जयपुर, २० दिसम्बर। राज्यपाल श्री एस.के. सिंह का मानना है कि प्रशासन की मूल भावना आमजन के हित में न्याय संगत होनी चाहिए और ऐसे प्रशासक ही लोकप्रिय होते हैं।
राज्यपाल गुरुवार को यहां हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान के स्वर्ण जयन्ती समारोह के अन्तर्गत प्रकाशित पुस्तकों के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था में प्रशासन का विशेष महत्व है और महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का जो मूल मंत्र हमें दिया उसी में प्रशासन का भाव निहित है।
श्री सिंह ने कहा कि प्रशासन का जवाबदेही एवं पारदर्शी होना ही न्याय का दूसरा स्वरूप है और प्रशासन प्रभावकारी तभी हो सकेगा जब एक प्रशासक सत्यवादी एवं स्पष्ट वक्ता हो। राज्यपाल ने कहा कि भावी पीढी को ऐसे संस्कार देने होंगे जिससे वे अपना सही मूल्यांकन कर सके। राज्यपाल ने कहा कि एक अच्छे प्रशासक को अपने हर क्रिया कलाप में गांधी दर्शन का अनुकरण करना चाहिए।
राज्यपाल ने लोक प्रशासन संस्थान की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर सार्थक पुस्तकों के प्रकाशन को एक रचनात्मक प्रयास बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने महिला सशक्तीकरण की चर्चा करते हुए कहा कि वे जाति प्रथा और वर्ण व्यवस्था के समर्थक नहीं ह लेकिन समाज में महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। ऐसे समाज ही तरक्की करते हैं।
श्री सिंह ने पुरजोर शब्दों में कहा कि एक अच्छे प्रशासक को अपने निर्णयों को लम्बित ना करते हुए तत्काल लागू करने चाहिए क्योंकि निर्णयों को लम्बित करने से परिणाम प्रभावित हुए बिना नहीं रहते।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल श्री टी.एन. चतुर्वेदी ने कहा कि आजादी के बाद प्रजातांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन को मूर्तरूप देने के लिए विकेन्द्रीकरण का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा कि आज प्रशासन में भावी चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा तथा उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण को दृष्टिगत रखकर प्रशासनिक निर्णय लेने होंगे। श्री चतुर्वेदी ने कहा कि विकास की जरूरतों के आधार पर प्रशासन में जन सहभागिता को बढावा दिया जाना चाहिए।
प्रारंभ में लोक प्रशासन संस्थान के निदेशक श्री राकेश हूजा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान द्वारा राज्य कर्मचारियों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के पुस्तकालय में लगभग ८० हजार पुस्तकें हैं और यह संस्थान देश के उत्कृष्ट संस्थानों में से एक है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक पद्धति में आ रहे बदलाव को ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।
समारोह में प्रशासनिक विषयों पर प्रकाशित सात पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। संस्थान के अतिरिक्त निदेशक श्री एस.एन. लाठी ने आभार व्यक्त किया।