुख्यमंत्री ने अजमेर की दरगाह में हाल ही में हुए विस्फोट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आग्रह किया कि इसकी सुरक्षा व्यवस्था राज्य सरकार को दी जानी चाहिए।
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जयपुर, २० दिसम्बर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने आतंकवाद को आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बडा खतरा बताते हुए सुझाव दिया है कि इसकी रोकथाम के लिए टाडा और पोटा जैसे सख्त कानूनों की जरूरत है।
श्रीमती राजे गुरूवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री डाँ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रही थी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारे कानून आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में पूर्णरूपेण सफल नहीं हो पा रहे हैं। अतः राज्य की कानून व्यवस्था को देखने वाली एजेंसियों को और अधिक मजबूत किए जाने की जरूरत है। श्रीमती राजे ने कहा कि आतंकवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बडा खतरा है और इसकी रोकथाम कडे कानून और केन्द्र व राज्यों के संयुक्त प्रयास के बिना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अजमेर की दरगाह में हाल ही में हुए विस्फोट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आग्रह किया कि इसकी सुरक्षा व्यवस्था राज्य सरकार को दी जानी चाहिए। दरगाह परिसर में और अधिक गहन सुरक्षा इंतजाम किए जाने अपेक्षित हैं। वर्तमान में वहां केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त मैनेजमट कमेटी है।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से राजस्थान में आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का मुददा भी अभी तक अनिर्णीत है। ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान किए जाने के मापदंडों व फीस संरचना में केन्द्र सरकार द्वारा अप्रेल २००५ में परिवर्तन किये गये थे। इसी तरह बंगलादेशी व्यक्ति भी लम्बे समय से राजस्थान में अवैध रूप से रह रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। इनके निर्वासन की वर्तमान प्रक्रिया बहुत ही जटिल व धीमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय मतदाताओं का चुनाव आयोग द्वारा तैयार आंकडों से ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करवाया जाना चाहिए, ताकि अवैध रूप से रह रहे विदेशी व्यक्तियों की व अन्य संदिग्धों की तुरंत पहचान हो सके।
श्रीमती राजे ने बताया कि राजस्थान की पाकिस्तान से सटी १०४० किमी लम्बी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है जो कि बहुत संवेदनशील है। इस क्षेत्र में मुनाबाव खोखरा पार रेल लिंक शुरू होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से जटिलताएं भी बढी हैं, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दोनों तरफ के लोगों में संस्कृति, धर्म व पारिवारिक बंधनों में समरूपता व निकटता पाई जाती है। सीमा पार आवाजाही बढने से प्रदेश में विध्वंसात्मक तत्वों की गतिविधियों पर कडी नजर रखने की चुनौती बढ गई है। 
उन्होंने बताया कि संगठित अपराधों को प्रभावी रूप से रोकने के लिए समीचीन कानून संरचना वाला एक ड्राफट राज्य सरकार ने केन्द्र को दो वर्ष पूर्व भेजा था। बाद में ’दि प्रिवेन्शन ऑफ एंटीसोशिएल बिल‘ भी राष्ट्रपति की सहमति हेतु एक वर्ष पूर्व भेजा गया था, किन्तु दोनों अभी तक पास नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने स्तर पर आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों का डट कर मुकाबला कर रही है, क्योंकि सुरक्षा व शांतिपूर्ण वातावरण में ही अच्छा आर्थिक विकास हो सकता है। राज्य तीव्र औद्योगिकरण व आर्र्थक विकास के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि वे राज्य को पुलिस सुदृढीकरण आदि के लिए पर्याप्त सहयोग प्रदान करे और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को विशिष्ट वैधानिक प्रावधानों से मजबूत करे, ताकि सामाजिक सुरक्षा व अखंडता को चुनौती देने वाले तत्वों को बढावा न मिले।
उन्होंने बताया  राजस्थान कानून और व्यवस्था की दृष्टि से देश के श्रेष्ठतम प्रदेशों में शामिल प्रदेश है। हमने संवेदनशील और त्वरित प्रशासन द्वारा समयानुकूल निर्णय लेकर कानून व व्यवस्था के संतुलन में बाधक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।
श्रीमती राजे ने बताया कि चालू वर्ष में पुलिस-जनसंख्या अनुपात, जो वर्ष २००४ में वर्ष १९९८ के १३२ प्रति लाख जनसंख्या के मुकाबले कम होकर १०६ प्रति लाख जनसंख्या रह गया था। वह पुनः बढ गया है। राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म रैंक में रिक्त पदों को भरने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। प्रदेश में जून, २००८ तक सभी रिक्त पद भर लिए जाने का अनुमान (जीरो वकेंसी पोजिशन) है। चूंकि पुलिस स्टेशनों को श्रेष्ठ व मजबूत बना कर ही पुलिस सेवा को बेहतर बनाया जा सकता है। अतः राज्य सरकार ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है जो पुलिस स्टेशनों पर पुलिस बल की आवश्यकता का आंकलन करेगी। इस समिति द्वारा लगभग २१ हजार पुलिस बल बढाने की सिफारिश पर गहनता से विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पुलिस पर खर्च किए जाने वाले बजटीय प्रावधान में लगातार बढोतरी कर रही है। जहाँ वर्ष २००४-०५ में पुलिस हेतु ८२२.४६ करोड रूपये का बजटीय आवंटन किया गया था, वह वर्ष २००५-०६ में ८६३.८२ करोड रूपये, वर्ष २००६-०७ में ९१२.१७ करोड रूपये और वर्ष २००७-०८ में १००७.५४ करोड रूपये हो गया।
उन्होंने बताया कि राज्य विशेष शाखा और इंटेलिसेंस विभाग को मजबूत करने के लिए भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इंटेलिजेंस विभाग में एक तकनीकी यूनिट और चार काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट्स का गठन किया गया है। इस विभाग में नियुक्त पुलिस बल को परर्फोमेंस आधारित १० प्रतिशत प्रोत्साहन भत्ते के अलावा १० प्रतिशत वेतन भी दिया जाता है। १० लीटर प्रतिमाह ईंधन भत्ता भी दिया जाना तय हुआ है।
श्रीमती राजे ने बताया कि प्रदेश में आतंकवादी व अन्य संगठित हिंसा, अपराधों से निपटने के लिए पुलिस की विशिष्ट इकाई कार्य कर रही है। प्रदेश में एक स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप
कार्यरत है जो आतंकवादी एवं अन्य संगठित अपराधों से संबद्ध गतिविधियों पर नजर रखता है। राज्य में विभिन्न स्थानों पर एमरजेंसी रेसपोंस समूहों को तैनात किया हुआ है जो आतंक विरोधी आपरेशन्स में हथियार आपूर्ति करते हैं। उन्हें उच्च तकनीकी विशेषज्ञों से प्रशिक्षित करवाने के प्रस्तावों पर तेजी से विचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ’क्षमता निर्माण‘ पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। राज्य पुलिस द्वारा एम.आई.टी व अन्य एजेंसिंयों के साथ मिलकर सभी पुलिस बलों को १० जिलों में बांटकर संकेदि्रत कर एक कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। राजस्थान पुलिस अकादमी में अन्वेषण तकनीकों में गुणवत्ता मुक्त प्रशिक्षण दिलवाने के लिए एक केन्द्र की स्थापना की गई है।
श्रीमती राजे ने बताया कि झालावाड में नया पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया है और बी.पी.आर.वी.डी. की वित्तीय सहायता से किशनगढ (अजमेर) में भी एक पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाने का प्रस्ताव है। प्रदेश के कुछ पुलिस स्टेशन आई.एस.ओ. प्रमाण पत्र और पूरे देश और एशिया में सर्वश्रेष्ठ पुरुस्कार पाने वालों में शामिल है।
श्रीमती राजे ने कहा कि आतंकवादी हिंसा के अन्वेषण हेतु पृथक से कोई एजेंसी स्थापित करने का प्रस्ताव लाभदायक सिद्ध नहीं होगा। उन्होंने आतंकवादी हिंसा का अन्वेषण करने की शक्तियों के नियम सुपरिभाषित करने की राय दी और जोर देकर कहा कि केन्द्रीय एजेंसी के समवर्ती ज्यूरिडिक्शन की कोई आवश्यकता नहीं है।
श्रीमती राजे ने कहा कि गैर संगठानात्मक गतिविधियां कानून के उदार स्वरूप का फायदा उठाकर फलती-फूलती हैं। अपराधियों को जमानत देने में सख्ती, कठोर सजा व स्पेशल फास्ट ट्रैक अदालतों में त्वरित निर्णय द्वारा माफिया गिरोहों पर अंकुश लगाया जा सकता है और कानून के हाथ मजबूत किये जा सकते हैं। कानून को सामाजिक परिवर्तनों के अनुरूप गतिशील होना पडता है। हमारे देश के कानून अपेक्षाकृत स्थिर हैं जबकि यू.एस.ए. व यू.के. आदि देशों में भी समयानुरूप कानूनों में बदलाव होता है। उन्होंने बताया कि मालिमथ समिति द्वारा क्रिमिनल न्याय व्यवस्था में वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप सुधार किए जाने की अनुशंसा की गई थी। किन्तु इसकी अधिकांश सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हो पाई हैं। केन्द्र सरकार द्वारा उन्हें लागू किए जाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री डी.सी.सामंत, पुलिस महानिदेशक श्री ए.एस. गिल एवं आवासीय आयुक्त श्री पी.के.आनंद भी उपस्थित थे।



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