जयपुर, (विकास यादव) विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पन्द्रह सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल ने राजस्थानी भाषा को बजट सत्र २००८ में ही संवैधानिक मान्यता दिये जाने की मांग को लेकर जयपुर में राज्यपाल महोदय को ज्ञापन दिया. इसी आशय का ज्ञापन प्रदेश मुख्यमन्त्री श्रीमती वसुन्धरा राजे को भी दिया गया. प्रतिनिधि मण्डल में समिति के प्रदेशाध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत, राष्टीय प्रवक्ता इकराम राजस्थानी, प्रदेश कोषाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, जयपुर जिला मन्त्री कपिल गोयल प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदीश मीणा, इन्द्रसिंह, व महेन्द्र मीणा,-जयपुर से जोगाराम मीणा-जालौर से, अजीत यादव-झुंझनू से, भंवर महरिया, महेन्द्र मील व फूलचन्द प्रेमी-सीकर से तथा लादुराम मीणा-पाली से शामिल थे.
इस अवसर पर संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत से कहा कि आज मातृभाषा दिवस के मौके पर प्रदेश के बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर व कोटा संभाग मुख्यालयों पर समिति द्वारा धरने आयोजित किये गए हैं जिनमें जिला कलेक्टर्स की मार्फत प्रधानमन्त्री को राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग के ज्ञापन सौंपे गए है. उन्होने घोषणा की कि अगर केन्द्र सरकार द्वारा ३० मार्च २००८ तक राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनूसूची में शामिल नहीं किया गया तो जयपुर में प्रदेश भर से संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं और मायड भाषा प्रेमियों का विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा.
समिति के जयपुर जिला मन्त्री कपिल गोयल ने कहा कि प्रदेश कार्यकारिणी की एक बैठक आठ मार्च को जयपुर में आयोजित होगी जिसमें संघर्ष की नई रणनीति तय की जाएगी. राष्टीय प्रवक्ता इकराम राजस्थानी ने कहा कि राजस्थानी इस प्रदेश की पहचान है और इस पहचान को बरकरार रखने का दायित्व प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का है. समिति के कोषाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि आज राजस्थानी पूरी दुनिया में छाए हुए हैं लेकिन बडे दुःख की बात है कि उनकी मां स्वरूपा राजस्थानी भाषा को इस देश का राज नहीं मानता. अब वक्त आ गया है कि हम सब इकट्ठे होकर अपनी मातृभाषा को उसका उचित सम्मान दिलाएं.
कांग्रेस के युवा नेता जगदीश मीणा ने कहा की राजस्थानी हमारी मातृभाषा है और इसे संविधान में उचित सम्मान दिलाने के लिए वे हर कदम उठाने को तैयार हैं. उन्होने विश्वास जताया कि केन्द्र सरकार प्रदेश की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इसी बजट सत्र में राजस्थानी को मान्यता देकर जनप्रिय कार्य को अंजाम देगी.