KhbarExpress www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS 11 March 2010
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Cartoon | Video News | Holi
Free News on your website


क्या चाहता है प्रशासक वर्ग
21 Apr 2008

रिश्वतखोरी, भष्टाचार पर मौन के साथ जिला प्रशासन द्वारा आम आदमी को सरकारी कार्यक्रमों और सुविधाओं से दूर रखने की स्थिति से तो हर कोई वाकिफ है और बीकानेर की भोली भाली जनता को इसका शायद मलाल भी नही है, लेकिन प्रशासन द्वारा सडक हादसों से सुरक्षा को लेकर बेईंतहा ढिलाई के कारण आम आदमी के जीवन पर ही खतरे के बादल मंडराने लगे तो कोई भला कैसे चुप रह सकता है!


Add comment          Mail          Print          Write to Editor


By Shyam N Ranga

बीकानेर में पिछले एक सप्ताह से दुर्घटनाओं का दौर जारी है। पिछले एक सप्ताह में करीब पैंतीस लोग अपनी जान गवां चुके है और पचास घायल हो चुके हैं। दर्द की बात तो ये है कि इन दुर्घटनाओं में एक ही परिवार के कई व्यक्तियों की जाने जाने से पूरे के पूरे परिवार समाप्त हो रहे हैं। बीकानेर की चारों दिशाओं में पिछले दिनों में दुर्घटनाऍ हो चुकी है। जयपुर रोड, नोखा रोड, गंगानहर रोड और जैसलमेर रोड पर हुई इन दुर्घटनाओं में एक से लेकर चौदह व्यक्तियों तक की मौत हो चुकी है। अब सवाल यह उठता है कि बीकानेर का आमजन व राजनेता और प्रशासन इन दुर्घटनाओं को लेकर कितना संवेदनशील है यह सोचने की जरूरत है  और साथ ही यह भी विचार करने की आवश्यकता है कि आखिर इन दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन है।
हम सबसे पहले प्रशासन की बात ले तो इतनी दुर्घटनाओं के बाद भी बीकानेर के जिला प्रशासन के कान पर ज तक नहीं रेंगी है। बीकानेर प्रशासन निरंतर हो रही इन दुर्घटनाओं में कुंभकर्णी नींद सो रहा है। इन घटनाओं की सबसे बडी जिम्मेवारी प्रशासन की है। बीकानेर परिवहन कार्यालय आराम से इन दुर्घटनाओं की खबरें पढ रहा है जबकि सबसे ज्यादा जिम्मेवार यही प्रशासन है जहाँ से मनमाने ढंग से ड्राइविंग लाईसेंस जारी होते हैं यहाँ यह तक नहीं देखा जाता है कि जिस व्यक्ति को यह लाईसेंस जारी किया जा रहा है वह इस योग्य है भी या नहीं। शहर में आपको ऐसे पचासों व्यक्ति मिल जाऍंगे जिन्हें कार चलानी नहीं आती लेकिन उनके पास हैवी मोटर विहकल का लाईसेंस है। ये अप्रशिक्षत ड्राइवर दुर्घटनाओं को न्यौता देते हैं। साथ ही वाहनों की फिटनेस और स्पीड कंट्रोल के मुद्दे पर भी परिवहन विभाग मौन साधे बैठा है। बरसों पुराने वाहन आज भी शहर की यातायात व्यवस्था में शामिल है।
दूसरी तरफ हम अगर पुलिस विभाग की बात करें तो यह विभाग भी हो रही दुर्घटनाओं पर लाचार नजर आता है। ओवरलोड वाहन पुलिसकर्मियों की ऑंखों के सामने से गुजर जाते है और पुलिस महकमें के व्यक्ति लाचार खडे रहते है। बिना हेलमेट व बिना लाईसेंस के गाडी चलाना तो बीकानेर में आम बात है। इन दुर्घटनाओं पर बीकानेर पुलिस क्या कर रही है यह कोई नहीं जानता। सिर्फ यातायात सप्ताह के नाम पर साल में दो बार वूसली करने वाले ये लोग आम जनता की परेशानी से नावाकीफ है।
अब अगर हम बीकानेर की राजनीति की बात करें तो यह लगता है कि बीकानेर में राजनीतिक शून्यता का महौल है। जहाँ यह शहर विकास को तरस रहा है वहीं इन दुर्घटनाओं के बाद राजनीतिक मौन ने राजनीतिक संवेदनहीनता को प्रकट किया है। वसुंधरा राजे की बीकानेर यात्रा व अशोक गहलोत  की यात्रा के दौरान लाखों रूपये के अखबारी प्रचार पाने वाले नेता इन दुर्घटनाओं पर मौन नजर आते है। बात बात पर अखबार व मीडिया में जगह पाने के ये लेटरपेडिए जनता की पीड म मौन है। देवीसिंह भाटी को छोडकर बीकानेर के एक भी राजनेता ने इन दुर्घटनाओं पर अपना कमेंट तक नहीं दिया। जबकि होना यह चाहिए कि ये नेता एक मंच पर आए व बीकानेर प्रशासन से ये सवाल पूछे कि वो कुंभकर्णी नींद से कब जागेगा। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कलेक्टर कार्यालय पर धरना देने वाले इन सफेदपोश्त लोगों को चाहिए कि एक धरना इन मौतों के नाम भी दिया जाए ताकि जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा सके।
बात करें आम जनता की तो आज की इस भागदौड की जिंदगी ने आम आदमी को इतना व्यस्त बना दिया है कि वह अपने जीवन से खेलते हुए भी नहंी डरता। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी तो उस व्यक्ति की है जिसकी जिंदगी है। आम आदमी को चाहिए कि वह दुर्घटनाओं के प्रति जागरूक रहे और अपने जीवन की स्वयं रक्षा करे। जीवन का कोई भी काम जीवन से ज्यादा नहीं है। एक बार अपने परिवार के बारे में अवश्य सोचे और साथ की यह सोचे की आफ बाद उनका क्या होगा और बाद में ही किसी सफर पर निकले । अवैध वाहनों में सफर न करे और खराब हालत में चल रहे वाहनों में यात्रा न करे। आम आदमी की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है।
बहुत हो चुका अब न सहेंगे आखिर कब तक य ही चुप रहेंगे। दिन ब दिन हो रही इन दुर्घटनाओं पर एक शेर याद आता है पीर पर्वत सी हो गई है अब तो पिघलनी चाहिए इस हिमालय से अब एक गंगा निकलनी चाहिए।




Discuss this story on KhabarExpress Forum  

More News: Road mishap Road Accident Bikaner

Pelagian Dictionary

चाहता
प्रशासक
वर्ग


Comments to this News

Be the first to comment on this News


 
Post Your Comments to this News
 Posting Rules
 
  Name: Email:
 

Top Story of The Day
Latest Articles

Chigusa Takaku in bollywood moive The Japanese Wife


Software Watch

GISEYE Vector Converter




GISEYE Vector Converter application is designed for vector maps conversion from one type and format into another.

Click Here

Powered by
UniqueIdea.net

Deepika Padukon and Saif Ali Khan in Love Aaj Kal


Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares